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बिहार में 46 हजार शिक्षकों की भर्ती, मार्च में जारी होगा चौथे चरण का विज्ञापन, 9-12 तक के शिक्षकों के सबसे ज्यादा पद खाली

 Reported By: Nitish Chandra Edited By: Shakti Singh
 Published : Feb 12, 2026 09:45 am IST,  Updated : Feb 12, 2026 09:56 am IST

नौवीं से 12वीं तक के छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लगभग 25 हजार पद खाली हैं। इन पदों पर चौथे चरण में भर्ती की जाएगी। शिक्षा विभाग ने पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाले 44500 शिक्षकों के पद खाली होने की जानकारी दी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PTI

बिहार में चौथे चरण में 46 हजार शिक्षकों की बहाली होगी। इसका विज्ञापन मार्च में जारी होगा। कक्षा एक से 12वीं तक के लिए शिक्षा विभाग में कुल 44,500 रिक्तियां भेजी हैं। इसमें शिक्षा विभाग में कक्षा पहली से पांचवीं, छठी से आठवीं, 9वीं से 10वीं और 11वीं से 12वीं तक के विद्यालय अध्यापक शामिल हैं।

कक्षा-वार रिक्तियों में प्राथमिक शिक्षा में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। एक से पांचवीं कक्षा तक के लिए 10,500 शिक्षक पदों पर नियुक्ति होनी है। वहीं मध्य विद्यालय, यानी छठी से आठवीं कक्षा तक के लिए 9,500 रिक्तियां हैं। नौवीं से बारहवीं कक्षा को मिलाकर करीब 25 हजार पद खाली हैं, जिन पर चौथे चरण में बहाली की जाएगी।

दिव्यांग बच्चों के लिए खुलेंगे स्कूल

बिहार के समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि राज्य के तिरहुत, सारण, कोशी, पूर्णिया, मुंगेर और मगध प्रमंडल में दृष्टिहीन एवं मूक-बधिर विद्यालय खोले जाएंगे और इनमें 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की व्यवस्था होगी। वर्तमान में पटना, दरभंगा और भागलपुर प्रमंडल (आयुक्तालय) में ऐसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन तीनों विद्यालयों में अभी आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है, जिसे बढ़ाकर 12वीं कक्षा तक किया जाएगा और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

एड्स और कुष्ट रोगियों को मदद

बिहार में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 724.52 करोड़ का तृतीय अनुपूरक बजट पेश किया गया। इस दौरान समाज कल्याण मंज्ञी ने कहा कि प्रत्येक प्रमंडल में खोले जाने वाले दृष्टिहीन एवं मूक-बधिर विद्यालय में 500 बच्चों के दाखिले की क्षमता होगी। मंत्री ने बताया कि राज्य में एड्स से संक्रमित 72,704 रोगियों को हर माह 1,500 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है, जबकि 14,461 कुष्ठ रोगियों को भी प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता दी जाती है।

यूपीएससी पास करने पर भी मदद

मंत्री ने कहा कि राज्य में 1,15,064 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां 39,55,000 नामांकित बच्चों के लिए पूरक पोषाहार कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सहनी ने यह भी कहा कि जो दिव्यांग अभ्यर्थी संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में सफल होंगे, उन्हें मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से क्रमशः एक लाख और पचास हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि इसके अलावा महिला अभ्यर्थियों को महिला विकास निगम के माध्यम से यूपीएससी और बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए क्रमशः एक लाख और पचास हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है।

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