राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में H-1B वीजा कार्यक्रम में व्यापक बदलाव किया है। ये कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशिष्ट व्यवसायों में विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है।
एच-1बी वीजा धारक बिना किसी प्रतिबंध के अमेरिका में आना-जाना जारी रख सकते हैं, जो फीस घोषणा के बाद उठाई गई सबसे बड़ी चिंताओं में से एक का समाधान है।
US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज इस प्रस्ताव को लेकर बुधवार से 30 दिनों तक जनता से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित करेगा, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि यह बढ़ोतरी आईटी कंपनियों के लिए एक चुनौती जरूर है, लेकिन उनकी मजबूत रणनीतियां और ऑपरेशनल मॉडल इस असर को काफी हद तक कम कर देंगे।
एंप्लॉयर (कंपनी) के साइज और बाकी कॉस्ट के आधार पर H-1B वीजा फीस अभी तक लगभग 2,000 अमेरिकी डॉलर से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक था।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को कहा कि छह सितंबर को नई दिल्ली में अमेरिका के साथ होने वाले मंत्रिस्तरीय वार्ता में भारत एच-1 बी वीजा में बदलाव के मामले को उठाएगा।
ट्रंप प्रशासन ने फैसला इस आकलन के बाद किया है कि अमेरिकी कंपनियों की जरूरत को सिर्फ अमेरिकी कर्मचारियों से पूरा नहीं किया जा सकता है इसलिए H2B वीजा जरूरी है
दूसरे छोर से राहत की खबर आई है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था जापान ने भारत जैसे देशों के IT प्रोफेशनल्स के लिए अपने दरवाजे खोलने का एलान किया है।
संसद में एक नया बिल पेश किया है, जो भारतीय कंपनियों को H-1B और एल-1 वर्क वीजा पर आईटी प्रोफेशनल्स को भर्ती करने से रोकेगा।
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