मथुरा बसंतोत्सव ब्रज का प्रमुख उत्सव है। बसन्त पंचमी के दिन से कृष्ण की लीलास्थली ब्रज वृन्दावन के सभी प्रमुख मंदिरों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन शुरु हो जाते है और सभी का अपना अलग धार्मिक महत्व है। वृंदावन स्थित टेढ़े खंबे के मंदिर में मौजूद बसंती कमरा जो कि साल में एक ही दिन बसंत पंचमी के दिन खुलता है बड़ी संख्या में लोग उसके दर्शन करने आते हैं इस बसंती कमरे में विदेशी झालरों के साथ- दिव्य सिंहासन पर राधा कृष्ण पीले वस्त्रों में विराजमान कराए जाते है और भगवान की मनमोहक छवि को देख भक्त भाव विभोर हो जाते है।
बसंत पंचमी पर खुला बसंती कमरा
साल में एक ही दिन खुलने वाले बसंती कमरे के बारे में मंदिर के गोस्वामी प्रशांत शाह ने बताया कि इस मंदिर को टेढ़े खम्भे के नाम से भी जाना जाता है इस मंदिर की खासियत यह है की मंदिर की दीवारों पर 14 विभिन्न कलाकृति बनी हुई हैं। इसके बरामदे में स्थित दो पाषाण काल के चित्र बने हुए हैं। बसंती कमरे का निर्माण लखनऊ के नवाब फुन्दनलाल शाह और कुंदन लाल शाह ने सन 1863 में कराया था। बसन्त पंचमी के दिन शाहबिहारी जी मंदिर में विराजमान श्री राधारमण ठाकुर के बसंती कमरे में भगवान अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस मंदिर में बना ये कमरा साल में सिर्फ एक बार ही दर्शनों के खोला जाता है।
बसंती कमरे की खासियत
यह बसंती कमरा मंदिर के ऋतूराज भवन में स्थित है और इसकी खासियत है अन्दर की गई बेहद आकर्षक सजावट इस कमरे में राधा रमण ठाकुर को बसंत ऋतु का एहसास दिलाने के लिए मौसम के हिसाब से ही फूलों की सजावट की जाती है। साथ ही विशेष आकर्षक झाड-फानूश, लाईटिंग के अलावा कमरे के बीच में इटली से लाये गये मनमोहक पत्थर में फव्वारे लगाकर उसे नहर का रूप दिया गया है। इस मंदिर को प्राचीनता के आधार पर टेढ़े खम्भे वाला मंदिर के नाम से जाना जाता है और शाहजी मंदिर भी कहा जाता है। बसंत पंचमी के दिन होने वाले ठाकुरश्री राधारमण के विशेष दर्शनों के लिए दूर-दूर से भक्तगण यहां आते हैं और अपने आराध्य के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं और हंसी खुशी में नाचते गाते मस्ती में झूमते हैं। मान्यता है कि यहां साल में एक बार होने वाले दर्शन को जो व्यक्ति करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है वही भगवान से उनको मोक्ष प्राप्ति होती है
(रिपोर्ट: मोहन श्याम शर्मा)
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