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चांद पर तिरंगा लहराने का काउंटडाउन शुरू, जानें चंद्रयान-3 के लिए आखिरी 15 मिनट क्यों है महत्वपूर्ण

Reported By : T Raghavan Edited By : Khushbu Rawal Published : Aug 22, 2023 01:37 pm IST, Updated : Aug 23, 2023 06:57 am IST

चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की लैंडिंग चांद की सबसे खतरनाक जगह पर होनी है। नासा के मुताबिक चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव रहस्य, विज्ञान और उत्सुकता से भरा है यही वजह है कि पूरी दुनिया इतिहास बनता देखता चाहती है।

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Image Source : ISRO चंद्रयान-3 मिशन

अब से 31 घंटे बाद भारत इतिहास रचने वाला है। जो काम करने में अमेरिका चीन और रूस नाकाम रहा वो मिशन हिंदुस्तान पूरा करने वाला है। कल शाम 6 बजे पूरी दुनिया की नज़र भारत पर होगी क्योंकि कल शाम को भारत का चंद्रयान-3 चांद की जमीन पर लैंड करेगा। इसरो ने लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग की सभी तैयारियां पूरी कर ली है। कल शाम 6 बजकर 4 मिनट पर लैंडर विक्रम की चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंडिंग होगी। इसरो सेंटर में लगातार चंद्रयान-3 की मॉनिट्रिंग की जा रही है। अबतक सबकुछ प्लान के मुताबिक चल रहा है। लैंडर विक्रम के सभी हिस्से ठीक तरह से काम कर रहे हैं और  अगर किसी वजह से कल सफल लैंडिंग नहीं हो पाती है तो इसके लिए भी इसरो ने प्लान बी तैयार कर लिया है। ऐसे हालात में  चंद्रयान-3 की लैंडिंग 27 अगस्त को कराई जाएगी।

4 चरणों में होगी लैंडिंग

लैंडर विक्रम की लैंडिंग 4 चरणों में होगी। इस दौरान लैंडर की स्पीड को कम करके उसे चंद्रमा की सतह पर पहुंचाया जाएगा। पहले चरण में लैंडर 30 किलोमीटर से 7.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर आएगा। वहीं दूसरे चरण में लैंडर विक्रम 7.5 किलोमीटर से 6.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर आएगा जबकि तीसरे चरण में 6.8 किलोमीटर से 800 मीटर की ऊंचाई पर आ जाएगा और आखिर में लैंडर विक्रम 800 मीटर से 150 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचेगा।

लैंडिंग के 'वो' 15 मिनट-

  • ISRO लैंडर को कमांड देना शुरू करेगा
  • लैंडर के सभी 4 इंजनों का इस्तेमाल होगा
  • 2 मीटर प्रति सेकंड की स्पीड लाई जाएगी
  • 1683 मी. प्रति सेकंड से 2 मीटर प्रति सेकंड स्पीड
  • 2 मीटर प्रति सेकंड की स्पीड आते ही लैंडिंग
  • सही जगह ना मिलने पर दूसरी जगह लैंडिंग
  • लैंडिंग की जगह का फैसला सॉफ्टवेयर लेगा
  • लैंडर का सॉफ्टवेयर खुद फैसला लेने में सक्षम

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Image Source : ISRO
चंद्रयान-3 मिशन

टाइम ऑफ टेरर क्यों हैं आखिरी के 15 मिनट?
स्पेस एक्सपर्ट प्रोफेसर आरसी कपूर ने बताया कि चांद पर लैंडिंग के आख़िरी 15 मिनट बेहद अहम होंगे। पहले स्टेप में जब चंद्रयान-3 लैंड करना शुरू करेगा तो उसकी स्पीड 1683 मीटर प्रति सेकेंड की होगी। इसी स्पीड पर उसे 7.4 किलोमीटर की ऊंचाई तक उतारा जाएगा। फिर लैंडर की स्पीड को घटाकर 375 मीटर प्रति सेकेंड किया जाएगा। यहां पर लैंडर विक्रम का ऑल्टिट्यूड होल्ड तय किया जाएगा यानी उसे झुकाया जाएगा। इसके बाद यान को 1300 मीटर की ऊंचाई तक लाया जाएगा। इसी हिसाब से चंद्रमा की सतह तक जाने की स्पीड धीरे धीरे कम होती रहेगी फिर 400 मीटर, फिर 150 मीटर और फिर 50 मीटर तक लाया जाएगा। आख़िर में 10 मीटर पर आने के बाद फाइनल लैंडिंग होगी। फाइनल टचडाउन पर लैंडर की स्पीड 2 मीटर प्रति सेकेंड तक हो जाएगी।

चांद की सबसे खतरनाक जगह पर होनी है लैंडिंग
बता दें कि चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की लैंडिंग चांद की सबसे खतरनाक जगह पर होनी है। नासा के मुताबिक चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव रहस्य, विज्ञान और उत्सुकता से भरा है यही वजह है कि पूरी दुनिया इतिहास बनता देखता चाहती है। वैज्ञानिको के मुताबिक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर काफी गहरे  गड्ढे हैं। अरबों वर्षों से सूरज की रोशनी इस इलाके में नहीं पहुंची है। यहां का तापमान माइनस 248 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और यहां चंद्रमा की सतह को गर्म करने वाला कोई वातावरण नहीं है। इस बार ISRO फूंक-फूंकर कदम रख रहा है। चंद्रयान-2 के दौरान जो मिस्टेक हुई थी उसका रीटेक ना हो इसके लिए पूरी सावधानी बरती जा रही है।

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