गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने महबूबा मुफ्ती की सरकार से 19 जून को समर्थन वापस ले लिया था, और इसके अगले ही दिन सूबे में राज्यपाल शासन लागू हो गया था।
गौरतलब है कि बुधवार को कांग्रेस, एनसी और पीडीपी गठबंधन करके कथित तौर पर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।
पीडीपी ने जैसे ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक के पास राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया उसके कुछ घंटे बाद ही राज्यपाल ने विधानसभा ही भंग कर दी। कांग्रेस, नेशनल कॉन्फेंस और पीडीपी तीनों इसे अपने फायदे से जोड़ कर देख रही है क्योंकि बीजेपी फिलहाल तो राज्य में चुनाव नहीं चाहती थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि एक लोकप्रिय सरकार का गठन करने के लिए वार्ता प्रारंभिक चरण में थी और केन्द्र की भाजपा सरकार इतनी चिंतित थी कि उन्होंने विधानसभा भंग कर दी।
सरकार गिरने के बाद से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है। 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे और नियमों के मुताबिक, इसे दोबारा बढ़ाया नहीं जा सकता है।
अलगाववादियों ने चुनाव के बहिष्कार की अपील की है जबकि आतंकवादियों ने चुनाव में हिस्सा लेने वालों को निशाना बनाने की धमकी दी है।
उमर अब्दुल्ला भाजपा के महासचिव राम माधव को जवाब दे रहे थे, जिन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से पूछा है कि निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने पर क्या वे हिस्सा लेंगे।
राम माधव ने पूछा कि एक तरफ तो दोनो दल विधानसभा भंग कर चुनाव कराने की मांग करते हैं और दूसरी तरफ कहते हैं कि जबतक आर्टिकल 35A का मुद्दा हल नहीं होता तबतक चुनाव नहीं लड़ेंगे
जम्मू कश्मीर में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए नेशनल कांफ्रेंस पार्टी छोड़ने वाले जुनैद अजीम मट्टू भाजपा और पीपुल्स कांफ्रेंस के समर्थन से मंगलवार को श्रीनगर नगर निगम के महापौर निर्वाचित हुए।
जम्मू क्षेत्र में भाजपा ने 212 वार्डो पर, कांग्रेस ने 110 पर, नेशनल पैंथर्स पार्टी ने 13 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 185 वार्डो पर कब्जा किया है। जम्मू क्षेत्र में जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, उधमपुर, पुंछ और रजौरी जिले शामिल हैं।
गौरतलब है कि कश्मीर में आतंकियों ने लोगों से चुनावों का बहिष्कार करने को कहा है। हांलाकि नैशनल कान्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी चुनावों का बहिष्कार किया है।
जम्मू-कश्मीर में आठ अक्टूबर से शुरू हो रहे चार चरण के स्थानीय निकाय चुनावों में 16.97 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन अब तक यहां चुनाव प्रचार का रंग नहीं चढ़ सका है।
नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जुनैद आजीम मट्टू ने स्थानीय निकाय चुनावी के बहिष्कार के नेकां के निर्णय से असहमति जताते हुए मंगलवार को पार्टी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे जम्मू कश्मीर में आगामी पंचायत एवं शहरी निकाय संस्था के चुनाव में हिस्सा लें।
नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी की ओर से घोषित बहिष्कार के बावजूद केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
तबादले के बाद एसपी वैद्य को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन में भेजा गया है। उन्हें ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का पद दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन के पास डीजीपी जैसे अहम पद के लिए एक फुलटाइम उम्मीदवार नहीं था तो अचानक एसपी वैद्य को तबादला क्यों किया गया।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य प्रशासन ने शहरी स्थानीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव कराने का फैसला जल्दबाजी में लिया।
2019 लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की कोशिश थर्ड फ्रंट को खड़ा करने की है। इसमें उन दलों को शामिल किया जाएगा जो भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही साथ नहीं है। कई अन्य क्षेत्रीय दल भी इसमें ममता बनर्जी के साथ हैं।
अब्दुल्लाह ने ट्वीट में भाजपा नेताओं को टैग करते हुए कहा, ‘‘राम माधव के दावे के विपरीत, प्रदेश भाजपा इकाई ने पीडीपी को तोड़ने के प्रयास पार्टी द्वारा किये जाने की बात स्वीकार की है। ऐसा लगता है कि किसी भी कीमत पर सत्ता दिशानिर्देशक सिद्धांत है।’’
भाजपा ने 19 जून को जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके ऐलान के समय पार्टी ने कहा था कि राज्य में बढ़ते कट्टरपंथ और आतंकवाद के कारण सरकार में बने रहना मुश्किल हो गया था...
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