26 सितंबर 1983 को सोवियत अधिकारी स्टैनिस्लाव पेत्रोव ने दुनिया को एक बहुत बड़ी मुसीबत से बचा लिया। अगर पेत्रोव सही फैसला नहीं करते तो सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध छिड़ जाता।
मॉस्को के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सनसनीखेज बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका रूस के साथ परमाणु युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि "मुझे नहीं लगता कि ऐसी स्थिति में कोई भी जीतता है।"
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका क्यों लगातार उसके विरोध में है। अमेरिका क्यों चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाए, आखिर क्यों सभी देश नहीं रख सकते हैं परमाणु बम, ईरान की कोशिश पर अमेरिका और इजरायल ने कैसे फेरा पानी?...आइये सबकुछ आपको बताते हैं।
भारत-पाकिस्तान तनाव पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान सामने आया है। वेंस ने कहा है कि उम्मीद है कि भारत-पाकिस्तान के बीच ये तनाव परमाणु जंग में न बदले।
रूस अपने हितों के लिए कुछ भी करेगा। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन के साथ युद्ध को लेकर एक बार फिर परमाणु हमले से परहेज नहीं करने का संकेत दिया है। अमेरिका के साथ युद्ध की आशंका पर भी उन्होंने जवाब दिया है।
इजरायल ने 2 महीने पहले हमास चीफ इस्माइल हानिया और अब बीते शनिवार को हिजबुल्लाह चीफ सैय्यद हसन नसरल्लाह को मौत के घाट उतारकर मध्यपूर्व में हड़कंप मचा दिया है। इजरायल की यह बहादुरी दूसरे देशों में भी जोश भर रही है। इजरायल का जुनून देख दक्षिण कोरिया ने पहली बार उत्तर कोरिया को उसका शासन नष्ट करने की धमकी दे डाली है।
अमेरिका और चीन ने 5 वर्षों में पहली बार परमाणु वार्ता क्यों की। इस वार्ता के पीछे का असली मकसद क्या था? अमेरिका को क्यों लगता है कि चीन ताइवान पर परमाणु हमला कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने ताइवान जैसे छोटे देश से चीन के हारने की आशंका क्यों जाहिर की? इन सब सवालों का जवाब इस लेख में पढ़िये...
उत्तर कोरिया दुनिया पर एक नया युद्ध थोपने की तैयारी में है। इसके तानाशाह किम जोंग उन ने अपने देश की सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने के लिए कहा है। किम ने परमाणु हथियारों और युद्ध सामग्री उद्योगों को विशेष रूप से युद्ध की तैयारी का यह निर्देश दिया है। किम अमेरिका के साथ टकराव बढ़ने की स्थिति में मुकाबला चाहते हैं।
अमेरिका के साथ रूस ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले "न्यू स्टार्ट" समझौते को तोड़ने के बाद राष्ट्रपति पुतिन के खतरनाक इरादों ने दुनिया में खलबली मचा दी है। इस समझौते के टूटने के बाद दुनिया न्यूक्लियर वॉर के मुहाने पर आकर खड़ी हो गई है।
इससे पहले यूक्रेन पर आक्रमण की घोषणा करते हुए, पुतिन ने स्पष्ट रूप से रूस के ‘दुनिया की सबसे शक्तिशाली परमाणु शक्तियों में से एक’ होने का जिक्र किया था।
अगर कश्मीर पर भारत के साथ तनाव बढ़ता है तो पाकिस्तान युद्ध के लिए बाध्य होगा। जो कश्मीर मामले में भारत के साथ खड़े हैं, उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा।
पाकिस्तानी सेना ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत बार-बार गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर युद्ध भड़का रहे हैं और क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल रहे हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच अगर परमाणु युद्ध हुआ तो एक सप्ताह से कम समय के भीतर ही 50 लाख से 12.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती है। यह संख्या छह साल चले दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की संख्या के मुकाबले बहुत ज्यादा होगी।
परमाणु युद्ध के बारे में पाकिस्तान के बार-बार जिक्र करने के मद्देनजर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि परमाणु शक्ति के रूप में भारतीय नौसेना की ‘जवाबी हमला करने की क्षमता’ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर भारत के साथ युद्ध की संभावना जताई है। उन्होंने कश्मीर मसले को लेकर परमाणु युद्ध होने के आसार भी जताए हैं।
अगर हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हुआ तो इसका प्रकोप सिर्फ एक शहर, एक प्रांत या एक देश तक सिमित नहीं होगा बल्कि इस विनाश की चपेट में पूरी दुनिया आ जाएगी।
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गवर्नर हाउस में जुटे सिख समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि उनका देश कभी भी भारत के साथ युद्ध की शुरुआत नहीं करेगा।
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से बौखलाए पाकिस्तान ने एक बार फिर युद्ध की गीदड़भभकी दी है। इमरान के मंत्री ने कहा कि अक्टूबर के आखिर और नवंबर-दिसंबर में दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात बन जाएंगे।
पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया देख रही है कि पाकिस्तान कश्मीर के लोगों के साथ खड़ा है और उनका हरदम साथ देने को तैयार है।
पोप फ्रांसिस ने आज कहा कि उन्हें इस बात का भय है कि केवल एक गलती से पूरी दुनिया पर परमाणु युद्ध का संकट छा सकता है।
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