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पहली बार दो बांग्लादेशी नागरिकों को दिया गया पद्म पुरस्कार, दोनों देश 1971 युद्ध की मना रहें 50वीं वर्षगांठ

भारत और बांग्लादेश, बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ और भारत के साथ राजनयिक संबंधों के 50वें वर्ष के साथ-साथ शेख मुजीबुर रहमान की शताब्दी मना रहे हैं।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: November 08, 2021 13:19 IST
पहली बार दो बांग्लादेशी नागरिकों को दिया गया पद्म पुरस्कार, 1971 युद्ध की मना रहें 50वीं वर्षगांठ- India TV Hindi
Image Source : FILE पहली बार दो बांग्लादेशी नागरिकों को दिया गया पद्म पुरस्कार, 1971 युद्ध की मना रहें 50वीं वर्षगांठ

नई दिल्ली: भारत में पूर्व उच्चायुक्त मुअज्जम अली और 1971 युद्ध के नायक कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया है, इस पुरस्कार को पाने वाले यह पहले बांग्लादेशी नागरिक हैं। मुअज्जम अली को मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

भारत और बांग्लादेश, बांग्लादेश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ और भारत के साथ राजनयिक संबंधों के 50वें वर्ष के साथ-साथ शेख मुजीबुर रहमान की शताब्दी मना रहे हैं। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 16 दिसंबर को होने वाले विजय दिवस समारोह के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद बांग्लादेश की यात्रा कर सकते हैं। 

हालांकि, भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है। बता दें कि पश्चिमी पाकिस्तान की आर्मी द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ भारत ने 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना पर हमला बोला था। इस युद्ध में भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान को हराया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांगलादेश बना।

विजय दिवस के पीछे की गाथा

भारत की आजादी के बाद भारत से अलग होकर पाकिस्तान अस्तित्व में आया, जिसके दो हिस्से बने- पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। लेकिन, भाषा-बोली, खान-पान और मान्यताओं को लेकर दोनों में ज्यादा समानताएं नहीं थी। पाकिस्तानी आर्मी की आंखों में पूर्वी पाकिस्तान चुभता था।

इसी दौरान साल 1971 में पाकिस्तानी आर्मी ने ऑपरेशन सर्च लाइट चलाकर पूर्वी पाकिस्तान के निहत्थे और मासूम लोगों को घर से निकाल-निकालकर मारना शुरू कर दिया, औरतों के साथ सामूहिक बलात्कार किए गए, बड़ी संख्या में ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों को गोलियों से भून दिया गया था।

पाकिस्तानी आर्मी के इसी जुल्म के खिलाफ भारत खड़ा हो गया। जनरल मानेकशॉ की अगुवाई में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर लड़ने का ऐलान कर दिया। मुक्ति वाहिनी को पाकिस्तानी सेना में काम करने वाले पूर्वी पाकिस्तानी सैनिकों ने बनाया था।

भारतीय सेना के मुक्ति वाहिनी के साथ मिलने की घोषणा के बाद पाकिस्तान ने भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से पर 3 दिसंबर को हमला किया, जिसका भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया और उन्हें सीमा से तुरंत ही खदेड़ दिया। इसके बाद भारतीय सेना रणनीति के साथ बांग्लादेश की सीमा में घुसी और लगभग 15 हजार किलोमीटर के दायरे को अपने कब्जे में ले लिया।

यह युद्ध 13 दिन चला, दोनों और से हजारों सैनिक मारे गए और फिर 16 दिसंबद 1971 को पाकिस्तान के करीब 90,000 से ज्यादा सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही भारत युद्ध जीत गया और बांगलादेश के रूप में एक नए देश का निर्माण हुआ।

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