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डोकलाम जैसी स्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार रहना होगा: आर्मी चीफ

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज कहा कि भारत-चीन सीमा पर डोकलाम जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार रहना होगा।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Oct 21, 2017 11:33 pm IST, Updated : Oct 22, 2017 12:01 am IST
Bipin rawat- India TV Hindi
Image Source : PTI Bipin rawat

जम्मू: सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज कहा कि भारत-चीन सीमा पर डोकलाम जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार रहना होगा। रावत ने यहां एक समारोह में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि माउंटेन स्ट्राइक कोर को प्रतिरोधक बल के तौर पर तैयार किया जा रहा है और इसके गठन की प्रक्रिया समय के मुताबिक चल रही है। इस बल को 17 कोर के नाम दिया गया है। 

यह पूछने पर कि क्या 17 कोर का गठन चीन से निपटने के लिए किया जा रहा है, तो रावत ने कहा, 'हमें ये क्यों कहना चाहिए कि यह किसके खिलाफ है यह प्रतिरोध के लिए है और प्रतिरोध देश के समक्ष आने वाली किसी भी खतरे के खिलाफ है।' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट की समिति ने 2014 में 17 कोर के गठन को मंजूरी दी थी। अभी तक कोर के एक डिविजन के लिए करीब 25 हजार सैनिकों को तैयार किया गया है जिसका वर्तमान में मुख्यालय रांची में स्थित है। जब 72 डिविजन का गठन पूरा हो जाएगा तो कोर पश्चिम बंगाल के पानागढ़ से काम करेगा। 

यह पूछने पर कि क्या वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी के किसी अन्य हिस्से में चीन के साथ डोकलाम जैसे किसी गतरोध की संभावना है तो रावत ने कहा, 'हमें तैयार रहना होगा।' भारत की सेना ने चीन की सेना को एक सड़क निर्माण करने से रोक दिया था जिससे 16 जून से भारत और चीन की सेना के बीच करीब 73 दिनों तक गतिरोध की स्थिति बनी रही। 

रावत ने यह भी कहा कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति में सुधार हो रहा है। कार्यक्रम में उन्होंने 47 आरर्मड डिविजन को राष्ट्रपति ध्वज से नवाजा। 

उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा की स्थिति में सुधार हो रहा है और कश्मीर घाटी में अब जो भी हो रहा है वह आतंकवादियों और उनका समर्थन करने वालों की हताशा को दर्शाता है।' सेना प्रमुख ने कहा कि आतंकवाद में उतार-चढ़ाव होता रहता है। उन्होंने कहा कि हम आतंकवादियों का सफाया करते रहेंगे और सोशल मीडिया पर कट्टरपंथ के अभियान से भटक गये युवा वापस आ जायेंगे। 

एलओसी के पार आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों के फिर से खुलने के बारे में पूछने पर रावत ने कहा कि वे कभी बंद नहीं हुए थे। यह पूछने पर कि क्या सेना सीमा के उस पार संचालित आतंकवादी शिविरों को ध्वस्त करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करेगी तो रावत ने कहा, हम पहले ही कह चुके हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक एक तरीका है सीमा पार संचालित आतंकवादी ढांचों से निपटने के लिए। दूसरे तरीके भी हैं। सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि पठानकोट, उरी और नगरोटा में हुए आतंकवादी हमले की जांच पूरी हो चुकी है और कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा, 'दोषी पाए गए लोगों को दंडित किया जा रहा है। किसी को नहीं बख्शा गया है।' 

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