शरीर में सर्वाइकल कैंसर बिना दर्द या लक्षणों के भी चुपचाप पनप रहा हो सकता है। कई बार कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है। कई बार तब पता चलता है जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। महिलाओं में ब्लीडिंग के पैटर्न में बदलाव और असामान्य रक्त स्राव होना सर्वाइकल कैंसर का लक्षण हो सकता है। जबकि कई बार इन लक्षणों को लोग तनाव, हार्मोनल बदलाव या बढ़ती उम्र मानकर नजरअंदाज कर बैठते हैं। डॉक्टर ने बताया कि इन लक्षणों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीता गुप्ता ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर बिना दर्द या लक्षणों के चुपचाप विकसित हो सकता है, जिससे शुरुआती चरणों में इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। शुरुआती चरण में, यह बीमारी गर्भाशय ग्रीवा की परत बनाने वाली कोशिकाओं में कैंसर-पूर्व परिवर्तनों के रूप में मौजूद होती है, जिसे मेडिकली सर्वाइकल इंट्राएपीथेलियल नियोप्लासिया (CIN 1, 2, या 3) कहा जाता है। इस कंडीशन में इसका पता केवल पैप स्मीयर, एचपीवी टेस्ट या कोलोस्कोपी जैसी जांचों के ही लगाया जा सकता है। इन टेस्ट के जरिए कैंसर फैलने से बहुत पहले ही पता लगाया जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण
- महिलाओं के पीरियड्स और ब्लीडिंग के पैटर्न में बदलाव
- मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव
- यौन संबंध के बाद रक्तस्राव
- मासिक धर्म से पहले होने वाला स्पॉटिंग
अगर इनमें से कोई भी लक्षण नजर आएं तो बिना देरी किए अपने डॉक्टर से जांच जरूर करवा लें। ज्यादातर महिलाओं को कभी न कभी वजाइनल डिस्चार्ज होता है जो अक्सर फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है। यह आमतौर पर दही जैसा सफेद होता है और इलाज से ठीक हो जाता है। हालांकि, सर्वाइकल कैंसर में होने वाला डिस्चार्ज इससे काफी अलग होता है।
सर्वाइकल कैंसर के अन्य लक्षण
मलत्याग पर ध्यान जरूर दें। अगर आपको पानी जैसा या अत्यधिक पतला मल है। रंग पीता है और ब्लीडिंग भी हो रही है तो ये सामान्य बात नहीं है। अगर मल से किसी तरह की दुर्गंध आ रही है तो ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
गंभीर लक्षण और स्क्रीनिंग का महत्व
अधिक चिंताजनक लक्षण जैसे कि बिना कारण के वजन कम होना, लगातार पीठ के निचले हिस्से में दर्द, गंभीर श्रोणि संबंधी असुविधा, पेशाब करते समय दर्द, या मल त्याग में कठिनाई, आमतौर पर बहुत बाद में दिखाई देते हैं, जब कैंसर दूसरे, तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुका होता है और आसपास के ऊतकों में फैलना शुरू हो सकता है।
जब तक ये लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी छिपी नहीं रह सकती, वह चेतावनी देती हैं। जरूरी है कि आप लक्षणों को समझें और इंतजार न करें। इससे बचने के लिए सर्वाइकल कैंसर का टीका लगवाएं और नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग कराएं। खासकर 30 साल की उम्र के बाद आपको रुटीन टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)