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Laxmi Chalisa In Hindi Lyrics: घर में रहती है आर्थिक तंगी तो जरूर करें इस चालीसा का पाठ, मां लक्ष्मी दोनों हाथों से बरसाएंगी कृपा

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jan 26, 2026 04:37 pm IST,  Updated : Jan 26, 2026 04:48 pm IST

Laxmi Chalisa: नियमित रूप से माता लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को शुभ और पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है।

माता लक्ष्मी- India TV Hindi
माता लक्ष्मी Image Source : FREEPIK

Mata Lakshmi Chalisa: इस संसार में मां लक्ष्मी की कृपा के बिना कोई भी व्यक्ति अन्न, वस्त्र और अन्य वैभव का सुख प्राप्त नहीं कर सकता है। माता लक्ष्मी की एक दृष्टि एक पल में रंक को राजा बना सकती हैं। वहीं देवी लक्ष्मी की नाराजगी राजा को रंक भी बना सकती है। इसलिए मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए हर व्यक्ति अपनी तरफ से हर संभव प्रयास और उपाय करता है। माता लक्ष्मी को धन, समृद्धि , वैभव और ऐश्वर्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। देवी लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है क्योंकि वे एक स्थान पर या एक व्यक्ति के पास स्थायी रूप से नहीं रुकतीं। ऐसे में नियमित रूप से मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए जिससे उनकी कृपा दृष्टि सदैव आपके घर-परिवार पर बनी रहे। पूजा के अलावा लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत ही शुभ और लाभदायक माना गया है। 

धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को सभी तरह के भौतिक सुख मिलते हैं। इसके साथ ही मानसिक शांति और परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली भी बनी रहती है। नियमित रूप से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी तरह के नकारात्मक शक्तियां भी दूर होती हैं।

॥दोहा॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।

मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

सोरठा 

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

चौपाई

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

श्री लक्ष्मी चालीसा

तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

दोहा

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

लक्ष्मी चालीसा पाठ करने का नियम

  • लक्ष्मी चालीसा का पाठ सुबह या शाम के समय ही करें। 
  • लक्ष्मी चालीसा का पाठ करते समय सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से पहले दीया जलाएं और मां लक्ष्मी को फूल अर्पित करें। 
  • शांत और शुद्ध मन से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
  • अगर रोजाना संभव नहीं है शुक्रवार के दिन जरूर लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
  • सप्ताह का शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करना फलदायी माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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