जहां एक तरफ आईटी सेक्टर में लेऑफ और कॉस्ट कटिंग की खबरें कर्मचारियों की चिंता बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ एक दिग्गज आईटी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत और खुशखबरी दी है। Cognizant Technology Solutions ने अपने कर्मचारियों को 100 फीसदी डिस्क्रेशनरी बोनस देने का ऐलान किया है।
एओएन के एक सर्वे में कहा गया है कि रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर (10.9%) और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (10%) 2026 में सबसे बड़ी वेतन वृद्धि होने के आसार हैं। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 2025 में भारत में कर्मचारियों की छोड़ने की दर घटकर 17.1 प्रतिशत हो गई है।
आज कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है स्किल्ड पेशेवरों की कमी। कंपनियां अपने कर्मचारियों को अपस्किलिंग और रीस्किलिंग पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनियां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को अपने साथ बनाए रखने के लिए औसत प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की तुलना में 1.7 गुना ज्यादा इंक्रीमेंट दे सकती हैं।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने वित्त वर्ष के लिए 4% से 8% की वेतन वृद्धि की है। वेतन वृद्धि की घोषणा करने में यह सबसे आगे रही है। हालांकि, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो और टेक महिंद्रा ने अभी वेतन वृद्धि के बारे में अंतिम घोषणा नहीं की हैं।
Salary Hike : इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल इंडस्ट्रीज में 10 फीसदी वेतनवृद्धि होने का अनुमान है। इस साल औसतन 16.9 प्रतिशत कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ी। जबकि 2023 में यह अनुपात 18.7 प्रतिशत और 2022 में 21.4 प्रतिशत था।
सर्वे के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक सैलरी इंक्रीमेंट भारत में जारी है। इस साल 9.5 फीसदी सैलरी इंक्रीमेंट हो सकता है।
रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर ट्रस्ट के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया है। रामलला के पुजारी और सेवादारों को सरकारी सुविधाओं जैसी सुविधाएं राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दी जाने की भी योजना है।
पश्चिम बंगाल में विधायकों की सैलरी में 40 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसका ऐलान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में किया। हालांकि ममता खुद लंबे अर्से से कोई वेतन नहीं ले रही हैं।
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि 2022 में, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में सबसे ज्यादा वेतन वृद्धि देने की संभावना है, इसके बाद जीवन विज्ञान (लाइफ साइंसेज) क्षेत्र आता है।
2020 में वेतन वृद्धि 6.1 प्रतिशत रही थी। 2021 में इसके 8.8 प्रतिशत तथा 2022 में 9.4 प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद है। यह 2018 और 2019 के महामारी-पूर्व के स्तर के बराबर होगा।
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार कंपनिया पिछले साल के मुकाबले कर्मचारियों को करीब दोगुना इंक्रीमेंट दे सकती हैं।
भारत में कंपनियां कोविड-19 संकट से उत्पन्न आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं बावजूद इसके बिजनेस रिकवरी को लेकर सकारात्मकता बढ़ रही है और इसका असर सैलरी इन्क्रीमेंट बजट पर दिखना अभी बाकी है।
सर्वे के अनुसार 10 में से सिर्फ चार कंपनियों ने 2020 में कर्मचारियों को वेतनवृद्धि दी है। 33 प्रतिशत कंपनियों ने कर्मचारियों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला किया है।
देश में वेतनभोगियों की 2020 में सालाना औसत वेतन वृद्धि 9.2 प्रतिशत होने की उम्मीद है। यह एशिया में सबसे अधिक होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेतन में हालांकि 10 प्रतिशत की वृद्धि एक रिवाज बनती जा रही है लेकिन यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में सर्वाधिक है।
अर्थव्यवस्था में नरमी के बावजूद देश में अगले साल निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
गुजरात विधानसभा ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया जिसके जरिये विधायकों, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्षों, विधानसभा उपाध्यक्षों और विपक्ष के नेता का वेतन प्रति माह कम से कम 45000 रुपये तक बढ़ जाएगा।
केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात लेफ्टिनेंट गवर्नर्स की सैलरी में करीब 281 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर्स की सैलरी में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
दिल्ली सरकार ने शनिवार को राज्य में अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल कर्मियों के न्यूनतम वेतन में करीब 37 फीसदी बढ़ोतरी करने को मंजूरी दे दी है।
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