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'मानवता की रक्षा और शांति स्थापित करना ही जिहाद', जमीअत उलमा-ए-हिंद की सभा में बोले मौलाना महमूद मदनी

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Nov 29, 2025 08:34 pm IST,  Updated : Nov 29, 2025 08:39 pm IST

जमीअत उलेमा-ए-हिंद की प्रबंधन कमेटी की सभा में मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लाम में जिहाद एक पवित्र कर्तव्य है, जिसका उद्देश्य प्रताड़ना का अंत, मानवता की रक्षा और शांति स्थापित करना है

Maulana Maulana Mahmood Madani- India TV Hindi
मौलाना महमूद मदनी Image Source : REPORTER INPUT

भोपाल: जमीअत उलेमा-ए-हिंद की प्रबंधन कमेटी की सभा शनिवार को बरकतुल्लाह एजुकेशन कैंपस, भोपाल में जमीअत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में शुरू हुई, जिसमें वक्फ संशोधन अधिनियम, कथित लव जिहाद, मदरसों की सुरक्षा, इस्लामी माहौल में आधुनिक शिक्षा, समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट रुख प्रस्तुत किया गया। बैठक में देश भर से प्रबंधन कमेटी के पंद्रह सौ सदस्यों ने भाग लिया।

जिहाद का उद्देश्य प्रताड़ना का अंत

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में जिहाद एक पवित्र कर्तव्य है, जिसका उद्देश्य प्रताड़ना का अंत, मानवता की रक्षा और शांति स्थापित करना है, और यहां तक कि उत्पीड़न और अराजकता को रोकने के लिए युद्ध भी जायज़ है। लेकिन यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि जिहाद कोई व्यक्तिगत या निजी पहल नहीं है, बल्कि केवल एक सशक्त और संगठित राज्य ही शरीआ के सिद्धांतों के अनुसार इस पर निर्णय ले सकता है। भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है जहां इस्लामी राज्य की अवधारणा मौजूद नहीं है, इसलिए यहां जिहाद के नाम पर कोई बहस ही नहीं। मुसलमान संवैधानिक रूप से बाध्य हैं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ज़िम्मेदार है। मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम के अनुसार, "जिहाद-ए-अकबर" मनुष्य के भीतर की बुराई, लालच, लोभ, क्रोध और आत्म-विद्रोह से लड़ने का नाम है, जो हर युग का सबसे बड़ा संघर्ष है।

शहीदी दिवस पर सिख भाइयों के साथ एकजुटता जताई

मौलाना मदनी ने गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि मुगल काल में गुरु साहिब के युवा पुत्रों की हत्या क्रूरता और अन्याय पर आधारित थी। यह त्रासदी किसी भी तरह से हमारे सामूहिक नैतिक मूल्यों और न्याय के सिद्धांतों से मेल नहीं खाती। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि मुगल सरकार को इस्लामी सरकार कहना ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है। मुगल काल में जो युद्ध हुए, वह धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि अधिकतर राजनीतिक सत्ता से संबंधित थे। उन्होंने जहां गैर-मुस्लिमों, सिखों और विभिन्न स्थानीय शक्तियों के साथ युद्ध लड़े, वहीं मुस्लिम शासकों के साथ भी भीषण युद्ध लड़े और उन्हें दंडित किया। 

युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ 

मौलाना मदनी ने युवाओं के बारे में कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं, इसलिए उनकी सोच और व्यवहार ही राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करते हैं। अगर हमें सचमुच अपने लिए एक मज़बूत भविष्य का निर्माण करना है, तो युवाओं को व्यक्तिवाद के दायरे से निकालकर सामूहिकता और टीम वर्क के दायरे में लाना होगा।

इस अवसर पर दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम और हदीस के शेख मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने तज़किया नफ़्स (आत्म शुद्धि) पर संबोधित करते हुए कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य धर्म है। हम अपनी पीढ़ियों की रक्षा और धर्म की रक्षा के लिए जमीअत से जुड़े हैं और किसी भी कार्य की सफलता ईमानदारी पर निर्भर करती है, जबकि ईमानदारी का आधार नीयत की शुद्धता पर है। इसीलिए कहा जाता है कि सूफीवाद की शुरुआत "इन्नामा अल-आमाल बिन्नियात" से होती है और इसकी परिणति यह है कि बंदा खुद को अल्लाह, सर्वशक्तिमान के सामने समर्पित कर दे, और उसकी इबादत में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जैसे वह अपने रब को देख रहा हो, या कम से कम यह एहसास बना रहे कि अल्लाह उसे देख रहा है।

ईमान सबसे बड़ी नेमत

जमीअत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रोफेसर मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी ने कहा कि ईमान सबसे बड़ी नेमत है और इसकी रक्षा के लिए हर त्याग दिया जा सकता है। इसी उद्देश्य से इस्लामी माहौल वाले स्कूलों की स्थापना अपरिहार्य हो गई है, अन्यथा हमारी पीढ़ियां बौद्धिक और धार्मिक भटकाव का शिकार हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय मुसलमान कभी भी देश विरोधी तत्वों के साथ नहीं रहे हैं और न ही कभी रहेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि हम अपने धर्म की शिक्षाओं के अनुसार इस देश से प्यार करते हैं और एक व्यक्ति जितना अच्छा मुसलमान होगा, उतना ही वह अपनी मातृभूमि से प्यार करेगा।

धार्मिक शिक्षा के महत्व का उल्लेख

इनके अलावा दारुल उलूम देवबंद के प्रोफेसर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी ने धार्मिक शिक्षा के महत्व पर विस्तृत भाषण दिया। जमीअत उलमा कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार कासमी, दरारुल उलूम देवबंद के प्रोफेसर मौलाना अब्दुल्ला मारूफी, मौलाना अमीनुल हक महासचिव जमीअत उलमा यूपी, जमीअत उलमा तेलंगाना के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुलक़वी, मुफ्ती अशफाक काजी मुंबई, मौलाना नदीम सिद्दीकी महाराष्ट्र, मौलाना साजिद फलाही, मुफ्ती अब्दुल रज्जाक अमरोहवी, मौलाना याह्या करीमी, मौलाना जैनुल आबिदीन कर्नाटक, मौलाना मुफ्ती सलीम साकरस ने भी विभिन्न विषयों पर संबोधन दिया। मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने सालाना बजट पेश किया।

आधुनिक स्कूलों की स्थापना के प्रस्ताव

पहले सत्र में जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सैयद नोमान शाहजहांपुरी ने इस्लामी मदरसों के संरक्षण और इस्लामी वातावरण में आधुनिक स्कूलों की स्थापना, जमीअत उलमा पश्चिम उ.प्र. के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अकील कासमी ने देश में बढ़ती नफरत, जमीअत उलमा कर्नाटक के महासचिव मौलाना मुफ्ती शम्सुद्दीन बिजली ने लव जिहाद की अवधारणा, जमीअत उलमा बिहार के अध्यक्ष मुफ्ती जावेद इकबाल कासमी ने फिलिस्तीन की चिंताजनक स्थिति, जमीअत उलमा केरल के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद इब्राहिम ने समान नागरिक संहिता, मौलाना अब्दुल कादिर ने असम और एसआर की स्थिति और जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने वक्फ अधिनियम से संबंधित प्रस्ताव पेश किए। 

मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने दिया अध्यक्षीय भाषण

इससे पूर्व, मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने अध्यक्षीय प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसका समर्थन मुफ़्ती अहमद देवला (जमीअत उलेमा गुजरात के अध्यक्ष), मौलाना अली हसन मज़ाहरी (जमीअत उलमा संयुक्त पंजाब के अध्यक्ष) और काज़ी अब्दुल माजिद (जमीअत उलमा आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष) ने किया। जमीअत उलेमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने स्वागत भाषण दिया। जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने सचिव रिपोर्ट और तीन वर्ष के क्रिय-कलापों का सारांश प्रस्तुत किया। उन्होंने एक शोक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया।

शेख-उल-हिंद पुरस्कार

शनिवार की सभा में तीन राज्यों जमीअत उलमा पश्चिमी उत्तर प्रदेश जोन, जमीअत उलेमा असम और जमीअत उलमा नागालैंड को उनके अच्छे प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन स्वरूप शेख-उल-हिंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार सदस्यता अभियान, इकाई गठन, समाज सुधार और धार्मिक शिक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर, ग्यारह जिलों, बिजनौर (उप्र), मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), हरिद्वार (उत्तराखंड), हैलाकंदी (असम), किशनगंज (बिहार), सिपाही जाला (त्रिपुरा), बैंगलोर (कर्नाटक), होजाई, दीमापुर (असम), जहानाबाद (बिहार) और सीतापुर और मऊ (उप्र) को शेख-उल-इस्लाम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

जमीअत उलेमा हिंद के दो उपाध्यक्षों का चयन

प्रबंधन कमेटी में मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी (दारुल उलूम देवबंद के शिक्षक) और कारी मुहम्मद अमीन पोकन को जमीअत उलेमा हिंद के दो उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया, जबकि कारी मोहम्मद शौकत अली वेट को कोषाध्यक्ष चुना गया। बैठक में मौलाना मोहम्मद यासीन जहाजी द्वारा संकलित पुस्तक "जमीअत उलमा-ए-हिंद की तारीख: तजावीज और फैसले" के चौथे खंड का लोकार्पण जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और अन्य सम्मानित सदस्यों द्वारा किया गया। इसी तरह, दीनी तालीमी बोर्ड के ऐप का भी जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष द्वारा उद्घाटन किया गया, जिसका संक्षिप्त परिचय मौलाना मोहम्मद उमर बैंगलोरी ने प्रस्तुत किया। सभा में शायर-ए-इस्लाम कारी एहसान मोहसिन ने नात-ए-पाक पेश की, जबकि जमीअत का तराना मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला ने प्रस्तुत किया। इस सभा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मौलाना महमूद असद मदनी, मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी और मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने प्रश्नों के उत्तर दिए। सभा के संचालन का दायित्व मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी और मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने संयुक्त रूप से निभाया। 

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