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इमरान-शरीफ दोनों के करीबी, पश्तूनों और बलूचों से है नाता, जानें कौन हैं नए पाकिस्तानी PM अनवारुल काकर

Edited By: Subhash Kumar Published : Aug 12, 2023 06:56 pm IST, Updated : Aug 12, 2023 06:59 pm IST

9 अगस्त को शहबाज शरीफ द्वारा पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को भंग करने की घोषणा के बाद अनवारुल हक काकर को कार्यवाहक पीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह अगली सरकार चुने जाने तक इस पद पर रहेंगे।

anwarul haq kakar- India TV Hindi
Image Source : X (@ANWAAR_KAKAR) अनवारुल हक काकर।

पाकिस्तान के निवर्तमान पीएम शहबाज शरीफ द्वारा असेंबली को भंग किए जाने के प्रस्ताव के बाद अनवारुल हक काकर को देश का कार्यवाहक पीएम बनाया गया है। सरकार और विपक्षी दल सभी ने अनवारुल के नाम पर अपनी सहमति जताई है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने शनिवार तक देश के कार्यवाहक पीएम का नाम तय करने का निर्देश जारी किया था। 

बलूचिस्तान से नाता

जियो न्यूज के अनुसार, अनवारुल हक काकर पाकिस्तान के सबसे पिछड़े प्रांत बलूचिस्तान का जाना माना चेहरा हैं। इनका जन्म भी यहीं हुआ था। वह बलूचिस्तान आवामी पार्टी (BAP) के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और 2018 में चुनाव जीतकर पाकिस्तानी सीनेट के सदस्य बने थे। इससे पहले वह प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता के तौर पर भी अपनी सेवा दे चुके हैं। काकर को देश के चुनिंदा बौद्धिकों में से एक माना जाता है। अनवारुल हक पश्तून समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और बलूचिस्तान के प्रतिनिधि हैं। इस नजर से वो बलूच और पश्तून दोनों माने जाते हैं।

इमरान और शरीफ दोनों से करीबी
जियो न्यूज के अनुसार, अनवारुल हक काकर और उनकी पार्टी दोनों के नवाज-शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N और भुट्टो की पार्टी PPP से अच्छे संबंध बताए जाते हैं। हालांकि, गौर करने वाली बात है कि इमरान खान की सरकार के समय काकर के उनसे भी बेहतर रिश्ते थे। बलूचिस्तान के मामलों पर राय लेने के लिए इमरान खान उनसे संपर्क करते रहते थे। इस कारण कई बार अनवारुल को आलोचना भी झेलनी पड़ती थी।

पाकिस्तानी असेंबली भंग
9 अगस्त को पाकिस्तान में नेशनल असेंबली भंग हो गई थी। इसके बाद नए कार्यवाहक प्रधानमंत्री के नाम को तय करने के लिए शहबाज शरीब और राजा रियाज ने कई बार बैठक की थी। पाकिस्तानी संविधान के अनुसार असेंबली भंग करने के तीन दिन के भीतर ही कार्यवाहक पीएम का नाम तय हो जाना चाहिए। शहबाज शरीफ और विपक्ष के नेता राजा रियाज ने मिलकर आखिरकार अनवारुल के नाम पर मुहर लगा दी। 

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