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2030 तक भारत बना लेगा देसी सुपरकम्प्यूटर, कई सेक्टर के लिए गेम चेंजर होगी ये तकनीक

आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। 2030 तक भारत में खुद का देसी सुपरकम्प्यूटर बनाया जा सकेगा। इस सुपरकम्प्यूटर को 2032 तक मार्केट में उतारा जा सकेगा।

Edited By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
Published : Dec 12, 2025 05:50 pm IST, Updated : Dec 12, 2025 05:50 pm IST
Supercomputer- India TV Hindi
Image Source : AP सुपरकम्प्यूटर

भारत में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति हो रही है। केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत 2030 तक देसी सुपरकम्प्यूटर मिल सकता है। सुपरकम्प्यूटिंग इंडिया सम्मेलन 2025 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के हेड अमितेश कुमार सिन्हा ने इस बात की जानकारी दी है। अमितेश सिन्हा ने कहा कि साल 2030 तक हमारा सुपरकम्प्यूटटर का पूरा सिस्टम भारतीय होगा। इसके बाद 2032 तक से सुपरकम्प्यूटर बाजार में बिकने लगेंगे।

उन्होंने इस सम्मेलन में कहा कि फिलहाल भारत में यूज होने वाले सुपरकम्प्यूटर में 50 प्रतिशत से ज्यादा पार्ट्स भारत में बने हैं। आने वाले 10 साल में ये 70 प्रतिशत के ऊपर चले जाएंगे। हाल ही में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने की नई योजना शुरू की है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत भारत मे चिप बनाने से लेकर पैकिंग करने और बड़ी फैक्ट्रियां लगाने के करीब 10 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इसके बाद भारत में सुपरकम्प्यूटर पूरी तरह से डिजाइन किया जा सकेगा।

किन सेक्टर्स को होगा फायदा?

देसी सुपरकम्प्यूटर बनने के बाद मौसम की सटीक भविष्यवाणी से लेकर नई दवाइयां और वैक्सीन बनाने में मदद मिलेगी। यही नहीं मिसाइल और लड़ाकू विमान जैसे हथियार गोपनीया और तेज बनाए जा सकेंगे। टेक्नोलॉजी के एडवांसमेंट का फायदा हाई-टेक नौकरियों, बिजली, पानी और ट्रैफिक की प्लानिंग करने में होगा। भारत पूरी तरह तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा।

केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत और नेशनल सुपरकम्प्यूटिंग मिशन जैसे प्रोग्राम की वजह से भारत में चिप बनाने से लेकर सीपीयू, जीपीयू और एआई एक्सलेटर डिजाइन किया जा सकेगा। इसके लिए रोडमैप तैयार किया जा चुका है। इस पर रिसर्च करने के लिए सरकार ने कॉलेजों और स्टार्टअप को 38 हजार से ज्यादा जीपीयू दिए हैं। भारत में एआई चिप और सुपरकम्प्यूटिंग चिप बनाने का काम किया जा रहा है।

ISM के प्रमुख अमितेश सिन्हा ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर, क्वांटम और एआई सेक्टर एक-दूसरे की मदद से आगे बढ़ना चाहते हैं। भारत दुनिया के साथ तकनीक साझा करने के लिए तैयार है, ताकि पूरी मानवता का भला किया जा सके। पिछले 10 साल में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट बनाने का काम 6 गुना तक बढ़ गया है।

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