- फिल्म रिव्यू: वन टू चा चा चा
- स्टार रेटिंग: 3 / 5
- पर्दे पर: 16/01/2026
- डायरेक्टर: अभिषेक राज खेमका और रजनीश ठाकुर
- शैली: कॉमेडी
इस सप्ताह रिलीज हो रही ‘वन टू चा चा चा’, जो एक कॉमेडी फिल्म है। यह फिल्म सिचुएशन, किरदारों और उनके आपसी टकराव से हास्य रचती है। आज के दौर की फूहड़ और द्विअर्थी कॉमेडी से अलग, यह फिल्म अपेक्षाकृत साफ-सुथरा मनोरंजन देने की कोशिश करती है। फिल्म की कास्टिंग चौंकाती है और यही इसकी शुरुआती दिलचस्पी भी बनती है। खास तौर पर आशुतोष राणा को कॉमिक भूमिका में देखना अपने आप में नया अनुभव है। अब तक गंभीर और खलनायक छवि में दिखने वाले राणा यहाँ बिल्कुल अलग रंग में नजर आते हैं और फिल्म के हास्य का बड़ा आधार बनते हैं।
कहानी
कहानी बिहार के मोतिहारी से शुरू होती है, जहाँ जयसवाल परिवार में बड़े बेटे संजू (ललित प्रभाकर) की सगाई की तैयारियाँ चल रही हैं। इसी बीच परिवार के बैचलर और बाइपोलर चाचा (आशुतोष राणा) अचानक शादी करने का ऐलान कर देते हैं। यह फैसला परिवार के लिए असहज स्थिति पैदा कर देता है।
डॉक्टर की सलाह पर चाचा को रांची के एक मानसिक संस्थान ले जाने का निर्णय होता है। दो भतीजे और एक दोस्त, बंधे हुए और बेहोश चाचा को वैन में लेकर निकलते हैं, लेकिन यह यात्रा अपनी तय दिशा से भटक जाती है। रास्ते में निलंबित नारकोटिक्स अधिकारी, एक डांसर शोमा, जेल से फरार अपराधी भूरा सिंह और एक ज़रूरत से ज़्यादा जोशीला पुलिसवाला कहानी में जुड़ते जाते हैं।
यह रोड ट्रिप धीरे-धीरे अराजक हो जाती है, कहीं गोलियां चलती हैं, कहीं बैंक डकैती होती है, तो कहीं ड्रग्स का ज़खीरा हाथ लग जाता है। कहानी ओवर-द-टॉप ज़रूर होती है, लेकिन अपनी बनाई हुई दुनिया के भीतर तार्किक बनी रहती है और दर्शक को साथ लिए चलती है।
अभिनय
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष आशुतोष राणा का अभिनय है। वेद प्रकाश जयसवाल चाचा के रूप में उनकी बॉडी लैंग्वेज, चेहरे के भाव और डायलॉग डिलीवरी प्रभाव छोड़ती है। वे अपने किरदार को कैरिकेचर नहीं बनने देते, यही वजह है कि कॉमेडी बनावटी नहीं लगती। अभिनेता अभिमन्यु सिंह अपने सीमित लेकिन असरदार दृश्यों में जमे हुए नज़र आते हैं। नायरा बनर्जी, अनंत विजय जोशी, हर्ष मायर, अशोक पाठक, चितरंजन गिरी और हेमल इंगले जैसे कलाकार अपनी-अपनी भूमिकाओं में ठीक बैठते हैं और कहानी की गति बनाए रखते हैं।
निर्देशन
निर्देशक अभिषेक राज खेमका और रजनीश ठाकुर ने फिल्म को सिचुएशनल कॉमेडी की पटरी पर बनाए रखने की कोशिश की है। फिल्म का बड़ा हिस्सा रोड जर्नी पर आधारित है, जो कहीं-कहीं लंबा महसूस होता है, लेकिन किरदारों की आपसी केमिस्ट्री उसे संभाल लेती है। संवाद फिल्म की जान हैं, सरल, स्थितिजन्य और बिना ज़ोर लगाए असर छोड़ने वाले। यही वजह है कि कई दृश्य हँसी पैदा करते हैं।
फाइनल टेक
‘वन टू चा चा चा’ एक ईमानदार सिचुएशनल कॉमेडी फ़िल्म है। बिना ज्यादा दिमाग लगाए बिना, सधी हुई कॉमेडी और किरदार आधारित हास्य देखना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म सिनेमाहॉल में देखी जा सकती है