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नेपाल में सरकार गठन की समयसीमा खत्म होने के करीब, अगर-मगर में उलझे राजनीतिक दल

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 13, 2021 04:32 pm IST,  Updated : May 13, 2021 04:32 pm IST

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के विश्वासमत खोने के बाद राष्ट्रपति ने नेपाल में सरकार गठन की समयसीमा बृहस्पतिवार रात तक तय की थी, लेकिन नेपाल के राजनीतिक दल अपने धड़ों के बीच गुटबाजी के चलते अभी तक इस मामले पर कोई सहमति कायम नहीं कर पाए हैं।

Nepal parties struggle to form a new govt as deadline nears- India TV Hindi
ओली के विश्वासमत खोने के बाद राष्ट्रपति ने नेपाल में सरकार गठन की समयसीमा बृहस्पतिवार रात तक तय की थी। Image Source : PTI

काठमांडू: प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के विश्वासमत खोने के बाद राष्ट्रपति ने नेपाल में सरकार गठन की समयसीमा बृहस्पतिवार रात तक तय की थी, लेकिन नेपाल के राजनीतिक दल अपने धड़ों के बीच गुटबाजी के चलते अभी तक इस मामले पर कोई सहमति कायम नहीं कर पाए हैं। शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद के लिये दावा पेश करने का निर्णय लिया था, लेकिन गठबंधन सरकार बनाने की उसकी कोशिशों को तब झटका लगा जब महंत ठाकुर की अगुवाई वाली जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल (जेएसपी-एन) के एक वर्ग ने साफ कर दिया कि वह सरकार गठन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेगा। 

ठाकुर के नेतृत्व वाले धड़े के प्रतिनिधि सभा में करीब 16 मत हैं। नेपाली कांग्रेस के पास 61 मत हैं। उसे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी मध्य) का समर्थन हासिल है, जिसके पास 49 मत हैं। कांग्रेस-माओवादी मध्य के गठबंधन को उपेन्द्र यादव नीत जनता समाजवादी पार्टी के करीब 15 सांसदों का भी समर्थन हासिल है। लेकिन इन तीनों दलों के पास कुल 125 मत हैं जो 271 सदस्यीय सदन में बहुमत के आंकड़े 136 से 11 मत कम हैं। 

सरकार गठन के लिये दी गई समयसीमा बृहस्पितवार रात को खत्म हो रही है, ऐसे में राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने विपक्षी दलों से बहुमत की ओर बढ़ रहे गठबंधन का समर्थन करने की अपील की है। सीपीएन-यूएमएल के माधव कुमार नेपाल-झालानाथ खनल धड़े से संबंध रखने वाले सांसद भीम बहादुर रावल ने गतिरोध खत्म करने के लिये मंगलवार को दोनों नेताओं के करीबी सांसदों से नयी सरकार का गठन करने के लिये संसद सदस्यता से इस्तीफा देने का आग्रह किया।

रावल ने बुधवार को ट्वीट किया कि ओली नीत सरकार को गिराने के लिये उन्हें संसद सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिये। उन्होंने लिखा, ''असाधारण समस्याओं के समाधान के लिये असाधारण कदम उठाए जाने की जरूरत होती है। प्रधानमंत्री ओली को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ अतिरिक्त कदम उठाने से रोकने के लिये उनकी सरकार गिराना जरूरी है। इसके लिये हमें संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिये। राजनीतिक नैतिकता और कानूनी सिद्धांतों के लिहाज से ऐसा करना उचित है। '' 

यदि नेपाल-खनल धड़े के यूएमएल के 28 सांसद एक साथ संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे देते हैं तो नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-माओवाद मध्य के लिये जनता समाजवादी पार्टी-नेपाल (जेएसपी-एन) के एक धड़े के सांसदों का समर्थन लिये बिना भी नयी सरकार के गठन की राह आसान हो जाएगी। यदि यूएमएल के 28 सांसद सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देते हैं तो 271 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में सांसदों की संख्या घटकर 243 रह जाएगी, जिसके बाद बहुमत का आंकड़ा भी कम हो जाएगा और नेपाली कांग्रेस तथा सीपीएन-माओवाद मध्य गठबंधन आसानी से सरकार गठन कर सकता है। 

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