एप्पल की भारत में मुश्किलें बढ़ सकती है। अमेरिकी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके लिए सरकारी एजेंसी ने एप्पल को फाइनल वॉर्निंग दे दी है। आईफोन बनाने वाली कंपनी पर एंटीट्रस्ट नियमों के उल्लंघन का आरोप है। CCI इसके लिए एप्पल पर 3 लाख करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। आखिर, भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) ने एप्पल को चेतावनी क्यों दी है? आइए जानते हैं...
क्या है मामला?
भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग यानी कम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने एप्पल को चेतावनी देते हुए एंटीट्रस्ट के आरोप का जवाब देने के लिए कहा है। अगर, आईफोन बनाने वाली कंपनी ने CCI के लेटर का जवाब नहीं दिया तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। दरअसल, यह मामला आईफोन और आईपैड के iOS App Store से जुड़ा है। एप्पल ऐप स्टोर पर बाजार में अपने दबदबे के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। एप्पल के खिलाफ यह मामला आज का नहीं है, बल्कि पिछले चार साल यानी 2022 से यह चल रहा है। कई इंडियन स्टार्ट-अप्स ने एप्पल के खिलाफ मोनोपोली की शिकायत की थी, जिसे लेकर CCI ने कंपनी ने जवाब मांगा है।
एप्पल पर आरोप है कि उसने अपने ऐप स्टोर के लिए ऐसे नियम बनाए हैं, जो डेवलपर्स को नुकसान पहुंचाते हैं। कंपनी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। इसकी जांच 2024 में पूरी हुई थी, जिसमें CCI ने कहा था कि एप्पल ने अपनी डोमिनेंट पोजीशन का मिसयूज किया है। CCI को एप्पल की तरफ से जवाब मिलने में साल भर से ज्यादा की देरी हुई है। अक्टूबर 2024 में CCI ने एप्पल से इसे लेकर जवाब तलब किया था, लेकिन आईफोन बनाने वाली कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।
एप्पल को आखिरी वॉर्निंग
भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग ने एप्पल को आखिरी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जवाब देने के लिए अब और समय नहीं दिया जाएगा। अगर, एप्पल अगले हफ्ते तक CCI को इस मामले में जवाब नहीं देता है तो उस पर करीब 38 बिलियन डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
CCI ने एप्पल को ग्लोबल कंपनी के तौर पर जुर्माना लगाने की बात कही है। एप्पल ने इस नियम को अदालत में चुनौती दी है और कहा है कि उस पर जुर्माना उसी बिजनेस के आधार पर लगाया जाए, जो भारत में हुआ है तो सही है। एप्पल ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस पूरे मामले को रोकने की कोशिश भी की थी। एप्पल और CCI के बीच चल रहे इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 जनवरी 2026 को है, जिसमें एप्पल की चुनौती पर फैसला सुनाया जा सकता है।
एप्पल कर रहा मोनोपोली
CCI का कहना है कि एप्पल जैसी बड़ी टेक कंपनियां ऐप स्टोर पर ऐप बेचने के लिए डेवलपर्स से 15 से 30 प्रतिशत तक का कमीशन लेती है। कई बार डेवलपर्स को अपने ऐप में बाहरी पेमेंट लिंक डालने की छूट नहीं मिलती है, जिसकी वजह से उन्हें काफी नुकसान होता है क्योंकि उनके पास आईफोन यूजर्स तक पहुंचने के लिए कोई और दूसरा रास्ता नहीं मिलता है। इस मामले पर CCI ने एप्पल को कहा है कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर गलत तरीके से दबदबा बनाया है। छोटे स्टार्ट-अप्स और कंपनियों को इसकी वजह से काफी नुकसान होता है और उनके पास कमाई करने का कोई जरिया नहीं बचता है।
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