गूगल ने करोड़ों एंड्रॉइड यूजर्स की बड़ी टेंशन खत्म कर दी है। उन्हें स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या से निजात मिलने वाला है। इसके लिए गूगल ने एक अतरंगी सॉल्यूशन खोज लिया है, जिसे जल्द रोल आउट किया जाएगा। इसमें फोन की बैटरी इस्तेमाल करने वाले बैकग्राउंड ऐप्स को लेकर चेतावनी मिलेगी, ताकि यूजर्स को यह पता चलेगा कि उनके फोन में कौन से ऐप्स बिना इस्तेमाल किए भी बैटरी की खपत करते हैं।
लेकर आया नया सिस्टम
रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल ने इसके लिए नया सिस्टम तैयार किया है, जो यूजर्स को इस बात की जानकारी देगा कि कौन से ऐप्स चुपके से फोन की बैटरी खर्च कर रहे हैं। एंड्रॉइड यूजर्स को नए अपडेट के साथ यह फीचर मिलने वाला है। इसमें यूजर्स को सबसे ज्यादा बैटरी खपत करने वाले ऐप्स की जानकारी मिलेगी। साथ ही, यूजर्स को बैकग्राउंड में बैटरी खर्च करने वाले ऐप्स को लेकर चेतावनी भी जारी की जाएगी।
लंबे समय से दुनियाभर के करोड़ों एंड्रॉइड यूजर्स फोन कम इस्तेमाल करने के बावजूद बैटरी की खपत वाली समस्या को लेकर परेशान रहे हैं। गूगल का यह नया सिस्टम यूजर्स की इस बड़ी दिक्कत को खत्म कर देगा। साथ ही, फोन की बैटरी की परफॉर्मेंस इंप्रूव करने में भी यूजर्स को मदद मिलेगा। कंपनी का यह नया परफॉर्मेंस ट्रैकिंग सिस्टम एक्सेसिव पार्शियल वेक लॉक्स मैट्रिक पर काम करता है। गूगल ने इसके लिए कई महीनों तक बीटा टेस्टिंग की है। यह फीचर अब आधिकारिक तौर पर लाइव हो गया है, जिसे एंड्रॉइड डिवाइस के लिए रोल आउट किया जा रहा है।
बैकग्राउंड ऐप्स की मिलेगी जानकारी
गूगल का यह नया सिस्टम यूजर द्वारा फोन इस्तेमाल नहीं करने के दौरान CPU इस्तेमाल करने वाले ऐप्स की पहचान करेगा और चेतावनी जारी करेगा। इस फीचर का फायदा न सिर्फ फोन की बैटरी को बचाने में होगा बल्कि हैकर्स द्वारा फोन में इस्तेमाल किए गए डेटा चोरी करने वाले ऐप्स की पहचान करने में भी होगा। आम तौर पर हैकर्स यूजर्स के फोन से डेटा चुराने के लिए हिडन स्पाइवेयर इंस्टॉल करते हैं। ये स्पाइवेयर बैकग्राउंड में फोन से डेटा की चोरी करते रहते हैं, जिसकी भनक यूजर को नहीं लगती है। इस फीचर के आने से यूजर्स को उन ऐप्स के बारे में पता चलता रहेगा, जो बैकग्राउंट में बैटरी का इस्तेमाल करते हैं।
गूगल ने अपने लेटेस्ट ब्लॉग पोस्ट में इस नए सिस्टम के बारे में जानकारी शेयर की है। यह सिस्टम ऐप्स को एक्सेसिव बैटरी यूसेज वाली कैटेगरी में क्लासिफाइड करेगा, जिसकी वजह से यूजर्स को यह जानकारी मिलेगी कि कौन से ऐप्स इस कैटेगरी में शामिल हैं और बैटरी की सबसे ज्यादा खपत कर रहे हैं। इसके अलावा 1 मार्च 2026 से हाई बैकग्राउंड एक्टिविटी वाले ऐप्स के लिए रेड अलर्ट वार्निंग जारी करना शुरू कर देगा, जो यूजर्स को फोन की बैटरी की खपत को कम करने में मदद करेगा।
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