खर्राटे के कारण हो सकता है बीपी, शुगर का अटैक, स्वामी रामदेव से जानिए कारगर इलाज
खर्राटे के कारण हो सकता है बीपी, शुगर का अटैक, स्वामी रामदेव से जानिए कारगर इलाज
Written by: India TV Lifestyle Desk
Published : Mar 09, 2021 08:58 am IST,
Updated : Mar 09, 2021 03:02 pm IST
स्वामी रामदेव के अनुसार, खर्राटा आना बुरी नींद का कारण होता हैं। इसके कारण हार्ट अटैक, शरीर में ऑक्सीजन की कमी , डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना , ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों का कारण बन सकता हैं।
आप भी किसी ना किसी को जरूर जानते होगे जो खुद तो चैन की नींद सोते हैं लेकिन उनके खर्राटों की वजह से दूसरों की नींद उड़ जाती है। लेकिन खर्राटे को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई लोग समझते हैं कि खर्राटे गहरी नींद में आते हैं। लेकिन आपको बता दें कि खर्राटे आना शरीर में किसी ना किसी बीमारी का सिग्नल है।
खर्राटे आने की कई वजह हो सकती है। इसकी सबसे पहली वजह है मोटापा, नाक और गले की मसल्स का कमज़ोर हो जाना, स्मोकिंग, रेस्पिरेटरी समस्या, लंग्स में प्रॉपर ऑक्सीज़न ना पहुंचना और साइनस की समस्या के कारण हो सकता है।
खर्राटे की वजह से 'स्लीप एपनिया' जैसी बीमारी तो हो ही सकती है। आपको बता दें कि देश का हर चौथा शख्स खर्राटे लेता है।
स्वामी रामदेव के अनुसार, खर्राटा आना बुरी नींद का कारण होता हैं। इसके कारण हार्ट अटैक, शरीर में ऑक्सीजन की कमी , डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना , ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों का कारण बन सकता हैं। खर्राटा आने के मुख्य 3 कारण हैं। जो कफ के कारण, बढ़े हुए वजन के कारण और गले की ग्रंथिया ट्यूनिंग न होने के कारण इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
स्वामी रामदेव के अनुसार एक सप्ताह के अंदर 99 प्रतिशत तक खर्राटे की समस्या से निजात पा सकते हैं। जानिए कौन से योगासन और आयुर्वेदिक उपाय हैं कारगर।
इस आसन को थायराइड के साथ-साथ खर्राटा के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर फैला के बैठ जाएं। अब अपने दाएं पैर को मोड़ें और उसे बाएं पैर की जांघ पर रख लें और बाएं पैर को मोड़ें और उसे दाएं पैर की जांघ पर रख लें। अब आगे की ओर झुक जाएं और दोनों घुटनों के बल होते हुए अपने हाथों को सीधा करके फर्श पर रख लें। इसके बाद अपने शरीर के ऊपर के हिस्से को आगे की ओर खींचे। अपने मुंह को खोलें और अपने जीभ को मुंह से बाहर की ओर निकालें। नाक से सांस लेते हुए मुंह से आवाज करें। इस आसन को रोजाना 7 से 11 बार करें।
उज्जायी
इस प्राणायाम को 11 बार करें। इस आसन में गले से सांस अंदर भरकर ऊं का उच्चारण किया जाता है।