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मोदी सरकार ने गुलाम नबी के लिए बिछाया 'रेड कारपेट', BJP के करीब जाते दिखे कांग्रेस नेता

गांधी परिवार से हालिया समय में बढ़ती दूरियों के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की बीजेपी से नजदीकियां बढ़तीं दिख रहीं हैं। एक दुर्लभ घटनाक्रम में, शनिवार को गुलाम नबी आजाद के लिए मोदी सरकार रेड कारपेट वेलकम करती दिखी।

IANS IANS
Published on: February 21, 2021 10:40 IST
मोदी सरकार ने गुलाम...- India TV Hindi
Image Source : PTI मोदी सरकार ने गुलाम नबी के लिए बिछाया 'रेड कारपेट', BJP के करीब जाते दिखे कांग्रेस नेता

नई दिल्ली: गांधी परिवार से हालिया समय में बढ़ती दूरियों के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की बीजेपी से नजदीकियां बढ़तीं दिख रहीं हैं। एक दुर्लभ घटनाक्रम में, शनिवार को गुलाम नबी आजाद के लिए मोदी सरकार रेड कारपेट वेलकम करती दिखी। मौका था, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' मुशायरे का। आत्मनिर्भर भारत के रास्ते पर बढ़ रहे हिंदुस्तान के अहसास को बयां करने के लिए हुए इस मुशायरे में मोदी सरकार के दो मंत्रियों -- मुख्तार अब्बास नकवी और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ कांग्रेस के असंतुष्ट नेता गुलाम नबी आजाद शिरकत करते नजर आए। यहां अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर स्थित आयोजन स्थल पर कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद के बैनर और पोस्टर लगे रहे।

मोदी सरकार के कार्यक्रम में पहली बार दिखे कांग्रेस नेता के पोस्टर

यह पहला मौका था, जब राजधानी दिल्ली में आयोजित मोदी सरकार के कार्यक्रम में किसी कांग्रेस नेता के पोस्टर दिखे हों। अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ पहली वीवीआईपी कतार में बैठे गुलाम नबी आजाद को देखकर लोग चकित हुए। संयोगवश, पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद एक ही राज्य जम्मू-कश्मीर से ही नाता रखते हैं। काबिलेगौर है कि हाल में राज्यसभा में हुए विदाई समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ पाकर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद सुर्खियों में रहे हैं।

कांग्रेस ने इस बार आजाद को नहीं भेजा राज्यसभा

राहुल गांधी कैंप के असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं में शुमार गुलाम नबी आजाद के लिए शनिवार को दूसरा मौका रहा, जब मोदी सरकार में उनके लिए प्रशंसा के भाव दिखे। कभी राजीव गांधी के बेहद वफादार रहे गुलाम नबी आजाद को कांग्रेस ने इस बार फिर से राज्यसभा नहीं भेजा। कांग्रेस ने कुछ दिन पहले ही उनकी जगह मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपी है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' नामक इस मुशायरे में गुलाम नबी आजाद एक सम्मानित अतिथि की भूमिका में रहे। मुशायरे में शिरकत कर रहे वसीम बरेलवी सहित ऊर्दू के कई मशहूर शायरों ने मोदी सरकार के दोनों मंत्रियों के साथ आजाद का नाम लेते हुए काव्य प्रेम के लिए तारीफ की।

'निकट भविष्य में घाटी में भाजपा का चेहरा हो सकते हैं आजाद'

राज्यसभा से रिटायर होने के बाद जब कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी है, ऐसे में शनिवार को मोदी सरकार के मंत्रियों के साथ मुशायरे में गुलाम नबी आजाद के हिस्सा लेने के बाद उन्हें भाजपा के और करीब जाते देखा जाने लगा है। सियासी गलियारे में भी इसकी खासी चर्चा हो रही है। अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में भाजपा से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा, "आजाद साहब एक वास्तविक राजनेता (स्टेट्समैन) हैं। वे निकट भविष्य में घाटी में भाजपा का चेहरा हो सकते हैं। पार्टी लाइन से परे होकर लोग उनके जैसे नेता का सम्मान करते हैं।"

हाल में 9 फरवरी को, राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद के विदाई भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की आंखों में आंसू आ गए थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक 'सच्चा मित्र' बताते हुए बहुत भावुक विदाई दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि गुलाम नबी आजाद के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं। यह भी कहा था कि गुलाम नबी आजाद के उत्तराधिकारी के लिए उनसे मुकाबला करना मुश्किल होगा, क्योंकि एक सांसद और विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने बहुत उच्चस्तरीय मानक गढ़े हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के भावुक भाषण के बाद से कयास लगने शुरू

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भी आजाद की तारीफ करते हुए कहा था कि 'कोई है जो धीरे-धीरे बोलता है, लेकिन अपनी बात प्रभावी ढंग' से बताता है। कांग्रेस के असंतुष्ट नेता गुलाम नबी आजाद के रिटायर होने वाले दिन राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी के भावुक भाषण के बाद से कयास लगने शुरू हुए हैं कि वह निकट भविष्य में सत्ताधारी पार्टी के साथ अपना सफर शुरू कर सकते हैं। हालांकि, गुलाम नबी आजाद के एक करीबी का कहना है कि किसी मुशायरे में शिरकत करने से किसी पार्टी की नजदीकी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन, मोदी सरकार के एक मंत्रालय की ओर से कराए गए कार्यक्रम के आयोजन स्थल पर गुलाम नबी आजाद के पोस्टर लगने के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।

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