तमसो मा ज्योतिर्गमय’दिवाली का त्योहार हमें अंधेरे से रौशनी की ओर बढ़ने का मंत्र देता है। उमंग, उल्लास और ऊर्जा का त्योहार दिवाली। आपसी रिश्तों में मिठास घोलता है तो रोशनी के इस त्योहार पर घी के दीए जलाएं। जिससे वातावरण महक उठे। साथ ही जगमगाती रोशनी से आपकी सेहत भी दमके। क्योंकि त्यौहार के इस सीजन में मौसम ने भी अचानक करवट ली है, पहाड़ों पर जमकर बर्फबारी हो रही है। सर्दी बढ़ने वाली है। जल्दी ही ठंड से बचने के लिए अलाव-हीटर की जरुरत पड़ने वाली है और इसके साथ कई तरह की हेल्थ इमरजेंसी भी लगने वाली है। उनकी परेशानी बढ़ने वाली है जो फेफड़ों में सिकुड़न यानि लंग फाइब्रोसिस, ब्रोकाइटिस अस्थमा और टीबी से जूझ रहे हैं। कमजोर इम्यूनिटी, सर्दी-खांसी-जुकाम-चेस्ट कंजेशन से परेशान है।लेकिन इस सीजन में जो सबसे जानलेवा साबित होती है वो है निमोनिया खासतौर पर--5 साल से कम और 65 साल से ज्यादा उम्र वालों को इससे अलर्ट रहने की जरुरत है। निमोनिया को लेकर सुखद बात ये है कि इससे लोगों को बचाया जा सकता है। लेकिन जानकारी की कमी जोखिम बढ़ा देती है। तभी तो आज का दिन यानि 12 नवंबर बतौर 'वर्ल्ड निमोनिया डे' मनाया जाता है और दिवाली होने के बाद भी हम निमोनिया की बात कर रहे हैं। ताकि मामूली सी लक्षण वाली ये बीमारी घातक साबित ना हो। तो चलिए दीपावली के शुभ मौके पर, योग से शरीर की एनर्जी हाई करते हैं। ताकि प्रचंड ठंड भी किसी का कुछ बिगाड़ ना पाए। बाबा रामदेव से जानिए बच्चों और बुजुर्गों को निमोनिया से कैसे बचाएं?
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