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हारने की ये कैसी जिद! 79 साल की उम्र में 98 बार हार चुके चुनाव, शतक लगाने के पहुंचे करीब

 Published : Apr 22, 2024 01:13 pm IST,  Updated : Apr 22, 2024 01:18 pm IST

चुनाव के प्रति हसनुराम के जुनून को देखते हुए, उनका परिवार उनके साथ खड़ा है। एक क्लर्क और मनरेगा मजदूर के रूप में अपना जीवन यापन करने वाले अंबेडकरी कहते है, ''चुनाव लड़ना मेरा जुनून है। मैं जानता हूं कि मैं जीत नहीं पाऊंगा, लेकिन यह मुझे चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकता।''

hasnuram ambedakri- India TV Hindi
हसनुराम अंबेडकरी Image Source : FILE PHOTO

आगरा के 79 वर्षीय हसनुराम अंबेडकरी सुर्खियों में छाए हुए हैं। उन्होंने अपना 99वां चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अंबेडकरी ने अपना पहला चुनाव 1985 में लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। भले ही उनको अभी तक किसी भी चुनाव में जीत न मिली हो, लेकिन उन्हें कोई मलाल नहीं है। उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर राष्ट्रपति तक के लिए नामांकन किया है। अपने पिछले 98 प्रयासों में हार का सामना करने के बावजूद, अंबेडकरी ने चुनावी अखाड़े में अपनी किस्मत आजमाना जारी रखा है।

इस बार उन्हें फतेहपुर सीकरी से शतक के करीब पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन इस सीट से उनका नामांकन खारिज कर दिया गया। उनका कहना है कि वह चुनाव सिर्फ और सिर्फ हारने के लिए लड़ते हैं, उनकी हसरत चुनाव जीतने की नहीं है।

विधानसभा-लोकसभा से लेकर ग्राम पंचायत तक के चुनाव लड़ चुके हैं हसनुराम

खैरागढ़ ब्लॉक के गांव नगला दूल्हे खां निवासी हसनुराम ने बताया कि वे 1985 से चुनाव लड़ रहे हैं जिसमें विधानसभा, लोकसभा, एमएलसी, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ब्लॉक प्रमुख, नगर पंचायत, प्रधान, क्रय विक्रय, पार्षद के पद शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वे तहसील में अमीन थे। उनकी चुनाव लड़ने की इच्छा हुई तो उन्होंने एक पार्टी से टिकट मांगा। हसनुराम ने बताया कि टिकट तो मिला नहीं लेकिन वहां उनका मजाक उड़ाया गया कि घर से भी कोई वोट नहीं देगा। इसके बाद वे 1985 से चुनाव की तैयारियों में जुट गए और हर चुनाव को लड़ते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, हसनुराम ने राष्ट्रपति पद के लिए भी नामांकन किया था लेकिन पर्चा निरस्त हो गया था।

साधारण जीवन व्यतीत कर रहे हसनुराम

हसनुराम का गांव नगला दूल्हा खां में दो कमरों का मकान है, जहां वे अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। गांव में ही मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं। उनके बेटे दूर शहर में मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं।

चुनाव के प्रति उनके जुनून को देखते हुए, अंबेडकरी का परिवार उनके साथ खड़ा है। एक क्लर्क और मनरेगा मजदूर के रूप में अपना जीवन यापन करने वाले अंबेडकरी कहते है, "चुनाव लड़ना मेरा जुनून है और मैं इसे अपने खर्च पर पूरा करता हूं। मैं किसी से धन की मदद नहीं लेता। मैं जानता हूं कि मैं जीत नहीं पाऊंगा, लेकिन यह मुझे चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकता।'' उन्होंने कहा, "मेरा लक्ष्य 100वीं बार चुनाव लड़ना है और मैं यह भी जानता हूं कि मेरी उम्र बढ़ रही है लेकिन मैं अपना लक्ष्य हासिल कर लूंगा।" (IANS इनपुट के साथ)

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