एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष एवं शोध विश्लेषक (जिंस और मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निरंतर निवेश से रुपये को समर्थन मिला है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती का दौर जारी है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और आयतकों के लिए राहत की खबर है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार मजबूत हो रहा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है।
रुपये में मजबूती से भारत को आयात करना सस्ता होगा। इससे महंगाई कम करने में मदद मिलेगी। विदेश जाना और पढ़ाई करने का खर्च कम होगा। निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यव्स्था पर बढ़ेगा।
वित्त वर्ष 2025 (जुलाई-मार्च) के पहले नौ महीनों में रेमिटेंस 28.07 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह एक साल पहले समान अवधि में 21.04 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 प्रतिशत की वृद्धि है।
एक्सपर्ट का मानना है कि किसी भी तेजी से व्यापारियों के लिए बिकवाली के अवसर पैदा हो सकते हैं, जबकि बाजार की स्थितियों में अनुकूल बदलाव से रुपया 85.50 की तरफ बढ़ सकता है।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 21 मार्च को समाप्त सप्ताह में 1,794 करोड़ रुपये (19.4 करोड़ डॉलर) के शेयर बेचे हैं।
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.79 प्रतिशत घटकर 104.91 पर कारोबार कर रहा था।
USD to INR exchange rate : पिछले पांच दिन तक सीमित दायरे में रहने के बाद भारतीय रुपये में मजबूती आई है। विदेशी बैंकों की डॉलर बिकवाली से रुपये में यह तेजी आई है।
जानकार का कहना है कि हम मौद्रिक नीति का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें बाजार अनुमान लगा रहा है कि आरबीआई 25 आधार अंकों की कटौती करेगा, लेकिन कमजोर रुपये के साथ आरबीआई को मुद्रास्फीति अनुमानों पर सतर्क रहने और अपने दृष्टिकोण में आक्रामक होने की जरूरत है।
आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में कटौती की चिंताओं और विदेशी बाजार में अमेरिकी करेंसी की व्यापक मजबूती ने भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
डोनाल्ड ट्रंप के कनाडा और मेक्सिको पर 25 प्रतिशत और चीन पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने से व्यापक व्यापार युद्ध की आशंका तेज हो गई है। इसका असर भारतीय मुद्रा पर देखा गया।
रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट है। सोमवार को यह अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। आज रुपया टूटर 87.29 पर पहुंच गया है।
पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपया दबाव में रहा है लेकिन यह एशिया और अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में सबसे कम अस्थिर मुद्रा रही है।
13 जनवरी को रुपये में करीब दो साल में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी और सत्र के अंत में रुपया 66 पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.70 के अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।
रुपया टूटने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था, आम जनता और बिजनेस जगत पर होगा। रुपये में कमजोरी आने से विदेशों से आयत करना महंगा होगा। इसके चलते जरूरी वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है।
डॉलर पर छपे तस्वीर की तह दिखने वाले एक आदमी का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहे आदमी का चेहरा हूबहू डॉलर में छपे नोट पर व्यक्ति की तस्वीर से मेल खा रहा है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि यह गिरावट अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण है।
विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 85.79 पर बंद हुआ। 2024 में भारतीय रुपये में 2.9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की इकोनॉमी में मजबूती से डॉलर में जबरदस्त तेजी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयात पर शुल्क बढ़ाने की मंशा जताई है। इस वजह से भी दुनियाभर के मुद्रा कारोबारियों के बीच डॉलर की मांग बढ़ी है।
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