महाराष्ट्र निकाय चुनाव: मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) समेत 29 नगर निकायों के लिए गुरुवार को मतदान होगा, जो सुबह 7.30 बजे से शुरू हो जाएगा। इस बार के चुनाव में सबकी निगाहें देश के सबसे बड़े और समृद्ध नगर निकाय बीएमसी के रिजल्ट पर टिकी हैं। बीएमसी में भाजपा नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन और ठाकरे बंधुओं के मोर्चे के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकतका है। 227 वार्डों वाली बीएमसी पर बीते 25 साल से शिवसेना का कब्जा है। बता दें कि साल 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में इस बार भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी है।
बीएमसी चुनाव क्यों है खास
227 वार्ड वाली बीएमसी में भाजपा 137, शिवसेना 90 और राकांपा 94 सीटों सीट पर लड़ रही है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने 163, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने 52, कांग्रेस ने 143 और वीबीए ने 46 उम्मीदवार उतारे हैं।
सीएम फडणवीस का दावा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन भविष्य में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) या शिवसेना (यूबीटी) के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि महायुति अपने दम पर चुनाव जीतने में पूरी तरह सक्षम है। फडणवीस ने दावा किया कि 29 में से 26 नगर निगमों में महायुति के मेयर होंगे। उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और उद्धव ठाकरे पर निकाय चुनाव में मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा उछालने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठी मेरी मातृभाषा है और इसका विकास होना चाहिए। साथ ही, कहा कि हिंदुत्व भाजपा की आत्मा है।
महायुति में बड़ी दरार
कांग्रेस ने दावा किया कि महायुति गठबंधन के भीतर बड़ी दरार पड़ चुकी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लागत में बढ़ोतरी के कारण करीब 40 हजार करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं रद्द की गईं। इसमें सीधे तौर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रभार वाले शहरी विकास विभाग को निशाना बनाया गया है।