देशभर में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। इसे लेकर देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वहीं कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड भी निकाली गई। 26 जनवरी देश का राष्ट्रीय पर्व है। देश का हर नागरिक चाहे वह किसी धर्म, जाति या संप्रदाय से ताल्लुक रखता हो, इस दिन को राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत होकर मनाता है। इतिहास की बात करें तो इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ। भारत को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी तो मिल गई थी, लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित हुआ। इस दिन राजधानी में कर्तव्य पथ पर होने वाले मुख्य आयोजन में भारत की सांस्कृतिक झलक के साथ ही सैन्य शक्ति और परंपरागत विरासत की झांकी पेश की गई।
उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के शाश्वत आदर्शों पर स्थापित एक जीवंत गणराज्य के रूप में जश्न मनाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी न केवल संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता और बुद्धिमत्ता को याद करने का दिन है, बल्कि इसमें निहित लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की पुष्टि भी है। उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘‘विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र की उल्लेखनीय उपलब्धियां हमारी संस्थाओं की मजबूती, हमारे लोगों के लचीलेपन और समर्पण तथा 2047 में विकसित भारत की ओर अग्रसर होने के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण हैं।’’ उन्होंने कामना की, ‘‘यह गणतंत्र दिवस हम सभी को एकता को मजबूत करने, समावेशिता को बढ़ावा देने और हमारे प्यारे गणतंत्र की प्रगति और समृद्धि के लिए अटूट प्रतिबद्धता के साथ काम करने के लिए प्रेरित करे।’’
ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर भुवनेश्वर के महात्मा गांधी मार्ग पर और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कटक में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। कंभमपति ने राज्य स्तरीय 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में परेड में भाग लेने वाली टुकड़ियों का निरीक्षण किया और सलामी ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), ओडिशा औद्योगिक सुरक्षा बल (ओआईएसएफ), होम गार्ड और सिविल डिफेंस इकाइयों के कर्मियों सहित कुल 52 टुकड़ियों ने परेड में भाग लिया। कई सरकारी और निजी स्कूलों व कॉलेजों के छात्रों ने भी औपचारिक परेड में भाग लिया। परेड के दौरान 12 झांकियों ने विभिन्न सरकारी विभागों की उपलब्धियों, कल्याणकारी पहलों और विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को प्रदर्शित किया। इस अवसर पर पांच सांस्कृतिक समूहों ने भी प्रस्तुति दी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह अवसर एक विकसित भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करे।’’ विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। शांति, मित्रता और सद्भावना हमारे लोकतंत्र के आधार स्तंभ हैं। आइए, हम सब मिलकर इन स्तंभों को अक्षुण्ण रखते हुए राज्य और देश को सर्वश्रेष्ठ बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।’’
तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने सोमवार को परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद राज्यपाल ने विभिन्न टुकड़ियों के मार्च पास्ट की सलामी ली। इस अवसर पर तेलंगाना विधान परिषद के सभापति जी सुकेंदर रेड्डी, विधानसभा अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और मंत्रिमंडल के कुछ सदस्य मौजूद थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने होशियारपुर में कहा, "देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के बावजूद, पंजाब भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसकी अपनी कोई राजधानी नहीं है। इस गणतंत्र दिवस पर, मैं यह भी कहना चाहूंगा कि पंजाब और उसकी राजधानी चंडीगढ़ के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। जो भी आवश्यक होगा, हम वह करेंगे।"
गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर बीजेपी दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने कहा, "आज 77वें गणतंत्र दिवस पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आज हमारा देश बहुत ही सुंदर ढंग से चल रहा है। अनेक संस्कृतियों, अनेक भाषाओं, अनेक धर्मों के बावजूद, हम एक ही संविधान के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं और प्रगति कर रहे हैं।"
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर दिल्ली में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पर लिखा, "सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज का यह पावन दिन महान स्वतंत्रता सेनानियों, देशभक्तों, संविधान निर्माताओं और अमर शहीदों को स्मरण कर उन्हें धन्यवाद कहने का दिन है। आज गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर समस्त वीरों को सादर नमन के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी देकर हमें आजादी दिलाई तथा देश की एकता व अखंडता को बनाए रखने में अपना सर्वस्व बलिदान दिया। एनडीए सरकार की विघटनकारी सामाजिक, आर्थिक और संविधान विरोधी अलोकतांत्रिक नीतियों के कारण देश के वर्तमान हालात चिंतनीय है। संविधान लागू होने के दशकों बाद संविधान एवं लोकतंत्र को समृद्ध करने की बजाय मौजूदा एनडीए सरकार इसे कमजोर करने वाले कार्य कर रही है। वो फ़ासीवादी ताक़तें जिनका देश की आज़ादी में कहीं कोई योगदान नहीं है वो संविधान की मूल भावना पर प्रहार कर रहे है। संविधान की उद्देशिका को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। त्याग, बलिदान, यत्न, संघर्ष एवं समर्पण से भरे कर्तव्य-पथ पर अग्रसर होकर आजादी के दीवाने हमारे पुरखों ने हमें यह आदर्श जनतांत्रिक व्यवस्था सौंपी है। आइए, हम सभी मिलकर प्रतिज्ञा ले कि हम सब इस महान देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखेंगे तथा अपने सकारात्मक प्रयासों एवं योगदान से अपने पुरखों के संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक भारत के स्वप्न को साकार कर, देश की प्रगति-समृद्धि में बढ़-चढ़ योगदान करते रहेंगे।"
मणिपुर की झांकी राज्य की उस उल्लेखनीय यात्रा को दर्शाती है जिसमें स्वदेशी, उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों को सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकों से आर्थिक विकास के चालक के रूप में परिवर्तित किया गया है। यह झांकी दर्शाती है कि भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग वाले उत्पाद किस प्रकार राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों के द्वार खोल रहे हैं और हजारों किसानों की आजीविका में सुधार ला रहे हैं। सबसे आगे, उखरुल पहाड़ियों की चमकीली सिरारखोंग हथेई मिर्च प्रमुखता से प्रदर्शित है। पारंपरिक पोशाक पहने एक महिला को इस तीखी मिर्च की कटाई करते हुए दिखाया गया है, जो जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण और कृषि में महिलाओं की भागीदारी का प्रतीक है। प्रमुखता से प्रदर्शित जीआई टैग का प्रतीक प्रामाणिकता, संरक्षण और वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। मध्य भाग में मणिपुर के सुगंधित और पौष्टिक काले चावल, चक-हाओ की पारंपरिक कटाई और फटकने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है। जापान, कोरिया, चीन और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एपीईडीए की पहलों के माध्यम से मांग में रहने वाला चक-हाओ, किसानों की आत्मनिर्भरता और मूल्यवर्धित निर्यात की दिशा में एक निर्णायक कदम है। झांकी के पिछले भाग में, पश्चिमी पहाड़ियों के एक पारंपरिक ताराएंग-काई घर के सामने प्रसिद्ध तामेंगलोंग संतरे को प्रदर्शित किया गया है। 'ऑर्गेनिक इंडिया' लोगो राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत 400 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक प्रमाणीकरण का प्रतीक है, जो मणिपुर के पूर्णतः जैविक राज्य बनने की आकांक्षा को बल देता है। पार्श्व पैनलों पर राज्य पक्षी नोंग-इन (बार-टेल्ड/मिसेज ह्यूम्स तीतर) की सुंदर नक्काशी की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77वें गणतंत्र दिवस परेड को देखने के लिए कर्तव्य पथ पर पहुंचे लोगों का अभिवादन किया।
ओडिशा की झांकी आत्मनिर्भर भारत की एक आकर्षक कहानी प्रस्तुत करती है। इसके अग्रभाग में महिलाओं के नेतृत्व वाली समावेशी भागीदारी को दर्शाया गया है, जो ओडिशा की समतापूर्ण विकास के प्रति प्रतिबद्धता और भारत की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में इसकी बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। यह जोर राज्य के सशक्तिकरण पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो सतत आत्मनिर्भरता की नींव है। केंद्र में, एक सेमीकंडक्टर चिप पकड़े हुए हाथ तकनीकी उन्नति, डिजिटल क्षमता और कुशल मानव पूंजी के केंद्र के रूप में ओडिशा के उदय का प्रतिनिधित्व करता है। आधुनिक नवाचार के इस प्रतीक के ठीक सामने कोरापुट कॉफी है, जो सतत आजीविका, आदिवासी सशक्तिकरण और स्वदेशी कृषि में उत्कृष्टता का प्रतीक है। हथकरघा बुनाई और हस्तशिल्प के प्रत्यक्ष प्रदर्शन ओडिशा की कारीगरी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और आधुनिक संदर्भ में पारंपरिक कौशल के संरक्षण को और प्रदर्शित करते हैं। पिछले भाग में कोणार्क सूर्य मंदिर की प्रतिकृति है, जो झांकी का स्थापत्य आकर्षण है और ओडिशा की शाश्वत कलात्मक और सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। पट्टाचित्र चित्रकला, आदिवासी कला शैलियाँ, जगन्नाथ रथ का पहिया और किनारों पर चांदी की बारीक कारीगरी राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और शिल्प कौशल को सुदृढ़ करती हैं। 'मिट्टी से सिलिकॉन' तक की इस प्रतीकात्मक यात्रा के माध्यम से, यह झांकी समृद्धि के मंत्र की भावना को समाहित करती है और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति ओडिशा की अटूट प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है। 16वीं शताब्दी के लोक नृत्य चैती घोड़ा का प्रदर्शन करते नर्तक एक जीवंत सांस्कृतिक आयाम जोड़ते हैं, जो भारत के आत्मनिर्भरता के पथ में ओडिशा के स्थायी योगदान को रेखांकित करता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ परेड देखने के बाद कर्तव्य पथ से राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हुईं।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' लिखे बैनर के साथ गुब्बारे छोड़ने के साथ परेड समारोह का समापन हुआ।
मध्य प्रदेश की झांकी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को समर्पित रही। इसके अग्रभाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई की शिवलिंग धारण किए प्रतिष्ठित प्रतिमा है, जो मातृभूमि के प्रति उनकी अटूट भक्ति, आध्यात्मिक शक्ति और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कमल के आसन पर स्थापित यह प्रतिमा गरिमा, दृढ़ संकल्प और उस अटूट नारी शक्ति को दर्शाती है जिसने उनके शासनकाल का मार्गदर्शन किया। मध्य भाग में देवी अहिल्याबाई को घोड़े पर सवार दिखाया गया है, जिनके साथ सैनिक और मंत्री हैं, जो न्यायपूर्ण और सतर्क शासन का प्रतीक है। निचले भाग में उनके शासनकाल के दौरान किए गए मंदिरों के व्यापक जीर्णोद्धार और निर्माण को दर्शाया गया है, जो भारत की पवित्र परंपराओं की संरक्षक के रूप में उनकी भूमिका को उजागर करता है। एक मराठा रक्षक पहरा दे रहा है, जो सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। अंतिम भाग में प्रसिद्ध महेश्वर घाट को उसके मंदिर और किले के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो अहिल्याबाई की राजधानी और उनके प्रशासन और आस्था की चिरस्थायी विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। बहती नर्मदा और धीरे-धीरे चलती नाव शांति और निरंतरता का संदेश देती हैं। नीचे भित्तिचित्रों में महिलाओं को उनके संरक्षण में प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियाँ बुनते हुए दिखाया गया है, जो महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी शिल्प कौशल और विरासत के प्रति सम्मान को दर्शाता है। पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करने वाले लोक कलाकारों के साथ, यह झांकी लय और रंगों से जीवंत हो उठती है, जो लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन, नेतृत्व और स्थायी प्रभाव का जश्न मनाती है।
विजय फॉर्मेशन में एक राफेल विमान 900 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है और राजपथ के उत्तर में स्थित जलमार्ग के ऊपर 300 मीटर की ऊंचाई बनाए रखता है। इसके बाद विमान वर्टिकल चार्ली पैंतरेबाज़ी के लिए ऊपर चढ़ता है।
कर्तव्य पथ पर वज्रांग फॉर्मेशन किया गया है। इस फॉर्मेशन में 6 राफेल विमान 'वज्रंग' फॉर्मेशन में उड़ान भरते हैं।
भारतीय वायु सेना ने 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर फ्लाई-पास्ट प्रस्तुत किया। वरुणा फॉर्मेशन के दृश्य, जिसमें एक पी-8आई और दो एसयू-30 विमान शामिल हैं, 'विक' फॉर्मेशन में उड़ान भरते हुए दिखाई दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की झांकी भारत के स्वतंत्रता संग्राम में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका का सशक्त वर्णन प्रस्तुत करती है, जो सांस्कृतिक जागरण से क्रांतिकारी नेतृत्व तक की यात्रा को दर्शाती है। झांकी की शुरुआत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से होती है, जिनकी रचना वंदे मातरम 1875 में स्वतंत्रता का शाश्वत मंत्र बन गई, जिसने पीढ़ियों तक देशभक्ति, एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को प्रज्वलित किया। इसके बाद, यह स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो के माध्यम से बंगाल के आध्यात्मिक और बौद्धिक जागरण को प्रतिबिंबित करती है, जिनकी शिक्षाओं ने आत्मविश्वास, आंतरिक शक्ति और राष्ट्रीय चेतना को प्रेरित किया। रवींद्रनाथ टैगोर नैतिक नेतृत्व और सांस्कृतिक गौरव का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने कला, मानवतावाद और राष्ट्रवाद को जोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन की नैतिक आत्मा को आकार दिया। क्रांतिकारी जोश को खुदीराम बोस और बिनॉय, बादल और दिनेश की तिकड़ी के माध्यम से सशक्त रूप से चित्रित किया गया है, जो औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध निडर प्रतिरोध और अटूट साहस का प्रतीक हैं। मातंगिनी हाजरा, अन्य महिला प्रतिभागियों के साथ, महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करती हैं, जबकि छात्र और श्रमिक जनभागीदारी और सामूहिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। सबसे आगे नेताजी सुभाष चंद्र बोस खड़े हैं, जो निर्णायक नेतृत्व और अदम्य इच्छाशक्ति के प्रतीक हैं। भारतीय राष्ट्रीय सेना के उनके नेतृत्व ने स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक आयाम दिया और पूर्ण स्वतंत्रता के आह्वान से लाखों लोगों को प्रेरित किया।
त्योहारों की भूमि महाराष्ट्र ने इस वर्ष 'गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक' विषय पर एक भव्य झांकी प्रस्तुत किया। झांकी के अग्रभाग में, गणेशोत्सव से जुड़ी एक महिला द्वारा पारंपरिक ढोल बजाए जाने का भव्य दृश्य है। झांकी के पिछले भाग में एक मूर्तिकार भगवान गणेश की मूर्ति बनाते हुए दिखाई दे रहा है। मध्य भाग में एक गणेश भक्त गणेश विसर्जन के लिए गणेश जी की मूर्ति को अपने सिर पर उठाए हुए है। झांकी के अंतिम भाग में महाराष्ट्र के अष्टविनायक का प्रतिनिधित्व करने वाला एक मंदिर दर्शाया गया है। इसके अलावा, गणेशोत्सव से जुड़े अन्य सांस्कृतिक तत्व भी झांकी में प्रदर्शित किए गए हैं। झांकी के दोनों ओर कर्तव्य पथ पर, पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं लेज़िम लोक नृत्य प्रस्तुत किया।
जम्मू-कश्मीर की झांकी का दृश्य रेशमी चादर की तरह खुलता है, जो इस क्षेत्र को एक निर्बाध सांस्कृतिक निरंतरता के रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ शिल्प कौशल और प्रदर्शन एक ही चमकदार कथा में विलीन हो जाते हैं। एक तरफ, यह दृश्य पारंपरिक कलाओं की भव्यता का जश्न मनाता है: जटिल धातु नक्काशी से जगमगाते समावार; प्रतीकात्मक पैटर्न से समृद्ध उत्कृष्ट रूप से बुने हुए कानी शॉल; ज्यामितीय सामंजस्य में करघों से निकलते हस्तनिर्मित कालीन; और गहन, नाजुक फ़िलिग्री से सजे अखरोट की लकड़ी के बारीक नक्काशीदार कलाकृतियां। पेपर-मैशे की कृतियां जीवंत रंगों से दमकती हैं, जबकि पहाड़ी लघु चित्रकलाएं - विशेष रूप से अभिव्यंजक बसोहली शैली - सदियों की भक्ति से आकारित परिष्कृत सौंदर्यशास्त्र को दर्शाती हैं। ये सभी शिल्प उन कारीगरों को श्रद्धांजलि हैं जिनकी कुशलता और धैर्य इन जीवंत परंपराओं को बनाए रखते हैं। इस कलात्मक विरासत को पूरक करते हुए, केसरिया फूल कश्मीर के बैंगनी खेतों की आत्मा के रूप में उभरते हैं और लाल धागे भूमि, श्रम और विरासत में निहित एक शाश्वत पहचान का प्रतीक हैं। रबाब, संतूर और बांसुरी का सामंजस्यपूर्ण संगम एक मधुर ध्वनि का निर्माण करता है, जबकि रंगीन वेशभूषा में सजे कलाकार लोक नृत्यों के माध्यम से पूरे माहौल को जीवंत कर देते हैं। मनमोहक रौफ, शक्तिशाली कुड और पहाड़ी, भदरवाही और गोजरी नृत्यों की जोशीली परंपराएं इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता, आनंद और सामूहिक भावना को दर्शाती हैं।
हिमाचल प्रदेश, जिसे देवभूमि के रूप में पूजा जाता है, वीरभूमि भी है। इस राज्य ने देश को 1,203 वीरता पुरस्कार विजेता दिए हैं, जिनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र शामिल हैं। यह भारत के सैन्य इतिहास में दर्ज वीरता का एक असाधारण रिकॉर्ड है। हिमाचल प्रदेश की झांकी उस अदम्य भावना को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। यह हिमाचल प्रदेश के उन पुत्रों और पुत्रियों को सम्मानित करती है जिन्होंने अद्वितीय वीरता और बलिदान के साथ राष्ट्र की पुकार का जवाब दिया। यह झांकी पवित्रता और वीरता का सहज मिश्रण प्रस्तुत करती है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ उसकी गौरवशाली युद्ध परंपरा को दर्शाती है। यह एक सशक्त स्मरण है कि हिमाचल प्रदेश दिव्य आशीर्वाद और निडर देशभक्ति की भूमि है, देवभूमि में बसी एक सच्ची वीरभूमि।
केरल की झांकी दो क्रांतिकारी उपलब्धियों को दर्शाती है। इसमें भारत की पहली वाटर मेट्रो और 100% डिजिटल साक्षरता की उपलब्धि को प्रदर्शित किया गया, जो आत्मनिर्भर केरल की दिशा में समावेशी विकास का एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत करती है और आत्मनिर्भर भारत में योगदान देती है। ट्रैक्टर यूनिट में डिजिटल साक्षरता की ब्रांड एंबेसडर सरसु को ग्रामीण परिवेश में दिखाया गया है। स्मार्टफोन और लैपटॉप में व्यस्त सरसु जमीनी स्तर पर डिजिटल सशक्तिकरण का प्रतिनिधित्व करती हैं। केरल के प्रतिष्ठित मसाले और कृषि उत्पाद, नारियल, कटहल, केला, काली मिर्च और अदरक, दृश्य को घेरे हुए हैं, जो डिजिटल कनेक्टिविटी से मजबूत समृद्ध ग्रामीण जीवन का प्रतीक हैं। ट्रेलर में टर्मिनल सहित एक पूर्ण आकार की वाटर मेट्रो नाव दिखाई गई है, जो हरित और समावेशी गतिशीलता का प्रतिनिधित्व करती है। विभिन्न क्षेत्रों के लोग नाव पर सवार हैं, जिनमें हरित कर्म सेना के सदस्य भी शामिल हैं - राज्य की 'हरित सेना' जो अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित है। झांकी के दोनों ओर लोक नर्तक लय और सांस्कृतिक जीवंतता जोड़ते हैं, जो केरल की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। परंपरा और नवाचार का मिश्रण करते हुए, यह झांकी डिजिटल समावेशन, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और टिकाऊ परिवहन को एक साथ लाती है।
संस्कृति मंत्रालय की झांकी राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में प्रस्तुत की गई है। 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम राजनीतिक प्रचार का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता का आह्वान था। जेलों, सार्वजनिक सभाओं और स्वतंत्रता मार्चों में गाए जाने वाले इस गीत ने विभिन्न क्षेत्रों के भारतीयों को एकजुट किया।
पंजाब की झांकी नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत की 350वीं वर्षगांठ पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है। उन्हें हिंद दी चादर के रूप में पूजा जाता है, जो मानव अंतरात्मा, आस्था और स्वतंत्रता के रक्षक हैं। यह झांकी मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय के आदर्शों के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को दर्शाती है, जो पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं। झांकी के ट्रैक्टर वाले हिस्से में एक प्रतीकात्मक हाथ है जो आध्यात्मिक आभा बिखेरता है, जो करुणा, साहस और गुरु के अटूट मानवीय दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। अग्रभाग में दिव्य शिलालेख 'एक ओंकार' घूमता हुआ दिखाई देता है, जो सिख दर्शन द्वारा प्रतिपादित शाश्वत और सार्वभौमिक सत्य को व्यक्त करता है। हाथ पर एक कपड़ा लिपटा हुआ है जिस पर हिंद दी चादर लिखा है, जो अपने विश्वासों के कारण उत्पीड़ित लोगों की रक्षा का प्रतीक है और गुरु को धर्म की ढाल के रूप में स्थापित करता है। ट्रेलर में रागी सिंहों द्वारा प्रस्तुत शब्द कीर्तन के साथ एक गहन आध्यात्मिक वातावरण को दर्शाया गया है, जो दिव्य प्रतिध्वनि और चिंतन का माहौल बनाता है। पृष्ठभूमि में खंडा साहिब का स्मारक स्थित है, जो एक पवित्र और दिव्य उपस्थिति प्रदान करता है। यह दृश्य दिल्ली में गुरुद्वारा श्री सिस गंज साहिब के सामने स्थित ऐतिहासिक चौक को दर्शाता है, जहाँ बलिदान और आस्था की याद में प्रतिदिन शब्द कीर्तन की परंपरा जारी है। ट्रेलर के एक छोर पर गुरुद्वारा श्री सिस गंज साहिब है, जो श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत का सटीक स्थान है और मानव गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए उनके बलिदान का शाश्वत साक्षी है। पार्श्व पैनलों में उनके समर्पित साथियों - भाई मति दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की शहादत को दर्शाया गया है, जिनका अटूट साहस गुरु द्वारा सिखाए गए सर्वोच्च आदर्शों को प्रतिबिंबित करता है।
पुडुचेरी की झांकी केंद्र शासित प्रदेश की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प कौशल और विश्व प्रसिद्ध ऑरोविल की कल्पना को दर्शाती है। यह झांकी पुडुचेरी की टेराकोटा कला, मिट्टी के बर्तन बनाने और मूर्तिकला की सदियों पुरानी विरासत का जश्न मनाती है, और उन कुशल कारीगरों की पीढ़ियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती है जिन्होंने इन परंपराओं को संरक्षित और समृद्ध किया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी 'भारत गाथा: श्रुति, कृति, दृष्टि' प्रस्तुत करती है, जो प्राचीन कथा परंपराओं से लेकर वैश्विक सामग्री और मीडिया केंद्र के रूप में भारत के उदय तक की सांस्कृतिक यात्रा का वर्णन करती है। इस झांकी को भारतीय फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने डिजाइन किया है।
नागालैंड की झांकी हॉर्नबिल महोत्सव को संस्कृति-आधारित पर्यटन और समुदाय-प्रेरित आत्मनिर्भरता की एक जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है, जो भारत के पूर्वोत्तर में आत्मनिर्भर भारत की भावना को प्रतिबिंबित करती है। रंगों की भरमार, जनजातीय प्रतीकों और गतिशील सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से, झांकी हॉर्नबिल महोत्सव के आत्मनिर्भर पर्यटन के एक आदर्श के रूप में विकसित होने को दर्शाती है। कारीगरों, बुनकरों, किसानों, कलाकारों, युवा उद्यमियों और स्थानीय समुदायों को एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय भागीदार के रूप में दिखाया गया है जहाँ शिल्प, वस्त्र, संगीत, व्यंजन, आतिथ्य और रचनात्मक उद्यम स्थायी आर्थिक अवसर पैदा करते हैं। यह प्रस्तुति युवा सशक्तिकरण, पारंपरिक कौशल के पुनरुद्धार और पर्यावरण-सांस्कृतिक स्थिरता पर प्रकाश डालती है, यह दर्शाती है कि विरासत-आधारित पर्यटन किस प्रकार समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए पहचान को मजबूत करता है।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की पुष्पमय झांकी राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बनाई गई।
राजस्थान की झांकी बीकानेर की उस्ता कला की उत्कृष्ट विरासत का जश्न मनाती है, जो विश्व प्रसिद्ध शाही शिल्प है और राज्य की कलात्मक उत्कृष्टता और आत्मनिर्भर सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। मूल रूप से ईरान से लाई गई और मुगल संरक्षण में फली-फूली उस्ता कला को राजा राय सिंह के शासनकाल के दौरान बीकानेर में अपना सही ठिकाना मिला।
तमिलनाडु की झांकी 'समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत' विषय को दर्शाती है, जो प्राचीन सांस्कृतिक शक्ति और समकालीन तकनीकी नेतृत्व के सहज संगम को प्रस्तुत करती है। यह राज्य को परंपराओं के संरक्षक और नवाचार-संचालित विकास में अग्रणी के रूप में चित्रित करती है। सामने के हिस्से में टेक्नो-जल्लीकट्टू को दर्शाया गया है, जो तमिलनाडु के अदम्य साहस का सशक्त प्रतीक है। एक गतिशील जल्लीकट्टू मुद्रा में खड़ा व्यक्ति साहस, कौशल और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। परिपथ जैसे पैटर्न से जगमगाता बैल, परंपरा और भविष्य की तकनीक के संगम का प्रतीक है, जो डिजिटल हरित पृष्ठभूमि के बीच 'नवाचार यहीं से शुरू होता है' का संदेश देता है। मध्य भाग तमिलनाडु के भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में उभरने को उजागर करता है। आंशिक रूप से असेंबल की गई इलेक्ट्रिक कार अपनी बैटरी और मोटर को प्रदर्शित करती है, जो पारदर्शिता, नवाचार और तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। बैटरी यूनिट असेंबल करते रोबोटिक आर्म स्वचालन, सटीकता और औद्योगिक उत्कृष्टता को दर्शाते हैं, जबकि एक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्वच्छ और टिकाऊ गतिशीलता के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। पिछला भाग हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर केंद्रित है। प्राकृतिक और परिपथ पैटर्न वाले हिस्सों में विभाजित एक वृक्ष पारिस्थितिकी और उद्योग के बीच सामंजस्य का प्रतीक है। यांत्रिक रूपांकन और डिजिटल तत्व पर्यावरण-प्रौद्योगिकी की अवधारणा को और मजबूत करते हैं।
दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संयुक्त सैन्य बैंड, राजपूत रेजिमेंट और असम रेजिमेंट ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया।
कर्तव्य पथ पर गृह मंत्रालय की झांकी का प्रदर्शन किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए), 2023 के ऐतिहासिक अधिनियम को प्रदर्शित किया गया, जो न्याय के लिए भारत के नए कानून हैं जो 1 जुलाई 2024 को 77वें गणतंत्र दिवस पर लागू हुए।
उत्तर प्रदेश की झांकी बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता को दर्शाती है, जिसमें इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक उत्तर प्रदेश की तेजी से प्रगति करने वाली दृष्टि के साथ समाहित किया गया है। सामने के भाग में कालिंजर से प्राप्त प्रसिद्ध शिलाखंडित मूर्ति, एकमुख लिंग को प्रदर्शित किया गया है, जो बुंदेलखंड की गहरी आध्यात्मिक जड़ों और उल्लेखनीय स्थापत्य विरासत का प्रतीक है।
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, गुजरात की झांकी भीखाजी कामा को श्रद्धांजलि अर्पित करती नजर आई, जिन्होंने क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा और सरदार सिंह राणा के साथ मिलकर भारत के स्वतंत्रता के संदेश को विदेशी धरती तक पहुंचाया। सबसे आगे भीखाजी कामा अपने द्वारा डिजाइन किया गया वंदे मातरम ध्वज पकड़े खड़ी हैं, जिसके नीचे संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त कई भारतीय भाषाओं में वंदे मातरम का नारा अंकित है। मध्य भाग राष्ट्रीय ध्वज के विकास के प्रमुख पड़ावों को दर्शाता है- 1906 में कोलकाता के पारसी बागान में स्वदेशी आंदोलन से लेकर 1917 के स्वशासन ध्वज तक, 1921 में महात्मा गांधी को पिंगली वेंकैया द्वारा प्रस्तुत डिजाइन, 1931 में इसके लगभग स्वीकृत होने और अंत में 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा धर्म चक्र सहित तिरंगे को स्वीकार किए जाने तक। झांकी का समापन महात्मा गांधी की एक प्रतिमा के साथ होता है, जो स्वदेशी और चरखे के माध्यम से स्वतंत्रता का प्रतीक है, और एक भव्य धर्म चक्र के सामने स्थापित है। जावेरचंद मेघानी द्वारा रचित 'कसुम्बिनो रंग' गीत पर प्रस्तुति देने वाले लोक कलाकार झांकी में देशभक्ति का जोश भर देते हैं, उन बलिदानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता को आकार दिया और जो आज भी एक आत्मनिर्भर राष्ट्र को प्रेरित करते हैं।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की 4 भैरव बटालियन की टुकड़ी का प्रदर्शन किया गया। इसका नेतृत्व मेजर अंजुम गोर्का ने किया। यह एक विशेष आक्रमणकारी पैदल सेना इकाई है, जो पारंपरिक पैदल सेना और विशेष बलों की क्षमताओं को जोड़ती है। त्वरित प्रतिक्रिया और उच्च-तीव्रता वाले अभियानों के लिए डिज़ाइन की गई यह इकाई युद्धक्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करती है।
आत्मनिर्भर भारत की थीम पर आधारित असम की झांकी, भारत के धुबरी जिले के अशारिकंडी गांव को समर्पित है, जो पारंपरिक असमिया टेराकोटा कारीगरों का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध केंद्र है। झांकी के अग्रभाग में एक भव्य टेराकोटा गुड़िया है, जिसके हाथों में गोलाकार रूप से सजे मिट्टी के दीपक हैं, जो एक प्रभावशाली दृश्य प्रस्तुत करते हैं। ट्रैक्टर वाले हिस्से को बांस की बाड़ से सजाया गया है, जो असम की समृद्ध बांस विरासत और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है। ट्रेलर को एक सुंदर मयूरपोंखी नाव के रूप में डिजाइन किया गया है, जो असम की नदी-संबंधी पहचान को दर्शाता है। झांकी में कारीगरों को हीरामती (मिट्टी) से देवी-देवताओं की दिव्य आकृतियाँ बनाते हुए दिखाया गया है, जो शिल्प की रचनात्मक प्रक्रिया और आध्यात्मिक सार को उजागर करता है। पीछे की ओर लगा एक पारंपरिक पाल (पाल) नाव की प्रामाणिकता को बढ़ाता है और उन ऐतिहासिक जलमार्गों की याद दिलाता है जिन्होंने असम की संस्कृति और व्यापार को पोषित किया है। झांकी के साथ पारंपरिक मेखेला-चादोर पहने महिला कारीगर भी हैं, जो लयबद्ध ढंग से चलती हैं और ऐसे छंद गाती हैं जो उनकी मिट्टी और कृतियों पर गर्व व्यक्त करते हैं।
कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश के पहले आदिवासी डिजिटल संग्रहालय की एक मनमोहक झलक पेश की। डिजिटल संग्रहालय को प्रदर्शित करने वाली यह झांकी उन अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करती है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सलामी मंच के सामने से गुजरती झांकी का हाथ हिलाकर स्वागत किया।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान हिम योद्धा, बैक्ट्रियन ऊंट, ज़ानिस्करी टट्टू और काले चील (शिकारी पक्षी) प्रदर्शित किए गए। परेड में पांच स्वदेशी नस्ल के कुत्ते- मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पिपराई, कोम्बई और राजपालयम भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें आक्रमण और गश्ती कुत्तों के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।
डिप्टी कमांडेंट महेंद्र पाल सिंह राठौर की कमान में बीएसएफ की ऊंट टुकड़ी अपने ऊंट चेतक पर सवार होकर कर्तव्य पथ पर मार्च की। सलामी पंक्ति के आगे बीएसएफ के राजसी ऊंट मार्च करते दिखे, जिनके पीछे प्रतिष्ठित ऊंट-सवार बैंड शामिल हुआ। इस टुकड़ी में तीन एसओ और 50 ऊंट सवार शामिल हुए। इन ऊंटों को अक्सर 'रेगिस्तान का जहाज' कहा जाता है और ये राजस्थान के थार रेगिस्तान और कच्छ के रण के कठोर और दुर्गम इलाकों में बीएसएफ कर्मियों के एकमात्र भरोसेमंद साथी हैं। उनके ठीक पीछे, दुनिया का एकमात्र बैंड, बीएसएफ का ऊंट-सवार बैंड आता है। बैंड मास्टर सब इंस्पेक्टर अमल चट्टोपाध्याय ने इन बैंड सदस्यों का नेतृत्व किया, जिन्होंने 'हम हैं सीमा सुरक्षा बल' धुन बजाई। बीएसएफ के राजस्थान फ्रंटियर द्वारा 1986-87 में गठित यह बैंड रेगिस्तान और मारवाड़ महोत्सवों का एक स्थायी हिस्सा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली राष्ट्रीय विजय की याद में ड्रोन शक्ति और एकीकृत संचालन केंद्र को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान प्रदर्शित किया गया।
डीआरडीओ (DRDO) एक लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) विकसित कर रहा है, जिसका प्रतिनिधित्व उत्कृष्ट वैज्ञानिक और परियोजना निदेशक ए प्रसाद गौड कर रहे हैं। यह हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन की गई है। LR-AShM एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है जो स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है और इसे 1500 किमी तक की रेंज के लिए विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह हाइपरसोनिक मिसाइल अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती है, जिसकी हाइपरसोनिक गति मैक 10 से शुरू होती है और कई छलांगों के साथ औसत मैक 5.0 बनाए रखती है। चूंकि यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उच्च गति और पैंतरेबाज़ी के साथ उड़ती है, इसलिए दुश्मन के जमीनी और जहाज-आधारित रडार इसके प्रक्षेप पथ के अधिकांश भाग के दौरान इसे पता नहीं लगा सकते हैं। LR-AShM दो-चरण ठोस प्रणोदन रॉकेट मोटर प्रणाली से सुसज्जित है। LR-AShM के इस सफल विकास के साथ, भारत हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता वाले देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान आकाश हथियार प्रणाली और अभ्रा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (एमआरएसएएम) का प्रदर्शन किया गया।
सहायक कमांडेंट निशी शर्मा के नेतृत्व में भारतीय तटरक्षक बल की टुकड़ी गर्व और सटीकता के साथ सलामी मंच की ओर बढ़ी। 'वयम रक्षामः - हम रक्षा करते हैं' के आदर्श वाक्य से प्रेरित ये पुरुष और महिलाएं भारत की समुद्री शक्ति और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं। 154 जहाजों और 78 विमानों के बेड़े के साथ, वे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री क्षेत्रों में से एक में 4.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर के समुद्री क्षेत्र का प्रबंधन करते हैं।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सूर्यस्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (यूआरएलएस) और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम का प्रदर्शन किया गया।
भारतीय रक्षा बलों की त्रि-सेवा झांकी में ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता से विजय को दर्शाया गया है। यह राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की सामूहिक शक्ति, एकता और एकीकरण का प्रतीक है। यह झांकी युद्ध के सभी क्षेत्रों में समन्वित योजना, संयुक्त क्रियान्वयन और निर्बाध समन्वय के माध्यम से निर्णायक प्रतिक्रिया देने के भारत के संकल्प को दर्शाती है। दृश्य वर्णन में भारतीय वायु सेना के सटीक हवाई हमले, समुद्री वर्चस्व सुनिश्चित करने वाले त्वरित नौसैनिक युद्धाभ्यास और भारतीय सेना के समन्वित जमीनी आक्रमणों को उजागर किया गया है, जो एक निर्णायक संयुक्त सैन्य अभियान को प्रतिबिंबित करते हैं। यह ऑपरेशन उभरते खतरों का तेजी से और एकजुटता से जवाब देने की रक्षा बलों की क्षमता का उदाहरण है। 'संयुक्तता से विजय' भारत के रक्षा बलों के भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी-संचालित और मिशन-उन्मुख बल में परिवर्तन का प्रतीक है।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान दिव्यास्त्र और शक्तिबाण का प्रदर्शन किया गया। दोनों अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं। ये दोनों ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित सामरिक हाइब्रिड यूएवी ज़ोल्ट (जोल्ट) का उपयोग करके उन्नत निगरानी का प्रदर्शन करते हैं, जिसका उपयोग तोपखाने की गोलाबारी के निर्देशन के लिए किया जाता है।
भारतीय वायु सेना की परेड में मार्चिंग टुकड़ी कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया। ठीक उसी समय सिंदूर फॉर्मेशन- जिसमें दो राफेल, दो सुखोई, दो मिग 29 और एक जगुआर लड़ाकू विमान शामिल हुए और ऊपर से उड़ान भरी।
भारत का पहला स्वदेशी रूप से निर्मित बख्तरबंद हल्का विशेषज्ञ वाहन, हाई मोबिलिटी रिकॉनेंस व्हीकल (एचएमआरवी), दिल्ली के कर्तव्य पथ में प्रदर्शित किया गया। इसे महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित किया गया है और 2023 में इसे सेवा में शामिल किया गया था। यह युद्धक्षेत्र निगरानी रडारों से सुसज्जित है जो मनुष्यों, वाहनों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलीकॉप्टरों का पता लगाने में सक्षम हैं। इसके अलावा, रडार की पहुंच से बाहर के क्षेत्रों को कवर करने के लिए ड्रोन, उन्नत संचार प्रणाली और ड्रोन-रोधी बंदूकें भी इसमें मौजूद हैं। एचएमआरवी की मदद से छोटी टीमें दुश्मन के गश्ती दल और यहां तक कि बख्तरबंद लक्ष्यों को भी नष्ट कर सकती हैं।
भारतीय नौसेना की परेड में शामिल होने वाली टुकड़ी ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस 2026 परेड में भाग लिया।
61वीं कैवलरी विश्व की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है, जो शौर्य, घुड़सवारी और वीरता की चिरस्थायी परंपराओं को संजोए हुए है। 61वीं कैवलरी टुकड़ी का नेतृत्व कैप्टन अहान कुमार ने किया।
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर यूरोपीय संघ (ईयू) के दल ने भी झांकी निकाली। यूरोपीय संघ (ईयू) के सैन्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर्नल फ्रेडरिक साइमन स्प्रुइट ने किया, जो यूरोपीय संघ सैन्य स्टाफ (ईयूएमएस) के महानिदेशक की ओर से एक औपचारिक जिप्सी वाहन पर सवार दिखे।
ध्वज फॉर्मेशन में 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार Mi-17 1V हेलीकॉप्टरों द्वारा दिल्ली के कर्तव्य पथ पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं। इस हेलीकॉप्टर फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री, भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसके बाद स्वदेशी रूप से विकसित 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रगान गाया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोनों मुख्य अतिथियों के साथ बग्घी पर सवार होकर कर्तव्य पथ पर पहुंचीं। यहां पीएम मोदी ने सभी की अगवानी की।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी कर्तव्य पथ पर पहुंच गए हैं। पीएम मोदी ने उनकी अगवानी की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ राष्ट्रपति भवन से बाहर निकलीं।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लखनऊ में गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान सभा में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने दिल्ली में अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया है।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने उत्तराखंड के हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ में गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने में देश का नेतृत्व किया।
गणतंत्र दिवस के मौके पर PM मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे और शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत लोकतंत्र की जननी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, जिन्होंने 'जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए' के सिद्धांत को अपनाया है, एक शानदार, गौरवशाली, समृद्ध और विकसित भारत का निर्माण हो रहा है। इस गणतंत्र दिवस पर, हम सभी एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने में योगदान देने का संकल्प लें..."
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "गणतंत्र दिवस के मौके पर मैं देश के सभी नागरिकों को दिल से बधाई देता हूं। मैं सभी भारतीयों से यह भी अपील करता हूं कि वे संकल्प लें कि 2047 तक भारत एक विकसित भारत के रूप में उभरे।"
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, "गणतंत्र दिवस के मौके पर, मैं देश के सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। गणतंत्र दिवस संकल्प, दृढ़ संकल्प और संविधान की मर्यादा का पालन करते हुए देश को आगे ले जाने का दिन है। 77 साल पहले, हमने भारत का संविधान अपनाया था। यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है। यह भारत के लोगों के लिए एक जीवित मार्गदर्शक है। यह हमारे लिए एक ऐसा अवसर है कि हम मिलकर यह प्रण लें कि 2047 तक, जब हम आज़ादी के 100 साल पूरे करेंगे, तब तक हम भारत को एक विकसित भारत बनाएंगे..."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उनके साथ में मौजूद रहे।
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में आसमान साफ रहा और सुबह ठंड रही। दिल्ली के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो पिछले दिन की तुलना में करीब दो डिग्री सेल्सियस कम है। आयानगर में न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री सेल्सियस, पालम में 4.3 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड में 4.7 डिग्री सेल्सियस और रिज में 5.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहर की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में रही और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 209 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता 25 केंद्रों पर ‘खराब’ और 14 केंद्रों पर ‘मध्यम’ श्रेणी में रही।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सीएम आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद गणतंत्र दिवस पर तिरंगे को सलामी दी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, "77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर मैं राज्य के सभी लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं। 1950 में इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। 76 सालों की इस यात्रा में हमारे संविधान ने कई उतार-चढ़ाव देखे। लेकिन इन सबके बावजूद, एक भारत श्रेष्ठ भारत के हमारे संकल्प के साथ, उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, हर भारतीय के गौरव, भारत की एकता और अखंडता को आगे बढ़ाते हुए, आज हम सभी एक नए भारत को देख रहे हैं। इसमें हमारे संविधान की अहम भूमिका है।"
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व के मूल संवैधानिक मूल्यों के प्रति नयी प्रतिबद्धता का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने गणतंत्र की रक्षा के लिए ‘‘सामूहिक सतर्कता’’ की आवश्यकता पर जोर दिया। बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में नागरिकों से संविधान में निहित मूलभूत सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया। विविधतापूर्ण समाज में सद्भाव का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को ‘‘बहुलता, विविधता, समावेशिता और सामाजिक सद्भाव’’ की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘आज मुझे वह पुरानी कहावत याद आ रही है: स्वतंत्रता की कीमत निरंतर सतर्कता है। मैं आज सभी से इस सतर्कता का पालन करने का आग्रह करती हूं। हमारा गणतंत्र और हमारा संविधान आज हमारी सामूहिक सतर्कता की मांग करते हैं।’’ तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो बनर्जी ने इस दिन स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश के सशस्त्र बलों और आम नागरिकों को सलाम किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देशवासियों को सोशल मीडिया पर बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा संविधान हर भारतीय का सबसे बड़ा हथियार है - यही हमारी आवाज़ है, हमारे अधिकारों का सुरक्षा-कवच। इसी की मज़बूत नींव पर हमारा गणतंत्र खड़ा है जो समानता और सौहार्द से ही सशक्त होगा। संविधान की रक्षा ही, भारतीय गणतंत्र की रक्षा है - हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को सच्ची श्रद्धांजलि है। जय हिंद! जय संविधान!"
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, "स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये एक अनूठा गणतंत्र दिवस है, जब तारीख़ भी 26 है साल भी 26 है। इसीलिए इस विशेष गणतंत्र दिवस की विशेष बधाई और शुभकामनाएं! आइए इस विशेष गणतंत्र दिवस पर देश के गणतंत्र के आधार जनतंत्र और उसके आधार ‘संविधान’ की रक्षा का विशिष्ट संकल्प उठाएं। जय हिंद!"
बसपा सुप्रीमो मायावती ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "समस्त देशवासियों तथा दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों एवं उनके परिवार वालों को भी आज 77वें गणतंत्र दिवस की दिली मुबारकबाद/हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। वैसे आज के दिन अपने बेहतरीन संविधान पर गर्व करने के साथ-साथ इसका विशेष महत्व तभी है जब सरकारों के बड़े-बड़े दावों और लुभावने वादों आदि के भूलभलैयों से अलग हटकर, यह ईमानदार ऑकलन किया जाये कि क्या केन्द्र व राज्य सरकारों की केवल छलावापूर्ण बातें हैं या फिर संविधान की सर्वसमाज हितैषी सच्ची मंशा के हिसाब से देश ने राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में अपेक्षित विकास करके लोगों का जीवन स्तर में कुछ बहु-अपेक्षित सुधार किया है? ऐसा करके ही देश की ज्वलन्त समस्याओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।"
उन्होंने आगे लिखा, "इसके साथ ही, गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ठ सेवा के लिये जिन लोगों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण व पद्मश्री तथा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है उन सबको तथा उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। इतना ही नहीं बल्कि देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों ग़रीबों, शोषितों-पीड़ितों एवं उपेक्षितों को अपने पैरों पर खड़ा करके उन्हें आत्म-सम्मान व स्वाभिमान का जीवन दिलाने के संघर्ष हेतु अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, देश भर में उनके करोड़ों अनुयाइयों की चाहत के अनुसार अब बिना और देरी किये, भारतरत्न से सम्मानित किया जाए तो यह उचित होगा, जिसकी माँग बी.एस.पी. लगातार करती आ रही है।"
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गणतंत्र दिवस पर भारत को शुभकामनाएं देते हुए कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से, मैं भारत को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं। संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं। रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उभरती प्रौद्योगिकियों में हमारे घनिष्ठ सहयोग से लेकर क्वाड के माध्यम से हमारे बहुआयामी जुड़ाव तक, अमेरिका-भारत संबंध हमारे दोनों देशों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए वास्तविक परिणाम देते हैं। मैं आने वाले वर्ष में अपने साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के लिए तत्पर हूं।"
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने गणतंत्रि दिवस की बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "समस्त प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह दिवस हमें संविधान की गरिमा, लोकतंत्र की शक्ति और राष्ट्रीय एकता का स्मरण कराता है। आइए, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत–2047 के संकल्प को साकार करने हेतु परिश्रम, ईमानदारी और समर्पण के साथ एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें। जय हिंद! जय देवभूमि उत्तराखंड!"
वाराणसी में भी धूमधाम से गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग को तिरंगे फूलों से सजाया गया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड की अध्यक्षता करेंगी। वहीं यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस साल कर्तव्य पथ को बड़े धूमधाम से सजाया गया है।
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में हाई अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। गणतंत्र दिवस समारोह के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए पुलिसकर्मी गुरुग्राम, चिल्ला, टिकरी, सिंघु, कपासहेरा, बदरपुर और धौला कुआं की सीमाओं पर वाहनों की गहन जांच कर रहे हैं।
पीेएम मोदी ने सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है।"
कर्तव्य पथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। इसमें दिल्ली के विभिन्न रास्तों पर आवाजाही के लिए रोक लगाई गई है।
बता दें कि आज गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर्तव्य पथ पर झंडा फहराएंगी। वहीं पीएम मोदी वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। कर्तव्य पथ पर अलग-अलग झांकियां भी प्रस्तुत की जाएंगी। राजधानी दिल्ली की सुरक्षा में 10 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं।
देशभर में आज 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। देशभर में लोग गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं।
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