प्रेमानंद महाराज किसी पहचान के मौहताज नहीं हैं। वो अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। उनके विचार लोगों को काफी प्रभावित करते हैं। सोशल मीडिया पर आए दिन प्रेमानंद महाराज के वीडियोज वायरल होते रहते हैं जिसमें वो कई लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके सवालों का समाधान देते हैं। ऐसे में उन्होंने एक आम समस्या का सामाधन बताया जिसका जवाब शायद करोड़ों लोग ढूंढते रहते हैं। ये सवाल है मन में गंदे विचारों को आने से कैसे रोकें? पुज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, मन में गलत विचारों का आना स्वाभाविक है, क्योंकि यह मन का स्वभाव है। लेकिन उन्हें रोकने और उनसे प्रभावित न होने के लिए कुछ उपाय करने की जरूरत है। चलिए जानते हैं क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज।
'साक्षी भाव' अपनाएं
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जैसे आप सड़क पर चलते हुए अनजान लोगों को देखते हैं और उनसे उलझते नहीं, वैसे ही मन में आने वाले विचारों को देखें। उनका कहना है कि गलत विचार आना पाप नहीं है, उन विचारों के अनुसार कर्म करना या उनमें डूबे रहना समस्या है। ऐसे में जब कोई गंदा विचार आए, तो उस पर ध्यान देने के बजाय उसे एक "गुजरते हुए बादल" की तरह देखें।
नाम जप की शक्ति
गलत विचारों को रोकने का सबसे अमोघ अस्त्र 'नाम जप' है। जब मन खाली होता है, तो वह गंदे विचारों का घर बन जाता है। यदि आपकी जीभ पर निरंतर राधा-राधा या आपके इष्ट का नाम चलता रहेगा, तो गलत विचारों को प्रवेश की जगह नहीं मिलेगी। काम करते हुए, चलते-फिरते नाम जप करते रहें।
कुसंग का त्याग और सत्संग का आश्रय
प्रेमानमंद जी महाराज बार-बार जोर देते हैं कि हम जो देखते और सुनते हैं, वही विचार बनकर लौटता है। यदि आप अश्लील या नकारात्मक चीजें देखेंगे, तो मन शांत नहीं रह सकता। ऐसी चीजों से बचें। रोज कम से कम 15-30 मिनट संतों के विचार सुनें। इससे बुद्धि शुद्ध होती है और गलत विचारों को काटने का विवेक जाग्रत होता है।
आहार की शुद्धि
जैसा खाए अन्न, वैसा होवे मन।" प्रेमानंद महाराज के अनुसार, तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, अधिक तीखा) मन में काम और क्रोध पैदा करता है। सात्विक भोजन ग्रहण करने से मन शांत और पवित्र होता है।
भगवान से प्रार्थना
जब विचार बहुत प्रबल हो जाएं और आप उन्हें न रोक पाएं, तो भगवान के सामने रोकर प्रार्थना करें। "हे प्रभु, मैं आपका हूं, ये विकार मुझे परेशान कर रहे हैं, आप मेरी रक्षा कीजिए।" महाराज जी कहते हैं कि शरणागति में बड़ी शक्ति है। जब आप अपनी हार स्वीकार कर भगवान को पुकारते हैं, तो वे आपकी बुद्धि को संभाल लेते हैं।