Wednesday, January 28, 2026
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क्यों बॉलीवुड से किनारा करने लगे बेहतरीन सिंगर? अरिजीत सिंह से पहले ये सुरीली सिंगर भी ठुकरा चुकी ऑफर और बन गईं विधायक

अरिजीत सिंह ने बीते दिनों प्लेबैक सिंगिग को लेकर बयान दिया और चौतरफा इसकी चर्चा होने लगी। इससे पहले भी एक सुरीली सिंगर फिल्मी दुनिया से किनारा कर चुकी हैं और विधायक बन गई हैं।

Written By: Shyamoo Pathak
Published : Jan 28, 2026 01:02 pm IST, Updated : Jan 28, 2026 01:02 pm IST
Javed Akhtar, AR Rahman, Arijit Singh And Maithili Thakur- India TV Hindi
Image Source : IMAGE SOURCE-INSTAGRAM AND ANI जावेद अख्तर, एआर रहमान, अरिजीत सिंह और मैथिली ठाकुर

बीते दिनों जावेद अख्तर का एक बयान खूब वायरल रहा जिसमें उन्होंने बॉर्डर 2 के गाने को लेकर कहा था कि ये एक तरह का क्रिएटिव दिवालियापन है, जब उनसे वही गाना लिखने को कहा गया था। साथ ही ऑस्कर विनर म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान भी बीबीसी को दिए इंटरव्यू को लेकर खूब सुर्खियां बटोरते रहे। इस इंटरव्यू में एआर रहमान ने भी इस बात की तरफ इशारा किया कि बीते करीब 1 दशक से बॉलीवुड में सत्ता नॉनक्रिएटिव और प्रोफिट ड्रिविन लोगों के हाथ में चली गई है और शायद ये भी एक वजह रही कि उनके पास अच्छे काम की कमी आई। अब हाल ही में सुरों के सरताज और बॉलीवुड में गायकी के बादशाह माने जाने वाले सिंगर अरिजीत सिंह ने भी फिल्मी दुनिया से अनिश्चितकालीन संन्यास की घोषणा कर दी। ऐसे में ये सवाल बाजिब है कि क्या सच में फिल्मी दुनिया में क्रिएटिव दिवालियापन से जूझ रही है। इससे पहले भी एक सुरीली सिंगर ऐसी रहीं हैं जिनकी आवाज से सोशल मीडिया से लेकर कॉन्सर्ट तक अपाना जलवा बिखेरा और लाखों दिलों पर छा गईं। लेकिन उन्होंने फिल्मी दुनिया में गाने से मना कर दिया चुनाव लड़कर विधायक बन गईं। आज इस खबर में हम पड़ताल करेंगे कि बीते 10 साल में संगीत और गायकी की दुनिया में ऐसा क्या बदल गया कि बड़े-बड़े दिग्गज इससे या तो कतराने लगे या फिर किनारा करने लगे। 

बीते 10 साल में आईं वो फिल्में जिन्होंने दिया धांसू संगीत

बॉलीवुड में हर साल करीब 1000 से ज्यादा फिल्में बनती हैं और इनमें से चंद कहानियां ही लोगों को याद रहती हैं। बाकी की फिल्में कब आईं और कब गईं लोगों को कानों-कान खबर नहीं रहती। बीते 2010 से लेकर 2020 तक के बॉलीवुड में काफी बदलाव आया है और सिनेमाई अनुभव में भी जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला है। ये वही दशक रहा जब ओटीटी ने अपने पांव पसारे और सिनेमाई जगत पर गहरा असर छोड़ा। ओटीटी के बाद बड़े पर्दे की कहानियां बिल्कुल नए सिरे और अंदाज से कही जाने लगीं। लेकिन एक चीज थी जिससे लोगों की उम्मीदें नहीं बदलीं वो है फिल्मों का संगीत। बॉलीवुड दुनिया उन चंद फिल्म इंडस्ट्रीज में से एक है जिसकी कहानी में गाने होते हैं। हॉलीवुड के दर्शक इस अनुभव से अछूते हैं और उनकी फिल्मों में बॉलीवुड की तरह कल्चर नहीं है। इसके बावजूद बीते 10 साल में ऐसी फिल्में आईं जिन्होंने बॉलीवुड के संगीत के प्रति दीवानी कायम रखी। वैसे तो ऐसी सैकड़ा भर से ज्यादा फिल्में रहीं जिन्होंने अपने म्यूजिक से लोगों को प्रभावित किया लेकिन इनमें से कुछ फिल्में जैसे- आशिकी 2, ऐ दिल है मुश्किल, एजेंट विनोद, अग्निपथ, आयशा, अंधाधुन, बदलापुर, बाजीराव मस्तानी, बैंड बाजा बारात, बर्फी, बरेली की बर्फी, बेफिक्रे, कॉकटेल, डियर जिंदगी, दिल धड़कने दो, दम लगा के हईशा, फितूर, गैंग्स ऑफ वासेपुर 1 और 2, गली बॉय, हैदर, हाइवे, इश्कजादे, जब हैरी मेट सेजल, जॉली एलएलबी 2, कबीर सिंह, कलंक, कपूर एंड संस, कारवां, केदारनाथ, केसरी, लुटेरा, मनमर्जियां, मसान, मिर्जियां, मुक्काबाज, ओके जानू, रांझणा, राम लीला, रॉकस्टार, सोनू के टीटू की स्वीटी, स्पेशल 26, तमाशा, उड़ान, उड़ता पंजाब, विकी डोनर और जिंदगी ना मिलेगी दोबारा जैसी फिल्में शामिल रहीं। 

रैपर्स के दौर ने बिगाड़ा अच्छे संगीत का चलन?

बीते 10 साल में ओटीटी आने के बाद न केवल संगीत बल्कि पूरी सिनेमाई दुनिया में भी काफी बदलाव देखने को मिला है। इसी बीच सोशल मीडिया ने रफ्तार पकड़ी और घंटों का खेल मिनटों में सिमट कर रील्स तक आ गया। साथ ही इस दौर में गली बॉय जैसी फिल्म ने रैप को भी पहचान दिलाई और काफी बढ़ावा मिला। साथ ही बादशाह से लेकर एमिवे बंटाई जैसे दर्जनों रैपर्स ने भी एक अपना ऑडियंस वर्ग खड़ा किया। इसका असर बॉलीवुड के मधुर और बनाने में मेहनती गानों पर असर डाला। साथ ही फिल्मों की चाल बदली और इससे संगीत के सुरों की पसंद-नापसंद बदल गई। अब बीते कुछ समय से बॉलीवुड में भी ऐसी फिल्मों को बल मिला जिसमें भले ही क्रिएटिव एस्पेक्ट कम हो लेकिन उन्हें प्रॉफिट ड्रिविन स्टाइल में बनाया गया है। बीते दिनों केरला लिट्रेचर फेस्ट में दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज ने भी हिंदी सिनेमा को लेकर कहा था कि हिंदी सिनेमा अपनी जड़े खो रहा है। हालांकि उनकी ये बात पूरी तरह से सच नहीं है, हां ये जरूर है कि आम आदमी की कहानियां जैसे होमबाउंड और हक बाजार में कर्मशियल फिल्मों को टक्कर नहीं दे पा रही हैं। लेकिन ये कहना पूरी तरह गलत होगा कि हिंदी सिनेमा अपने जड़ें खो रहा है। 

मैथिली ठाकुर ने भी नहीं गाया फिल्मी संगीत

मैथिली ठाकुर ने अपनी आवाज से लोगों का दिल जीता है और ऐसे दौर में गायकी शुरू की थी जब उन्हें बहुत कम लोग जानते थे। लेकिन उन्होंने लगातार सोशल मीडिया पर अपनी आवाज का जादू दिखाया और देखते ही देखते वे एक सुरीली सिंगर के तौर पर अपनी इमेज बनाने में सफल रहीं। वीडियो के बाद मैथिली ने कई तरह के लाइव शोज में हिस्सा लिया और खूब लोगों का दिल जीता। लेकिन उन्होंने कभी भी फिल्मी दुनिया में जाने का फैसला नहीं लिया। इसको लेकर एक बार मैथिली ने ये भी कहा था कि वे कभी भी फिल्मों में गाने नहीं गाएंगी। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया था कि वे बस ये साबित करना चाहती हैं कि लोग ये समझ लें कि बिना फिल्मों में गाए भी आप अच्छे सिंगर के तौर पर पहचाने जा सकते हैं। बाद में मैथिली ने विधायकी का चुनाव लड़ा और जीतकर विधायक भी बनीं। अब बीते दिनों अरिजीत सिंह ने भी प्लेबैक सिंगिंग को लेकर दिए अपने बयान से चौंका दिया था। अरिजीत ऐसा नाम हैं जिनकी आवाज ने करीब 2 दशक तक लोगों का मन मोहा है। हालांकि अरिजीत ने पूरी तरह फिल्मी दुनिया से किनारा नहीं किया है और वे अपने कंपोजिंग की दुनिया को एक्सप्लोर करना चाहते हैं। 

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