केंद्रीय गृह मंत्री ने CBI और I4C द्वारा आयोजित साइबर-इनेबल्ड फ्रॉड और उसके ईकोसिस्टम को खत्म करने वाले कांफ्रेंस में कहा कि देश की सभी एजेंसियां साइबर अपराध को रोकने के लिए सरकार के अलग-अलग विभाग काम कर रहे हैं। CBI और I4C के प्रयास से साइबर अपराध को रोकने के लिए सभी सरकारी विभाग के साथ मिलकर काम कर पाएंगे। पिछले 11 सालों से सरकार के प्रयासों की वजह से भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्यां 100 करोड़ के पार पहुंच गया है। ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्यां भी 100 करोड़ के पार है। दुनिया में हर दूसरा डिजिटल ट्रांसजेक्शन भारत में हो रहा है, जिन्हें हमे सुरक्षित करना है।
डिजिटल इंडिया मिशन और सरकार के भारत नेट परियोजना की वजह से आज देश के ग्राम पंचायत ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जुड़ गए हैं। UPI के आने से हर साल अरबों डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं। भारत में 97 करोड़ से अधिक जनधन खाते हैं। इन डिजिटल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित करना हमारा मुख्य लक्ष्य है। साइबर सिक्योरिटी अब हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ गया है। देश के महत्वपूर्ण संस्थानों का डेटा और उनका डेटाबेस एक्सेस करके हमारे दुश्मनों को भी बेचे जाने की कोशिश की जा रही है। हमने जनवरी 2019 में I4C की स्थापना की और 2020 में इसे गृह मंत्रालय के एक अंग के तौर पर मान्यता दी है।
I4C ने पिछले कुछ साल में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। साइबर अपराधों पर कई बार प्रभावी कदम उठाए हैं। जो साइबर क्राइम का काम करते थे वो पहले व्यक्तिगत तौर पर करते थे अब वो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके संस्थागत तरीके से काम कर रहे हैं। हमें इन चुनौतियों को समझकर सभी लूप-होल्स और लीकेज को बंद करने के लिए सभी विभागों के साथ मिलकर काम करना होगा। हमें कैपेसिटी बिल्डिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट के साथ-साथ साइबर जागरूकता पर ध्यान देना होगा।
सभी विभागों के बीच एक समन्वय करने की जरूरत है, जिसमें CBI, NIA, RBI जैसे संस्थान शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने साइबर क्राइम पोर्टल का जिक्र करते हुए कहा कि इसके जरिए पिछले साल नवंबर तक 23.61 लाख शिकायतें आई हैं, जिनमें कार्रवाई करते हुए 1.8 लाख करोड़ रुपये बचाने का काम किया गया है। यह एक बहुत बड़ी सफलता है। दिसंबर 2025 तक 12 लाख सिम कार्ड और 3 लाख मोबाइल डिवाइस के IMEI को ब्लॉक करने का काम किया है, 20,853 अपराधी पकड़े गए हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हर घंटे 95 से 100 लोग औसतन साइबर फ्रॉड के शिकार हो रहे हैं। हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं, जितनी तेज गति से डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ा है, रिस्क भी उतनी तेजी से बढ़ी है। पहले लोग मैनुअल और परंपरागत तरीके से हैकिंग करते थे। अब ये ज्यादा एडवांस हो गया है। इन दिनों साइबर अपराधी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फ्रॉड कर रहे हैं। हम भी इससे दो कदम आगे बढ़कर इसे रोकने का काम कर रहे हैं।
हमारा साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 प्रभावी तौर पर काम करे इसके लिए कॉल सेंटर में ज्यादा लोगों की जरूरत है, ताकि फटाफट रिपोर्ट किया जा सके। अमित शाह ने स्टेट पुलिस से कहा कि अगर 1930 पर कोई कॉल करता है और इमरजेंसी में कोई कॉल रिसीव नहीं करता है टाइम पर और पीड़ित का पैसा तब तक चला जाता है तो 1930 की इमेज खराब होती है।
RBI और गृहमंत्रालय ने मिलकर जो म्यूल अकाउंट हंटर ऐप बनाया है उसे सभी प्राइवेट और सरकारी बैंको को अडॉप्ट करना चाहिए। अब तक I4C में 795 संस्थान जुड़ चुके हैं। सभी संस्थान मिलकर काम करेंगे तो अच्छा रहेगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश देते हुए कहा कि लोगों को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। बैंक, I4C और सभी विभाग मिलकर एक साथ काम करे ताकि साइबर अपराधियों को तेजी से पकड़ा जा सके।
सभी संस्थानों में I4C की प्रॉयरिटी तय करने की जरूरत है, ताकि साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने में तेजी आ सके। इसके साथ-साथ ग्राहक को सुरक्षित करने की भी प्रायरिटी होनी चाहिए। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी I4C को प्रॉयरिटी के साथ रिस्पॉन्ड करने की जरूरत है। I4C और CBI के द्वारा चलने वाला ये दो दिनों का वर्कशॉप साइबर फ्रॉड को रोकने में अहम भूमिका निभाएगा।
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