बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन कई ऐसी बीमारी है जो उम्र नहीं देखती और यह किसी भी एज में हो सकती है। बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों में रहने वाली महिलाओं को यह बीमारी आसानी से अपनी गिरफ्त में ले लेती है।
कैंसर एक ऐसा खतरनाक रोग है जो पुरुषों में हो या स्त्रियों में ये दोनों के लिए खतरनाक है लेकिन हालिया रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बड़े शहरों में रहने वालों पुरुषों को एक खास तरह की कैंसर अपना शिकार बना रही है। जानिए क्यै है वह कैंसर एंव उसके लक्ष
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (एमआईटी) के अनुसंधानकर्ताओं ने कैंसर के इलाज के लिए मशीन लर्निग की एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे घातक मस्तिष्क कैंसर के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
कैंसर के शुरूआती लक्षणों को अगर पहचान लिया जाये तो इसे खतरनाक स्टेज तक जाने से रोका जा सकता है। शुरुआती अवस्था में पहचान होने के बाद इसके उपचार में आसानी भी होती है और इसके कारण होने वाली मौतों को भी रोका जा सकता है।
भारतीय महिलाओं को लेकर एक हैरान करने वाली रिसर्च सामने आई है। इस रिसर्च में खुलासा हुआ है कि हर साल करीब 7 लाख कैंसर के मरीज सामने आते हैं। कैंसर को यह बात सामने आई हैं कि अगर सही समय पर इस बीमारी का पता चल जाए तो इसका इलाज किया जा सकता है। इस रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि भारतीय महिलाओं में ज्यादातर इस टाइप के कैंसर होते हैं।
मशहूर फिल्म अभिनेत्री सोनीली बेंद्रे ने आज जब अपने ट्विटर हैंडर पर खुद को मेटास्टेटिक कैंसर से पीडि़त होने का खुलासा किया तो उनके प्रशंसकों से लेकर पूरी फिल्म इंडस्ट्री में गम की लहर दौड़ गई।
अगर ब्रेन ट्यूमर की पहचान जल्द हो जाए तो तो 90 प्रतिशत कैंसर रहित ब्रेन ट्यूमर का पूरी तरह से इलाज हो जाता है, बशर्ते सही तरीके से इलाज कराया जाए। ब्रेन ट्यूमर के बारे में आम लोगों में जागरूकता कायम करने के उद्देश्य से आठ जून को दुनियाभर में विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है।
कैंसर मरीजों के मांसपेशियों में जिंक की अतिरिक्त मात्रा उनकी मांसपेशियों की ताकत कम कर सकती है और उनके मौत के जोखिम को बढ़ा सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, काचेक्सिया को 30 फीसदी सभी तरह के कैंसर रोगियों के मौत के जिम्मेदार ठहराया जाता है।
कैंसर का खतरा को हम आसानी से कम कर सकते है। लेकिन उसके लिए सबसे पहले हमें अपने खानपान और लाइफस्टाईल में कुछ खास चीजों को शामिल करनी होगी।
पूरी दुनिया में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे पूरी तरह से ठीक करने के लिए अभी तक कोई दवा का अविष्कार नहीं हुआ है। आज वर्ल्ड कैंसर डे पर आपको बताएंगे कैसे कैंसर धीरे-धीरे शरीर को खराब कर देता है।
एक हालिया शोध ने संकेत दिया है कि लगभग 40 प्रतिशत कैंसर मौतों को जीवनशैली में आसान बदलावों से रोका जा सकता है।
आम तौर पर लोग तंबाकू से कैंसर और अन्य खतरों के बारे में तो जानते हैं लेकिन विशेषज्ञ पान और सुपारी को भी उतना ही खतरनाक बताते हैं।
कैंसर ऐसी बीमारी है जिसका इलाज काफी मुश्किल है। साथ ही इस बीमारी की सबसे खराब बात यह है कि यह अपने शुरुआती फेज में रहती है तो आप इसका पता तक नहीं लगा सकते है और जब तक इस बीमारी का पता चलता है तब तक अपने अंतिम चरण में पहुंचा रहता है।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का यह कहना है कि दोषपूर्ण जीवनशैली और हानिकारक आहार से बड़ी आंत का कैंसर होने का खतरा हमेशा बना रहता है।..
"ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन बढ़ने, जीवन शैली में बदलाव, अधिक जागरूकता, और प्रभावी चिकित्सा की उपलब्धता से अनेक मामलों में प्रोस्टेट कैंसर की जांच समय से होने लगी है।
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