बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर 11 नवंबर को आखिरी चरण के मतदान के बाद आज ही एग्जिट पोल के आंकड़े आ गए हैं जो काफी चौंकाने वाले हैं। इंडिया टीवी Matrize ने अपने सर्वे में बिहार की एनडीए में शामिल नीतीश कुमार की जेडीयू को 67 से 75 सीटें दी हैं तो वहीं बीजेपी को 65 से 73 सीट मिलने का अनुमान जताया है। इससे पहले 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश की जदयू बहुत बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। इसकी वजह ये बताई गई थी कि चिराग पासवान के कारण नीतीश कुमार को कई सीटों पर 2020 के चुनाव में नुकसान हुआ था।
- 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल लालू की राष्ट्रीय जनता दल, राजद को 75 सीटें, कांग्रेस को 19, सीपीआई (एमएल) को 12, सीपीआई को 2 और सीपीआईएम को 2 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं ओवैसी की एआईएमआईएम पांच सीटों पर जीती थी।
- अब एनडीए की बात करें तो बीजेपी को 74 सीटों पर जीत मिली थी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू 43 सीटों पर जीती थी। तब एनडीए में शामिल मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी चार सीट पर और मांझी की हम को भी चार सीटों पर जीत मिली थी।
2020 में गलत साबित हुए थे एग्जिट पोल
साल 2020 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो वोटिंग के बा अधिकतर सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। इनमें से कुछ एजेंसियों को छोड़कर यह अनुमान लगाया गया था कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी। जब चुनाव के नतीजों की घोषणा हुई तो एग्जिट पोल के आंकड़े गलत साबित हो गए और इसके बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एनडीए की सरकार बनी थी।
2015 के चुनावी नतीजे और एग्जिट पोल
2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन मजबूत था और उसके गठजोड़ में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू, राजद और कांग्रेस शामिल थी। वहीं, एनडीए में बीजेपी के साथ एलजेपी और जीतन राम मांझी की हम और रालोसपा शामिल थी। उस बार के भी चुनाव में एग्जिट पोल ने दोनों गठबंधनों को 100 से ज्यादा सीटें दी थीं। एग्जिट पोल में एनडीए को बढ़त कई एजेंसियों ने दिखाई थी और बीजेपी के अपने दम पर सरकार बनाने के अनुमान थे। लेकिन रिजल्ट आने के बाद सरकार महागठबंधन की बनी और सीएम नीतीश कुमार बने।
एग्जिट पोल का मतलब क्या होता है
एग्जिट पोल एक चुनावी सर्वेक्षण होता है, इसमें मतदान के बाद जब वोट देकर लोग पोलिंग बूथ से बाहर निकलते हैं तो सर्वे एजेंसी के लोग उनसे सवाल पूछते हैं। इसके बाद मिले जवाब के साथ हर विधानसभा में अलग-अलग पोलिंग बूथ से सैंपल साइज लिया जाता है। वोटिंग खत्म होने के बाद डेटा इकट्ठा कर वोटिंग के रुझान दिए जाते हैं और इससे पता चलता है कि जनता का रुख किस तरफ है और कौन सी पार्टी को कितनी सीटें, कितना वोट मिल सकता है।
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