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Maha Shivaratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 की तारीख को लेकर कंफ्यूजन? नोट कर लें सही डेट, जानिए क्या चाहिए पूजा सामग्री

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jan 27, 2026 08:50 pm IST,  Updated : Jan 27, 2026 08:50 pm IST

Maha Shivaratri 2026 Date: महाशिवरात्रि का दिन बेहद पावन माना जाता है। यह पर्व महादेव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। चलिए जानते हैं इस साल महाशिवरात्रि का पर्व कब मनाया जाएगा और क्या पूजा सामग्री चाहिए।

Maha Shivaratri 2026 महाशिवरात्रि 2026 कब है?- India TV Hindi
महाशिवरात्रि 2026 डेट Image Source : FILE

Maha Shivaratri 2026 Date: महाशिवरात्रि सनातन धर्म के सबसे बड़े और प्रमुख पर्वों में से एक है। आदि देव शिव शंकर को समर्पित इस महापर्व का सभी को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। भोलेनाथ के आराधकों के लिए यह सबसे अहम दिन है, जो आस्था, साधना और भक्ति का प्रतीक है। वैसे हर महीने के महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। वहीं, फाल्गुन माह के कृष्ण चतुर्दशी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसे देश-दुनिया में महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। ज्यादातर लोग फरवरी में आने वाली महाशिवरात्रि की डेट को लेकर कंफ्यूज हैं, तो आइए जानते हैं कि साल 2026 में यह महापर्व किस तारीख को पड़ रहा है और इस महापूजा को सफल बनाने के लिए कौन-कौन सी सामग्री की जरूरत पडे़गी। 

कब है महाशिवरात्रि 2026?

पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2026, रविवार को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगी और इसका समापन 16 फरवरी 2026 को शाम  5 बजकर 34 मिनट पर होगा। सामान्यतः अधिकतर हिंदू त्योहार उदया तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि का निर्णय निशिता काल में चतुर्दशी तिथि की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है। 15 फरवरी की रात्रि में निशिता काल के दौरान चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए महाशिवरात्रि इसी दिन मनाई जाएगी। 

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह पावन रात्रि थी जब शिव जी शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे। सनातन धर्म शास्त्रों में शिवलिंग को सृष्टि का प्रतीक बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि मन, चित्त, बुद्धि, जीव, माया, ब्रह्म, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी तत्वों के समन्वय से शिवलिंग का निर्माण हुआ है। यही वजह है कि महाशिवरात्रि की रात की गई शिव उपासना बहुत ही फलदायी मानी गई हैं। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर शिव जी और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए इस दिन सभी देश भर के कई शिवालयों से शिव जी की बारात भी निकाली जाती है। 

महाशिवरात्रि पूजा सामग्री

  • मिट्टी के दीपक 5 या 11
  • बेल पत्र, धतूरा, भांग, पान के पत्ते
  • शिव पार्वती की प्रतिमा और शिवलिंग
  • नारियल, रक्षासूत्र, कुमकुम, सिंदूर, भस्म, तिल, जौ
  • पीली सरसों
  • अक्षत (अखंड चावल)
  • आभूषण
  • पीला कपड़ा, जनेऊ
  • केसर, गुलाब जल, लौंग, इलायची, इत्र, सुपारी, हवन सामग्री
  • वस्त्र (मां पार्वती और शिव जी के लिए। मां पार्वती के लिए लाल साड़ी, चुनरी, शृंगार सामग्री, भगवान शिव के आभूषण आदि।
  • पीला कपड़ा
  • जनेऊ
  • भोग के लिए मिठाई और फल
  • आम का पल्लव
  • शिवलिंग के अभिषेक के लिए गाय का दूध

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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