Yoon Suk Yeol Prison: दक्षिण कोरिया की सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को 5 साल कैद की सजा सुनाई है। यह फैसला दिसंबर 2024 में उनके द्वारा लगाए गए अल्पकालिक मार्शल लॉ से जुड़े मामलों में 8 आपराधिक मुकदमों में पहला फैसला है। इस सजा के प्रमुख आरोपों में शामिल हैं, जांच एजेंसियों द्वारा उनकी गिरफ्तारी के प्रयासों को रोकना (प्रेसिडेंशियल गार्ड्स का इस्तेमाल कर), मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी करना (फर्जी दस्तावेज तैयार करना और नष्ट करना), कानूनी रूप से अनिवार्य पूर्ण कैबिनेट बैठक को दरकिनार करना और कुछ मंत्रियों के अधिकारों का हनन।
न्यायाधीश ने क्या कहा?
न्यायाधीश बेक डे-ह्यून ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यून सुक योल ने कोई पश्चाताप नहीं दिखाया और केवल समझ से परे बहाने देते रहे। उन्होंने कड़ी सजा को जरूरी बताया ताकि कानून व्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई हो सके। यून सुक योल का दावा है कि उन्होंने कभी लंबे समय तक सैन्य शासन लागू करने का इरादा नहीं किया था। उनका कहना है कि यह कदम केवल संसद में उदारवादी ताकतों द्वारा उनके एजेंडे में बाधा डालने के खतरे से जनता को अवगत कराने के लिए था। हालांकि, जांचकर्ताओं ने इसे सत्ता मजबूत करने और बनाए रखने की कोशिश माना है।
यून सुक योल पर ये है सबसे गंभीर आरोप
यह फैसला मार्शल लॉ घोषणा के बाद हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद आया, जिसके चलते संसद ने महाभियोग लगाया, उन्हें गिरफ्तार किया गया और राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया। अभी यून सुक योल पर कुल 8 आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप विद्रोह से जुड़ा है, जिसमें स्वतंत्र अभियोजक ने अगले महीने सुनवाई में मृत्युदंड की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया में 1997 से मृत्युदंड पर व्यावहारिक रोक है, इसलिए आजीवन कारावास या 30 साल से अधिक की सजा की संभावना ज्यादा है।
दक्षिण कोरिया में ऐसा पहली बार हुआ
यून सुक योल को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। उन्होंने अभी तक इस सजा पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, उनके वकीलों ने पहले इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। यह घटनाक्रम दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहां पूर्व राष्ट्रपति पर पहली बार ऐसी सजा सुनाई गई है।
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