Baba Vanga Predictions: बाबा वेंगा ने भारत को लेकर भविष्यवाणी की थी। उन्होंने जो साल 2022 के लिए भविष्यवाणी की थी, उसमें कहा गया है कि भारत पर टिड्डियों का हमला हो सकता है।
किसानों को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Crop Insurance Scheme) एक बड़ी राहत प्रदान करती है। यह फसल के नुकसान का बीमा होता है, इसमें फसल बर्बाद होने पर नुकसान की भरपाई सरकार करती है।
Punjab News: पंजाब में 34,000 हेक्टेयर से अधिक धान की फसल में ‘बौनेपन’ का रोग देखा गया है। राज्य के कृषि विभाग ने इस बीमारी (ड्वार्फ डिजीज) से प्रभावित क्षेत्रों में औसतन पांच प्रतिशत फसल के नुकसान का अनुमान लगाया है।
MP News: हरदा के किसान मुकेश के मुताबिक हरदा में एक भी पेशेंट नहीं था आज हमारे यहां कैंसर के करीब 100 मरीज हैं। जहरीली खेती के बारे में खुद कृषि मंत्री कमल पटेल ने माना उनके क्षेत्र में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं।
महाराष्ट्र सहित पूरे देश को ही फिलहाल बढ़े हुए तापमान का प्रहार सहन करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में तो धूप के प्रहार के साथ ही बेमौसम बारिश, तूफानी हवाएं एवं ओलावृष्टि का फटका भी लग रहा है।
हालांकि, इस साल खरीफ सत्र के दौरान मोटा अनाज और तिलहन उत्पादन मामूली रूप से कम रहने का अनुमान है।
धान खरीफ की एक प्रमुख फसल है, लेकिन इसे रबी के मौसम में भी उगाया जाता है। बयान में कहा गया है, ‘‘इस (खरीद) से मौजूदा खरीफ विपणन सत्र के दौरान 130.47 लाख किसानों का फायदा हुआ।
भारत में ट्राइफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन का बाजार वर्तमान में 400 करोड़ रुपये के करीब होने का अनुमान है। इसका उपयोग अनाज, धान की फसलों, सब्जियों और फल जैसे टमाटर, अंगूर, आम, मिर्च एवं गेहूं में फंगल रोगजनकों को रोकने के लिए किया जाता है।
पीएम फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों की फसल को बाढ़, आंधी, ओले और तेज बारिश से होने वाले नुकसान की भरपाई करना है। इसमें बेहद मामूली प्रीमियम पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है
देशभर में रबी फसलों की कटाई तकरीबन 50 फीसदी पूरी हो चुकी है और जायद सीजन की फसलों की बुवाई पिछले साल से 20 फीसदी से बढ़कर 56.40 लाख हेक्टेयर से ज्यादा हो चुका है
तीन कृषि कानूनों के मामले के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से किसानों को निश्चित तोर पर लाभ होने वाला है।
देशभर में 325.35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है, जो कि पिछले साल से 3.63 फीसदी अधिक है। उत्तर प्रदेश में 92.52 लाख हेक्टेयर, मध्यप्रदेश में 85.37 लाख हेक्टेयर, पंजाब में 35 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 28.86 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 25.15 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है।
देशभर में बीमित क्षेत्र अभी तक महज 30 फीसदी है जिसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। सबसे ज्यादा फसल बीमित करने वाला राज्य कर्नाटक है जहां के किसानों की 40 से 50 फसलें बीमित होती हैं।
27 नवंबर तक पहले से ही रबी फसल की बुवाई 348 लाख हेक्टेयर (हेक्टेयर) में हो चुकी थी, जो पिछले पूरे सत्र में हुई बुवाई की तुलना में चार प्रतिशत अधिक है तथा पिछले पांच वर्षो के बुवाई के औसत से दो प्रतिशत अधिक है।
ब्याज पर ब्याज से छूट योजना में एमएसएमई ऋण, शिक्षा ऋण, गृह ऋण, उपभोक्ता सामान ऋण, क्रेडिट कार्ड बकाया, ऑटोमोबाइल ऋण, प्रोफेशनल्स के लिए पर्सनल लोन और उपभोग ऋण के तहत 2 करोड़ रुपए तक के ऋण को शामिल किया गया है।
साल 2020-21 के वित्तीय वर्ष में सरकार ने कृषि उपकरणों पर करीब 5500 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया है। इस सब्सिडी का इस्तेमाल ऐसे उपकरणों की खरीद में किया जाएगा जो किसानों को बेहतर उपज और उसके बेहतर प्रबंधन में मदद करते हैं।
सरकार के द्वारा संसद को दिए लिखित जवाब के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान बिहार में देखने को मिला है। इसके अलावा कर्नाटक और असम में भी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।
खरीफ सत्र 2020 में बुवाई का रकबा दो से तीन प्रतिशत बढ़कर 10.9 करोड़ हेक्टेयर होने से कृषि उत्पादन में 5-6 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त उत्पादकता भी दो से तीन प्रतिशत बढ़ने से, बम्पर खरीफ उत्पादन होने के आसार
चालू खरीफ सीजन में अब तक 692 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई
खाद्य तेल का उत्पादन बढ़ाकर आयत कम करने की भी योजना
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