प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुदर्शन चक्र के लिए देश को तैयारी करने की बात कही है और इसीलिए अब आत्मनिर्भरता के साथ DRDO पूरी मुस्तैदी के साथ अलग-अलग बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। मिसाइल फ़ोर्स रॉकेट फोर्स में शामिल होने वाली मिसाइल चौकी सुदर्शन चक्र का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
DRDO की तरफ से बनाई गई लॉन्ग एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल को गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। एलआर-एएसएचएम एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और गतिमान दोनों प्रकार के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है तथा विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन की गई है।
बता दें कि पहली बार कर्तव्य पथ पर देश के सामने इसकी पहली झलक दिखाई देगी। इसका मकसद बिलकुल साफ है देश को मजबूत और सशक्त बनाना।

अब हम आपको बताते हैं आकाश नेक्स्ट जनरेशन मिसाइल यानी आकाश-एनजी के बारे में। इस समय ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश ने अपना दमखम दिखाया और पाकिस्तान से आने वाले हर एरियल थ्रेट को ध्वस्त किया इसीलिए अब आकाश प्राइम और आकाश नेक्स्ट जनरेशन 1 गेम चेंजर के रोल पर है। यह 100 से ज्यादा टारगेट को देख सकता है और 10 टारगेट को ध्वस्त कर सकता है।
इसमें सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है सुखोई-30 और तेजस के साथ इंटीग्रेटेड होकर चलने वाले अस्त्र मिसाइल की।
ये सभी मिसाइल्स देश में ही तैयार हो रही है। इनका मकसद बिलकुल साफ है कि रडार और अलग-अलग लेवल के सिस्टम के साथ मिलकर एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार करना जो भारतीय सेना की मिसाइल फ़ोर्स और रॉकेट फ़ोर्स को बढ़ाए। साथ में सुदर्शन चक्र प्रधानमंत्री का जो विज़न है उसको पूरा करें ताकि देश के खिलाफ कोई भी दुश्मन ना देख सके।
बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ भारत के स्वदेशी हथियारों के प्रदर्शन से दुनिया के कई देश चौंक गए थे। भारत की जवाबी कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह हो गए थे। पाकिस्तान अभी भी इसे भुला नहीं पाया है। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर की चोट खाए पाकिस्तानी आर्मी चीफ की रात की नींद उड़ वाली है क्योंकि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की एयर-टू-एयर मिसाइलों की झांकी कर्तव्य पथ पर दिखेगी।
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