हम सोचते कुछ और है होता कुछ और है और वो इसलिए कि हम जरूरी चीजों को नजरअंदाज करते चलते हैं। कायमाबी का इरादा रखते हैं,लेकिन मेहनत नहीं करते। 100 साल की सेहतमंद जिंदगी चाहते हैं,लेकिन अपनी दिनचर्या दुरुस्त नहीं करते। अपना देश डायबिटीज कैपिटल बन चुका है। ये बात तो हम सब जानते हैं लेकिन 'पैन्क्रियाज ग्लैंड' की अनदेखी से दूसरी बीमारी भी तेजी से फैल रही है।'द इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल डिसॉडर्स' के मुताबिक खराब लाइफ स्टाइल क्रॉनिक 'पैन्क्रिए-टाइटिस' और 'पैन्क्रिए-टिक कैंसर' की वजह बन रही है। डरने वाली बात ये है कि पैन्क्रियाज से जुड़े कैंसर का पता एडवांस स्टेज में चलता है और इस कैंसर से जूझ रहे 95 % मरीज अपनी लड़ाई हार जाते हैं वहीं 'पैन्क्रिए-टाइटिस' की परेशानी भी जानलेवा साबित होती है जिंदगी को दर्द से भर देती है। ऐसे में पेट में अगर हल्का-हल्का दर्द महसूस हो, भारीपन-भूख न लगने और नॉशिया के लक्षण नजर आएं तो इग्नोर मत कीजिए ये पैंक्रियाज के बीमार पड़ने के सिग्नल हो सकते हैं।
साथ ही बॉडी के modus operandi को भी समझिए कि क्यों पैंक्रियाज का हेल्दी रहना जरुरी है। शरीर को चलाने के लिए एनर्जी चाहिए। एनर्जी का सोर्स ग्लूकोज है और ग्लूकोज को एनर्जी में बदलने के लिए इंसुलिन की जरुरत पड़ती है।लेकिन खराब लाइफ स्टाइल की वजह से जब पैंक्रियाज प्रॉपर एक्टिव नहीं होती तो इंसुलिन सही तरीके से प्रोड्यूस नहीं होता और तब खानपान से मिलने वाला ग्लूकोज एनर्जी में तब्दील नहीं होता और फिर यही ग्लूकोज ब्लड में मिलकर शुगर लेवल बढ़ा देता है। इतना ही नहीं। पैन्क्रियाज कई तरह के एन्जाइम्स के जरिए डायजेशन को भी रेग्युलेट करती है, जो फैट पचाने के साथ वायरस-बैक्टीरिया से आंतों को भी बचाती है, तो इग्नोर करना बंद कीजिए और आज योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ मिलकर पैन्क्रियाज को एक्टिव कीजिए। ताकि डायबिटीज ठीक होने के साथ दूसरी बीमारियों से भी दूरी बनी रहे।
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