Friday, January 23, 2026
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CM योगी ने जिस 'कालनेमी' का किया जिक्र, वो कौन था, क्या है उसकी कहानी, जानें

Kalnemi Kaun Tha: हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक बयान में राक्षस 'कालनेमि' का जिक्र किया। क्या आप जानते हैं ये कोई साधारण राक्षस नहीं था बल्कि रामायण काल का सबसे बड़ा छलिया था। जिसने भगवान हनुमान के साथ विश्वासघात किया था।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Jan 23, 2026 11:41 am IST, Updated : Jan 23, 2026 11:47 am IST
kalnemi- India TV Hindi
Image Source : GEMINI कौन था राक्षस कालनेमी जिसने हनुमान जी के साथ किया था छल

कौन था कालनेमि: पौराणिक कथाओं अनुसार कालनेमि लंकापति रावण का एक अत्यंत मायावी और शक्तिशाली अनुचर था जो रूप बदलने और भ्रम पैदा करने में काफी माहिर था। युद्ध के समय जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तब उन्हें बचाने के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत थी। इसे लाने के लिए हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत की ओर उड़े। जब रावण को इस बात का पता चला तो उसने कालनेमि को उनका मार्ग रोकने के लिए भेजा। कालनेमि जानता था कि शक्ति के बल पर वो हनुमान जी को कभी नहीं रोक पाएगा। तब उसने छल का सहारा लेने की सोची।

रावण जानता था कि यदि सूर्योदय तक संजीवनी नहीं पहुंची तो लक्ष्मण के प्राण नहीं बचेंगे। जिससे भगवान राम और उनकी पूरी सेना कमजोर पड़ जाएगी। रावण की इसी मंशा को पूरी करने के लिए कालनेमि ने अपनी माया से रास्ते में एक सुंदर आश्रम, सरोवर और मंदिर का निर्माण किया। उसने स्वयं एक तेजस्वी साधु का वेश धारण कर लिया और राम-राम का जाप करने लगा। 

कालनेमि ने हनुमान जी के साथ किया छल

जब हनुमान जी उस मार्ग से जा रहे थे तो उनकी नजर इस मायावी राक्षस पर पड़ी जो राम भगवान की भक्ति कर रहा था। कालनेमि ने ऋषि के रूप में हनुमान जी को भोजन करने और विश्राम करने के लिए कहा जिससे हनुमान जी को संजीवनी लेने में देरी हो जाए। कालनेमि ने उन्हें अपनी मायावी बातों में फंसाया और सरोवर में स्नान करने को कहा।

ऐसे खुला भेद और राक्षस का हुआ अंत 

जैसे ही हनुमान जी सरोवर में स्नान करने के लिए उतरे तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। लेकिन हनुमान जी ने जैसे ही उसका वध किया था उसमें से एक सुंदर अप्सरा निकली जो श्राप के कारण मगरमच्छ बन गई थी। उसने हनुमान जी को बताया कि आश्रम में बैठा साधु वास्तव में रावण का भेजा हुआ राक्षस कालनेमि है। भेद खुलते ही हनुमान जी ने उस राक्षस का अंत कर दिया और समय रहते उन्होंने संजीवनी बूटी भी हासिल कर ली।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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