लाहौर: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार का आतंकी कनेक्शन एक बार फिर उजागर हो गया है। पंजाब प्रांत के एक राज्य मंत्री ने गुरुवार को लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद से जुड़े प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा के राजनीतिक मोर्चे, पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के कार्यालय का दौरा किया। इस कदम को सईद के संगठन को सरकार का 'आधिकारिक संरक्षण' देने के रूप में देखा जा रहा है। आंतकी के दफ्तर में मंत्री का यह दौरा पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी दावे की पोल खोल रहा है।
पाकिस्तान के राज्य मंत्री और सीनेटर तलाल चौधरी लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद स्थित पीएमएमएल हाउस पहुंचे। वहां पीएमएमएल नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। बता दें कि हाफिज सईद भारत में 2008 के मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा वह कई अन्य आतंकी वित्तपोषण मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। इसके बाद 2019 से लाहौर की क्वेटा लखपत जेल में बंद है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, उसके संगठन की राजनीतिक शाखा सक्रिय बनी हुई है। पीएमएमएल ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि चौधरी ने पार्टी नेतृत्व के साथ विस्तृत बैठक की। चर्चा का केंद्र मौजूदा राजनीतिक माहौल और प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दे रहे।
बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय एकता, राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निरंतरता पर जोर दिया। वर्तमान परिस्थितियों में सभी राजनीतिक ताकतों को सद्भाव बढ़ाने और संस्थाओं को मजबूत करने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।" प्रतिभागियों ने सहमति जताई कि देश के हित में रचनात्मक सहयोग जरूरी है। यह कोई पहला उदाहरण नहीं है। हाल ही में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष मलिक अहमद खान ने कसूर जिले में पीएमएमएल की एक रैली में हिस्सा लिया और सईद की तारीफ की थी।
विपक्ष ने की निंदा
विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को 'आतंकवाद को बढ़ावा' बताते हुए शरीफ सरकार की निंदा की। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता ने कहा, "यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान की साख को धक्का पहुंचाएगा।" भारत ने भी इसकी कड़ी निंदा की, इसे 'आतंक के प्रति नरमी' का प्रमाण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि शरीफ सरकार राजनीतिक मजबूती के लिए कट्टरपंथी गुटों से नजदीकी बढ़ा रही है, जो आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति दोनों के लिए खतरा है। फैसलाबाद दौरे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। सरकार की चुप्पी सवाल पैदा कर रही है। क्या यह राजनीतिक रणनीति है या आतंकियों को संरक्षण देने का नया सरकारी प्लान। (भाषा)
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