Thyroid in Children: थायराइड की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को अधिक होती है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह समस्या बच्चों में भी हो सकती हैं। यह जेनेटिक भी हो सकती है यदि प्रेगनेंसी के वक्त यदि मां कम आयोडीन का सेवन करें तो भी बच्चों को थायराइड की समस्या हो सकती है। थायराइड हार्मोन शरीर के लिए बहुत ही जरूरी है लेकिन इसका कम या अधिक होना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है थायराइड हार्मोन के अधिक होने से हाइपोथाइरॉएडिज्म होने से हाइपर थाइरॉएडिज्म की समस्या होती है। प्रीमेच्योर बच्चेदानी कि बच्चे जो समय से पहले जब ले लेते हैं उनमें थायराइड होने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या है थायराइड
हमारे गले में तितली के आकार की एक ग्रंथि मौजूद होती है, जिसे थायराइड ग्लैंड के नाम से जाना जाता है, जो हमारी बॉडी में T3 और T4 हार्मोंस का निर्माण करती है। शरीर में होने वाली कई तरीके की गतिविधियों को यह हार्मोंस कंट्रोल करने में मदद करते हैं, जिसमें मेटाबॉलिज्म को बनाए रखना, मूड फ्रेश करना, शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित करना इत्यादि। यदि यह हार्मोंस असंतुलित होने लगते हैं, तो हमारे शरीर में सभी एक्टिविटी गड़बड़ होने लगती है।
थायराइड के प्रकार-
यह दो टाइप के होते हैं:
1- हाइपो थाइरॉएडिज्म
2- हाइपर थाइरॉएडिज्म
हाइपो थाइरॉएडिज्म का इलाज- हार्मोन्स की कमी के कारण यह समस्या होती है। इसके इलाज के लिए हारमोंस रिप्लेसमेंट थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।
हाइपर थाइरॉएडिज्म का इलाज- हार्मोंस की अधिकता के कारण यह परिस्थिति पैदा होती है कुछ दवाइयां देकर हारमोंस को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है इसका इलाज थायराइड सर्जरी के द्वारा भी किया जाता है।
फास्ट फूड कैफे इन अधिक मात्रा में चीनी आदि का सेवन करने से बच्चे यह उन परेशानियों को बढ़ा देती है जो थायराइड की वजह से पैदा होती हैं जैसे बेचैनी और बार-बार नींद खुलना।
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