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महाराष्ट्र: मराठवाडा में 5 साल में 5000 किसानों ने की आत्महत्या, सबसे अधिक पिछले साल

 Published : Jan 14, 2026 11:52 pm IST,  Updated : Jan 14, 2026 11:52 pm IST

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्याओं का दुखद सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के मामले चौंका रहे हैं। यहां पिछले पांच साल में 5,000 से अधिक किसानों ने अपनी जान दी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PTI (FILE PHOTO)

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े डराने वाले हैं। पिछले पांच साल में 5,000 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है और इनमें से भी सबसे ज्यादा 1129 किसानों ने पिछले साल जान दी। बुधवार को जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ।

2025 में कितने किसानों ने की आत्महत्या?

संभागीय आयुक्त कार्यालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 1,129 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि 2021 से अब तक कुल 5,075 आत्महत्याओं की सूचना मिली है।

मराठवाड़ा संभाग में छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, नांदेड़, बीड, धाराशिव, हिंगोली और लातूर जिले आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में 887 किसानों ने, वर्ष 2022 में 1,023 किसानों ने, वर्ष 2023 में 1,088 किसानों ने, वर्ष 2024 में 948 किसानों ने और वर्ष 2025 में 1,129 किसानों ने आत्महत्या की।

किस जिले में कितनी खुदकुशी?

जिलेवार आंकड़ों में बीड जिले में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं दर्ज हुई हैं। पिछले साल यहां किसानों के आत्महत्या करने के सबसे अधिक 256 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 193 किसानों के परिवारों को अनुग्रह राशि दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में छत्रपति संभाजीनगर में 224 किसानों ने आत्महत्या की। जालना में 90 किसानों ने , परभणी में 104, हिंगोली में 68, नांदेड़ में 170, बीड में 256, लातूर में 76 और धाराशिव में 141 किसानों ने आत्महत्या की।

मई से अक्टूबर तक के महीने सबसे घातक रहे

बता दें कि पिछले साल मई महीने में मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में बेमौसम बारिश हुई थी। क्षेत्र के विभिन्न जिलों में 125 से 150% अधिक बारिश दर्ज की गई। इलाके में सितंबर-अक्टूबर 2025 में विनाशकारी बाढ़ आई थी। पिछले साल दर्ज की गई कुल 1,129 आत्महत्या के मामलों में 537 घटनाएं मई से अक्टूबर के बीच हुई, जब बारिश से संबंधित आपदाओं से क्षेत्र प्रभावित था। 

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