पुणे: महाराष्ट्र महानगर पालिका चुनावों में अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन करने के बावजूद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख एवं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार पुणे व पिंपरी-चिंचवड में पार्टी के पुराने गढ़ों को बचाने में नाकाम रहे और बीजेपी ने एनसीपी के दोनों गुटों को करारी शिकस्त दी। चुनाव प्रचार के दौरान अजित पवार ने अपने राज्य स्तरीय सहयोगी भाजपा पर खुलकर हमला बोला था और पिछले नौ वर्षों में दोनों नगर निकायों में ‘पटरी से उतरे’ विकास और भ्रष्टाचार के लिए भाजपा के स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।
अजित पवार का महायुति गंठबंधन में प्रभाव कम होने के आसार
पुणे में एनसीपी की कमजोर होती स्थिति से राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति गठबंधन में अजित पवार का प्रभाव कम होने की संभावना है। क्षेत्र में एनसीपी प्रमुख के वर्चस्व को चुनौती दे रही बीजेपी को रोकने की कोशिश में अजित पवार ने चाचा शरद पवार से अलग होने और पार्टी विभाजन के दो वर्ष से अधिक समय बाद राकांपा (शरद पवार) के साथ हाथ मिलाया था। पुणे में अजित पवार केंद्रीय मंत्री और शहर के बीजेपी सांसद मुरलीधर मोहोल से सीधा मुकाबला करते नजर आए। वहीं, पिंपरी-चिंचवड में नगर निकाय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने स्थानीय बीजेपी एमएलए महेश लांडगे को निशाना बनाया। हालांकि, शुक्रवार को सामने आए रुझानों के अनुसार, भाजपा दोनों शहरों में निर्णायक जीत की ओर बढ़ती दिखी।
खबर लिखे जाने तक पुणे में भाजपा 110 से अधिक सीट पर आगे है, जबकि एनसीपी 12 और राकांपा (शरद पवार) दो सीट पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं, पिंपरी-चिंचवड में भाजपा 84 सीट पर आगे है, जबकि राकांपा 37 सीट पर बढ़त बनाए हुए है। गौरतलब है कि शरद पवार चुनाव प्रचार से लगभग नदारद रहे, जबकि उनकी बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले भी अधिकांशतः पृष्ठभूमि में ही रहीं।
हार को विनम्रता से स्वीकार करते हैं-एनसीपी (AP)
एनसीपी की पुणे इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप देशमुख ने कहा, “अजित पवार ने प्रचार के दौरान काफी मेहनत की। पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका (पीसीएमसी) में नागरिक मुद्दों को उठाते हुए ‘दादा’ ने एक संतुलित घोषणापत्र पेश किया, जिसमें सभी के लिए मेट्रो और पीएमपीएमएल (बस) में मुफ्त यात्रा, 500 वर्ग फुट से कम क्षेत्रफल वाले घरों को संपत्ति कर से छूट और जलापूर्ति में सुधार का वादा शामिल था। हम हार को विनम्रता से स्वीकार करते हैं।”
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा ने मेट्रो व बस में मुफ्त सफर के वादों का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि NCP ने ये आश्वासन इसलिए दिए, क्योंकि उसे पहले से ही अपनी हार का अंदेशा था। आठ वर्ष के अंतराल के बाद हुए ये नगर निकाय चुनाव के दौरान अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े मुंधवा भूमि सौदे के विवाद की पृष्ठभूमि में हुए। आरोप है कि 1,800 करोड़ रुपये की 40 एकड़ सरकारी भूमि अवैध रूप से ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ को मात्र 300 करोड़ रुपये में बेची गई, जिसमें पार्थ पवार भागीदार हैं। यह सौदा तब जांच के घेरे में आया जब पता चला कि 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी को माफ कर दिया गया। इस संबंध में अमाडिया एलएलपी में सह-साझेदार दिग्विजय पाटिल, विक्रेता और दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।