तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के सरकार के फैसले के बाद आंदोलन बंद होने के बाद, एसकेएम ने घोषणा की थी कि अगर सरकार उनकी अन्य मांगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो आंदोलन फिर से शुरू हो सकता है,
आगामी बजट में केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि में मिलने वाली सालाना 6 हजार रुपये की राशि को बढ़ा कर 8000 रुपये कर सकती है।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक यह व्यवस्था चालू माह से ही लागू होगी और इससे राज्य के 13 लाख किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिजली के बिल में छूट की इस नई व्यवस्था से उत्तर प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड पर लगभग 1000 करोड रुपए प्रति वर्ष का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
किसान संगठनों ने 'संयुक्त समाज मोर्चा' नाम से चुनावी संगठन चंडीगढ़ में लॉन्च कर दिया है। 22 किसान संगठनों ने मिलकर 'संयुक्त समाज मोर्चा' बनाया है।
भाजपा के महासचिव अरुण सिंह और पार्टी की किसान शाखा के अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के लिए किसानों को आमंत्रित किया जाएगा। भाजपा और केंद्र और राज्यों में उनकी सरकारें कृषि क्षेत्र की प्रगति और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
किसानों के परिवारों ने ट्रैक्टरों में आ रहे किसानों को माला पहनाकर; लड्डू, बर्फी और अन्य मिठाइयां खिलाकर उनका स्वागत किया। किसानों के आंदोलन का समर्थन करने वाले गांववासी और अन्य लोग उनका स्वागत करने के लिए राजमार्गों के किनारे एकत्रित हुए और उन्होंने किसानों पर फूल बरसाए।
घर लौटने को लेकर उत्साहित भूपेंद्र सिंह ने कहा कि वह कई बार अपने बच्चों से कोई बहाना करते थे।
कुंडली की झुग्गियों में रहने वाले 13 वर्षीय आर्यन ने बताया, हम अपना नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना यहीं लंगर में करते थे।
मुख्यालय के लोहे के जिस द्वार पर SKM के स्वयंसेवक आगंतुकों पर नजर रखते थे, आज सुबह वहां सन्नाटा पसरा दिखा।
सुबह से ही झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोग और कबाड़ी बांस के खंभे, तिरपाल, लकड़ियां, प्लास्टिक और लोहे की छड़े चुनने में लगे रहे।
भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के सरदार गुरमुख सिंह ने मार्च में ईंटों और सीमेंट से 3 कमरों का एक ढांचा बनाया था।
किसानों के विरोध ने आलम जैसे कई युवाओं को भी आकर्षित किया जो बी. टेक के बाद एम. टेक कर चुके हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा, संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में सरकार के प्रस्ताव पर कई घंटों तक चर्चा हुई।
उन्होंने कहा, "अगर सरकार हमारी इन सभी मागों के बारे में संतुष्ट करती है तो यहां से जाने के बारे में सोच सकते हैं।"
SKM ने एक बयान में कहा था कि कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना किसान आंदोलन की पहली बड़ी जीत है लेकिन अन्य अहम मांगें अब भी लंबित हैं।
आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ मामले वापस लेने के संबंध में तोमर ने कहा कि यह राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिनों पहले घोषणा की थी कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेगी और इस तरह सरकार ने किसानों की मांग को मान लिया।
कृषि मंत्री ने कहा, तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद अब आंदोलन का कोई मतलब नहीं रह जाता है। बड़े मन का परिचय देते हुए पीएम मोदी की अपील को मानें और किसान घर वापस लौटें।
किसान 29 नवंबर को संसद कूच करने की योजना बना चुके हैं। हालांकि आज की बैठक में इसपर भी तय होगा कि क्या किसान ट्रैक्टर से संसद कूच करेंगे या नहीं? वहीं कृषि कानूनों के अलावा अपनी अन्य मांगों पर अब दबाब बनाये जाने का प्रयास किया जाने लगा है।
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