Friday, March 13, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Mahashivratri Mythology Story: महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? यहां पढ़ें इस त्यौहार से जुड़ी पौराणिक कथा

Mahashivratri Mythology Story: महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? यहां पढ़ें इस त्यौहार से जुड़ी पौराणिक कथा

Written By: Vineeta Mandal Published : Feb 25, 2025 02:54 pm IST, Updated : Feb 25, 2025 02:54 pm IST

Mahashivratri Story: हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि क्यों मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि 2025- India TV Hindi
Image Source : META AI महाशिवरात्रि 2025

Mahashivratri Story In Hindi: भगवान शिव के भक्त पूरे साल बड़ी बेसब्री के साथ महाशिवरात्रि का इंतजार करते हैं। भोले के भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन पूरे देश में धूमधाम के साथ शिवजी की बारात निकाली जाती है। इतना ही नहीं मंदिर और शिवालयों में भी महाशिवरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। महाशिवरात्रि के मौके पर कई मंदिरों में महादेव का विशेष श्रृंगार किया जाता है। महाशिवरात्रि का व्रत कर विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है।  वहीं कुंवारी कन्याओं के सुयोग्य और मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। तो आइए अब जानते हैं कि आखिर महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इसके पीछे की मान्यताएं क्या हैं।

महाशिवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव का विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री देवी सती के साथ हुआ था। दक्ष महादेव को पसंद नहीं करते थे इसलिए उन्होंने शिव जी को अपने दामाद के रूप में कभी नहीं स्वीकारा। एक बार दक्ष प्रजापति ने विराट यज्ञ का आयोजन करवाया जिसमें उन्होंने भगवान शिव और माता सती को छोड़कर हर किसी को निमंत्रण दिया। इस बात की जानकारी जब माता सती को लगी तो वह बहुत दुखी हुई लेकिन फिर भी वहां जाने का निर्णय ले लिया। महादेव के समझाने के बाद भी सती जी नहीं रुकी और यज्ञ में शामिल होने के लिए अपने पिता के घर पहुंच गई। सती को देख  प्रजापति दक्ष अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने भगवान शिव का अपमान करना शुरू कर दिया। भगवान शिव के लिए दक्ष द्वारा कहे गए वाक्य और अपमान को माता सती सहन नहीं कर पाई और उन्होंने उसी यज्ञ कुंड में खुद को भस्म कर लिया। 

इसके बाद कई हजारों साल बाद देवी सती का दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ। पर्वतराज के घर जन्म लेने की वजह से उनका नाम पार्वती पड़ा। शिवजी से विवाह करने के लिए माता पार्वती को काफी कठोर तपस्या करनी पड़ी थी। कहते हैं कि उनके तप को लेकर चारों तरफ हाहाकर मचा हुआ था। मां पार्वती ने अन्न, जल त्याग कर वर्षों भोलेनाथ की उपासना की।  इस दौरान वह रोजाना शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाती थी, जिससे भोले भंडारी उनके तप से प्रसन्न हो। आखिर में देवी पार्वती के तप और निश्छल प्रेम से शिवजी प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी संगिनी के रूप में स्वीकार किया। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा था कि वह अब तक वैराग्य जीवन जीते आए हैं और उनके पास अन्य देवताओं की तरह कोई राजमहल नहीं है, इसलिए वह उन्हें जेवरात, महल नहीं दे पाएंगे। तब माता पार्वती ने केवल शिवजी का साथ मांगा और शादी बाद खुशी-खुशी कैलाश पर्वत पर रहने लगी। आज शिवजी और माता पार्वती का वैवाहिक जीवन सबसे खुशहाल है और हर कोई उनके जैसा संपन्न परिवार की चाह रखता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें:

Mahashivratri Char Pahar Puja Vidhi: महाशिवरात्रि पर कैसे करें 4 प्रहर की पूजा? जानें सही विधि और चारों प्रहर का पूजन मुहूर्त

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि के दिन जरूर करें शिव चालीसा का पाठ, सभी मनोकामनाओं की होगी पूर्ति

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म

Advertisement
Advertisement
Advertisement