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Whatsapp लॉगिन कर जाल में फंस गया कोडीन कफ सिरप तस्करी का मास्टरमाइंड, हरियाणा से गिरफ्तार

विनोद अग्रवाल पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह पिछले 75 दिनों से फरार चल रहा था। कानपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Jan 26, 2026 01:42 pm IST, Updated : Jan 26, 2026 01:47 pm IST
मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल गिरफ्तार- India TV Hindi
Image Source : REPORTER मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस को प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी और अवैध खरीद-बिक्री के बड़े रैकेट में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने प्रमुख दवा व्यापारी और मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल को हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के नारनौल से गिरफ्तार कर लिया है। विनोद अग्रवाल पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह पिछले 75 दिनों से फरार था। उसकी गिरफ्तारी पुलिस की सतर्कता और तकनीकी निगरानी के बाद संभव हो पाई।

कैसे हुआ खुलासा?

विनोद अग्रवाल को गिरफ्तार करने में पुलिस की तकनीकी निगरानी ने अहम भूमिका निभाई। फरारी के दौरान, अग्रवाल ने अपने मोबाइल और लैपटॉप को बंद रखा, जिससे उसकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन 3 जनवरी को उसने एक खास व्यक्ति से संपर्क करने के लिए हरियाणा के नारनौल में व्हाट्सएप पर लॉगिन किया, जिसका आईपी एड्रेस ट्रैक कर पुलिस ने उसका ठिकाना पता लगाया। इसके बाद, कानपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

क्या था मामला?

यह मामला नवंबर 2025 का है, जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कानपुर के बिरहाना रोड स्थित अग्रवाल ब्रदर्स की दुकान और कोपरगंज के गोदाम पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये कीमत के कोडीन युक्त कफ सिरप, ट्रामाडोल टैबलेट्स और एक्सपायरी दवाएं जब्त की गईं। इन दवाओं का नशे के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इस छापेमारी के दौरान विनोद अग्रवाल और उसके बेटे शिवम अग्रवाल फरार हो गए थे। इसके बाद, कलेक्टरगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने छानबीन शुरू की।

आरोपी विनोद अग्रवाल

Image Source : REPORTER
आरोपी विनोद अग्रवाल

तस्करी का नेटवर्क

जांच में सामने आया कि विनोद अग्रवाल एक बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा था। उसने 12 राज्यों में 65 से अधिक फर्जी फर्में बनाई थीं और इन फर्जी फर्मों के जरिए प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। पुलिस ने बताया कि विनोद अग्रवाल और उसके साथियों के नेटवर्क का अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन भी था, जो अवैध दवाओं की तस्करी के लिए जिम्मेदार था।

फरारी के दौरान तंग गलियों में छिपा था विनोद

पुलिस के मुताबिक, अग्रवाल ने फरारी के दौरान कई राज्यों के आठ शहरों में ठिकाने बदले थे। कानपुर में भी वह रिश्तेदारों और साझेदारों के यहां छिपा था, लेकिन पुलिस की बढ़ती घेराबंदी के कारण वह अन्य राज्यों में शिफ्ट हो गया था। अब, विनोद अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसकी संपत्ति जब्ती और अन्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि अग्रवाल के खिलाफ अवैध क्रय-विक्रय, भंडारण, अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई, कूटरचित दस्तावेजों से साक्ष्य छेड़छाड़ और सरकारी कार्य में बाधा जैसे पुख्ता सबूत हैं। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान नए खुलासे हो सकते हैं, जैसे नेटवर्क के अन्य सदस्यों के ठिकाने, फर्जी फर्मों का पैसा और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन।

(रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव)

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