Friday, February 06, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, मध्यस्थता के लिए बनाई कमेटी की रिपोर्ट पर होगा विचार

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, मध्यस्थता के लिए बनाई कमेटी की रिपोर्ट पर होगा विचार

आज अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होगी, उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ अयोध्या मामले में मध्यस्थता के लिए बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट पर विचार करेगी।

Written by: PTI
Published : May 09, 2019 06:52 pm IST, Updated : May 10, 2019 12:00 am IST
अयोध्या विवाद पर...- India TV Hindi
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या के राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के सर्वमान्य हल के लिये उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति ने सीलबंद लिफाफे में अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री को छह मई को रिपोर्ट सौंप दी गई थी और इस मामले को सुनवाई के लिये शुक्रवार को सूचीबद्ध किया गया है। 

उच्चतम न्यायालय ने मामले के सर्वमान्य समाधान की संभावना तलाशने के लिये इसे आठ मार्च को मध्यस्थता के लिये संदर्भित किया था। इस विवाद के सर्वमान्य समाधान की संभावना तलाशने के लिये शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ एम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति के गठन के आदेश के बाद पहली बार इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। इस समिति के अन्य सदस्यों में आध्यत्मिक गुरु और आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू शामिल थे। 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ अब इस रिपोर्ट को देखेगी और आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी। शीर्ष अदालत ने मध्यस्थता के लिये गठित इस समिति को बंद कमरे में अपनी कार्यवाही करने और इसे आठ सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया था। संविधान पीठ ने कहा था कि उसे विवाद के संभावित समाधान के लिये मध्यस्थता के संदर्भ में कोई ‘‘कानूनी अड़चन’’ नजर नहीं आती। 

पूर्व में पीठ को निर्मोही अखाड़े को छोड़कर, हिंदू संगठनों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बताया गया कि वे अदालत के मध्यस्थता के सुझाव का विरोध करते हैं। मुस्लिम संगठनों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था। मध्यस्थता के सुझाव का विरोध करते हुए हिंदू संगठनों ने दलील दी कि पूर्व में समझौते के प्रयास विफल हो चुके हैं और दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के प्रावधानों के लिये प्रक्रिया की शुरुआत से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी करने की जरूरत है।

सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया था कि मध्यस्थता की कार्यवाही ‘‘बेहद गोपनीयता’’ के साथ होनी चाहिए जिससे उसकी सफलता सुनिश्चित हो सके और मध्यस्थों समेत किसी भी पक्ष द्वारा व्यक्त किये गए मत गोपनीय रखे जाने चाहिए और किसी दूसरे व्यक्ति के सामने इनका खुलासा नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय ने हालांकि इस चरण में किसी तरह की रोक लगाने का आदेश देने से परहेज किया और इसके बजाए मध्यस्थों को यह अधिकार दिया कि अगर जरूरत हो तो वे लिखित में अनिवार्य आदेश जारी करें, जिससे मध्यस्थता कार्यवाही के विवरण का प्रकाशन रोका जा सके। 

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement