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इस एक गलती की वजह से जब 1979 में विश्व रिकॉर्ड बनाने से चूक गए थे सुनील गावस्कर

गावस्कर की 221 रन की पारी से जो उस समय मैच की चौथी पारी में दूसरा सर्वोच्च स्कोर था। यह दिग्गज भारतीय सलामी बल्लेबाज उस समय केवल दो रन से वेस्टइंडीज के जार्ज हैडली के रिकॉर्ड की बराबरी करने से चूक गया था।

Bhasha Bhasha
Updated on: September 04, 2020 15:24 IST
Sunil Gavaskar missed out on making the world record in 1979 because of this one mistake- India TV Hindi
Image Source : GETTY IMAGES Sunil Gavaskar missed out on making the world record in 1979 because of this one mistake

नई दिल्ली। वह चार सितंबर 1979 का दिन था जब केनिंगटन ओवल पर सुनील गावस्कर ने अपनी बेमिसाल बल्लेबाजी से इंग्लैंड की पेशानी पर बल ला दिये थे लेकिन तब वह केवल दो रन से चौथी पारी में सर्वोच्च स्कोर का विश्व रिकॉर्ड बनाने से चूक गये थे और भारत को भी जीत की दहलीज पर पहुंचकर ड्रा से संतोष करना पड़ा था। पहला टेस्ट गंवाने और अगले दो टेस्ट मैच ड्रा कराने के बाद ओवल में चौथे टेस्ट मैच में भारत के सामने 438 रन का मुश्किल लक्ष्य था। उस समय किसी ने भी विश्वास नहीं किया था कि पांचवें दिन जब मैच ड्रा समाप्त होगा तो भारतीय टीम लक्ष्य से केवल नौ रन दूर होगी। 

यह संभव हो पाया गावस्कर की 221 रन की पारी से जो उस समय मैच की चौथी पारी में दूसरा सर्वोच्च स्कोर था। यह दिग्गज भारतीय सलामी बल्लेबाज उस समय केवल दो रन से वेस्टइंडीज के जार्ज हैडली के रिकॉर्ड की बराबरी करने से चूक गया था जिन्होंने 1930 में इंग्लैंड के खिलाफ किंग्सटन में 223 रन बनाये थे। 

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यह रिकॉर्ड आज भी हैडली के नाम पर है। न्यूजीलैंड के नाथन एस्टल ने 2002 में क्राइस्टचर्च में इंग्लैंड के खिलाफ गावस्कर की रन संख्या को पार करने के बाद 222 रन पर आउट हो गये थे। गावस्कर अपनी इस पारी के दौरान आठ घंटे 10 मिनट तक क्रीज पर रहे और उन्होंने 443 गेंदों का सामना करके 21 चौके लगाये। 

भारत ने जिन तीन अवसरों पर चौथी पारी में 400 या इससे अधिक रन बनाये, उनमें से दो मौकों पर गावस्कर ने शतक लगाया और पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने ओवल की पारी के बहाने उनके इस प्रदर्शन को याद किया। 

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बेदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘पूरी विनम्रता के साथ भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने चौथी पारी में तीन अवसरों पर 400 से अधिक रन बनाये जिसमें से एक मैच ड्रॉ रहा, एक में उसे हार मिली और एक में जीत। यह जरूरी नहीं कि यह क्रम में हो। और ‘ऑरिजनल लिटिल मास्टर’ (गावस्कर) ने तीनों में अहम भूमिका निभायी थी।’’ 

गौरतलब है कि भारत ने 1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में जब 403 रन के रिकॉर्ड लक्ष्य को हासिल किया था तब गावस्कर ने 102 रन की पारी खेली थी लेकिन 1978 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में 493 रन के लक्ष्य के सामने भारत के 445 रन में यह सलामी बल्लेबाज 29 रन का योगदान ही दे पाया था। 

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ओवल में हालांकि गावस्कर ने टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचा दिया था लेकिन उनके आउट होते ही भारतीय पारी ढह गयी और उसने आखिर में आठ विकेट पर 429 रन बनाकर बमुश्किल मैच ड्रॉ कराया। गावस्कर और चेतन चौहान ने चौथे दिन भारत का स्कोर बिना किसी नुकसान के 76 रन पर पहुंचाया। इस तरह से भारत को पांचवें दिन जीत के लिये 362 रन बनाने थे। 

पांचवें दिन लंच तक स्कोर बिना किसी नुकसान के 169 रन हो गया। ये दोनों बल्लेबाज दूसरे सत्र में इसे 213 रन तक ले गये। चौहान इस स्कोर पर 80 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर (52) स्कोर को 366 रन तक ले गये। भारत लक्ष्य से 76 रन दूर था। वेंगसरकर के आउट होने के बाद गुंडप्पा विश्वनाथ की जगह कपिल देव आये जो खाता भी नहीं खोल पाये। 

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विजडन ने तब लिखा था,‘‘विश्वनाथ के पांचवें विकेट गिरने तक क्रीज पर नहीं आने से अधिकतर लोग हैरान थे। उनके देर से आने के कारण भारत जीत से वंचित हो गया था।’’ 

जब भारत का स्कोर 389 रन था तो इयान बॉथम अपना अगला स्पैल के लिये आये। इससे पहले गावस्कर ने पानी मंगवाया। जॉन वुडकॉक ने ‘द क्रिकेटर’ में लिखा, ‘‘यह उनकी दिन की पहली गलती हो सकती है। इससे उनकी एकाग्रता भंग हो गयी थी।’’ 

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गावस्कर भले ही हैडली के विश्व रिकॉर्ड से चूक गये थे लेकिन चौथी पारी में सर्वोच्च स्कोर का भारतीय रिकॉर्ड अब भी उनके नाम पर है। उनसे पहले यह रिकॉर्ड विजय हजारे (122 बनाम वेस्टइंडीज, मुंबई 1949) के नाम पर था। 

गावस्कर के बाद भारतीय बल्लेबाजों में केएल राहुल (149), वेंगसरकर (नाबाद 146), विराट कोहली (141) और सचिन तेंदुलकर (136) का नंबर आता है।

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