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पहलगाम आतंकी हमलाः साथ जिए, साथ ही मरे, दो जिगरी दोस्तों का दुखद अंत, पहली बार घूमने गए और चली गई जान

 Published : Apr 24, 2025 07:47 am IST,  Updated : Apr 24, 2025 08:47 am IST

पुणे के रहने वाले दो करीबों दोस्त भी पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए। दोनों जिगरी दोस्त परिवार के साथ पहली बार घूमने के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे लेकिन अब वह कभी भी जिंदा वापस घर नहीं आ सकेंगे।

आतंकवादी हमले के शिकार कौस्तुभ गणबोटे की बहन अर्चना  - India TV Hindi
आतंकवादी हमले के शिकार कौस्तुभ गणबोटे की बहन अर्चना Image Source : PTI

पुणेः जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वालों में पुणे के दो जिगरी दोस्त भी शामिल थे। मंगलवार को पहलगाम के पास बैसरन में हुए घातक आतंकी हमले में महाराष्ट्र के छह पर्यटकों में कौस्तुभ गणबोटे और उनके दोस्त संतोष जगदाले भी मारे गए। करीब 50 साल के दोनों दोस्त पहली बार कश्मीर की अपनी यात्रा के लिए उत्साहित थे। उन्हें नहीं पता था कि यह यात्रा उनके परिवारों के लिए जीवन भर के दुख में बदल जाएगी।

पहली बार परिवार के साथ कश्मीर गए थे घूमने

गणबोटे के करीबी दोस्तों ने कहा कि वह पहली बार घाटी घूमने गए थे। वह वास्तव में बहुत कम ही पुणे से बाहर जाते थे। अपने 'फरसाण' स्नैक्स के कारोबार को बढ़ाने के लिए जीवन भर कड़ी मेहनत करने के बाद गणबोटे ने कश्मीर जाकर घूमने का फैसला किया।

कौस्तुभ गणबोटे और संतोष जगदाले थे जिगरी दोस्त

कौस्तुभ गणबोटे अपनी पत्नी संगीता और संतोष जगदाले, पत्नी प्रगति और उनकी बेटी असावरी के साथ कश्मीर घूमने गए थे। अपनी पूरी जिंदगी, वे अपने व्यवसाय को बढ़ाने में व्यस्त रहे। यह पहली बार था जब गणबोटे ने पत्नी के साथ शहर से बाहर यात्रा करने का फैसला किया था। उन्होंने अपने करीबी दोस्त संतोष और उनके परिवार के साथ यात्रा की योजना बनाई। 

गणबोटे के बचपन के दोस्त ने दी ये जानकारी

गणबोटे के बचपन के दोस्त सुनील मोरे ने कहा कि आठ दिन पहले ही उन्होंने मुझे कश्मीर योजना के बारे में बताया था। वे बहुत उत्साहित थे।  मोरे ने कहा कि गणबोटे अपनी पूरी जिंदगी रास्ता पेठ की एक संकरी गली में रहे और हाल ही में उन्होंने कोंढवा-सासवाड़ रोड पर एक घर बनाया है, जहां उनकी फरसाण फैक्ट्री भी स्थित है।

गणबोटे अपने खुशमिजाज और मददगार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। अपने इलाके में एक प्रिय व्यक्ति बने रहे। उनके दोस्त ने यह भी कहा कि गणबोटे हाल ही में दादा बने हैं और इस खबर से वे बहुत खुश थे। मोरे ने याद करते हुए बताया कि गणबोटे इसे "अपना दूसरा जन्म" बताते थे।

व्यवसाय में भी गणबोटे की मदद करते थे जगदाले 

गणबोटे संतोष जगदाले के करीबी दोस्त थे, जो अक्सर उनके उत्पादों की मार्केटिंग में मदद करते थे। जगदाले इंटीरियर डिजाइनिंग का व्यवसाय चलाते थे। उनके भाई अविनाश ने बताया कि वे हारमोनियम भी बजाते थे। उन्होंने बताया कि जगदाले को घूमना और नई जगहों पर जाना बहुत पसंद था। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार वैकुंठ श्मशान घाट पर किया जाएगा।

इनपुट- पीटीआई

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