Top Small Cap Stocks: देश के बड़े ब्रोकरेज हाउस की ओर से 2024 के लिए कुछ स्मॉल कैप स्टॉक्स सुझाए गए हैं, जिनमें तेजी देखने को मिल सकती है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार कहते हैं, जैसे-जैसे 2023 करीब आ रहा है, साल की रैली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता व्यापक बाजार का तेज बेहतर प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि मिडकैप इंडेक्स लगभग 45 फीसदी ऊपर है और स्मॉल कैप इंडेक्स 55 फीसदी ऊपर है।
देश के बेहतर आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों और भारी खुदरा निवेशकों की भागीदारी से इक्विटी बाजार के लिहाज से 2023 एक लाभप्रद वर्ष साबित हुआ है। इसके चलते स्मॅल कैप और मिड कैप यानी छोटे और मझोले कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजारों में लंबे समय से तेजी का दौर जारी है।
डीमैट अकाउंट्स (Demat Account) में जोरदार बढ़ोतरी, जो अब 132 मिलियन (13.2 करोड़) तक पहुंच गई है, बाजार में तेजी में प्रमुख भूमिका निभा रही है, जबकि लार्ज कैप एफआईआई की बिकवाली के दबाव में हैं।
कई मार्केट एक्सपर्ट से इंडिया टीवी ने बाजार के आउटलुक को लेकर पोल किया और उनकी राय जानी। अधिकांश एक्सपर्ट ने कहा कि भारतीय बाजार में अभी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।
फिलहाल कोई तत्काल ट्रिगर नहीं हैं जो बाजार को तेजी से ऊपर या नीचे ले जा सके। निवेशक इस सप्ताह के अंत में अमेरिका से आने वाले नए डेटा का इंतज़ार कर सकते हैं। चूंकि डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है, इसलिए एफआईआई बाजार में मजबूत खरीददार नहीं होंगा। उन्होंने कहा, इस महीने के पिछले पंद्रह कारोबारी दिनों म
मौजूदा पीई की पर्सेंटाइल रैंक से पता चलता है कि ऑटो, आईटी और टेक्नोलॉजी थोड़े ओवर-वैल्यूड हैं जबकि बैंक, एफएमसीजी और पूंजीगत वस्तुओं का वैल्यूएशन सही है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार भारतीय शेयर बाजार के लिए यह एक उथल-पुथल भरा साल था। उच्च ब्याज दर, तेज महंगाई और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई नकारात्मक कारकों का असर शेयर बाजारों पर हुआ।
जनवरी 2021 में रजनीश वेलनेस शेयर का भाव 0.55 पैसे था। वहीं, 23 जनवरी को इस शेयर का भाव बढ़कर 18.90 रुपये पहुंच गया है।
इस साल 27 दिसंबर तक बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 940.72 अंक यानी 3.19 प्रतिशत नीचे आया।
Small Companies New Rule: सरकार ने छोटी कंपनियों के लिए पेडअप कैपिटल (Paid-up Capital) और टर्नओवर सीमा में बदलाव किया है।
इस साल 20 जून को बीएसई स्मॉलकैप अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर 23,261.39 अंक पर आ गया था। यह 18 जनवरी को अपने एक साल के शिखर 31,304.44 अंक पर था।
बीते वित्त वर्ष में बीएसई का स्मॉलकैप सूचकांक 7,566.32 अंक या 36.64 प्रतिशत चढ़ गया। वहीं मिडकैप में 3,926.66 अंक या 19.45 प्रतिशत की बढ़त रही।
बीते एक साल में स्मालकैप शेयरों ने शानदार रिटर्न दिया है। लार्जकैप या मिडकैप इंडेक्स की तुलना में कई स्मालकैप ने कई गुना अधिक रिटर्न दिया है।
सेबी के नए नियमों के मुताबिक मल्टीकैप फंड को निवेश का कम से कम 25% हिस्सा स्मॉलकैप में रखना होगा। हालांकि बाद में सेबी ने साफ किया कि फंड अपनी योजनाओं का उसके पोर्टफोलियो से मिलती जुलती दूसरी योजनाओं में मर्जर कर सकते हैं।
बीते सप्ताह शेयर बाजार में तेजी रही, जिसमें गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के एक्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुमत मिलने के अनुमान का मुख्य योगदान रहा।
BSE के स्मॉल कैप इंडेक्स ने 31 मई को समाप्त तीन वर्ष में 72 फीसदी रिटर्न दिया और इस मामले में सेंसेक्स और लार्ज कैप सूचकांकों को पीछे छोड़ दिया है।
शेयर बाजार की तेजी में रिलायंस का मिड-स्मॉलकैप फंड, L&T मिडकैप फंड, DSP बीआर स्मॉल-मिडकैप म्यूचुअल फंड ने पिछले एक महीने में 3% का निगेटिव रिटर्न दिया है।
मोदी सरकार के कार्यकाल में स्मॉलकैप कंपनी यूनिप्लाई इंडस्ट्रीज, मंगलम ड्रग्स, क्यूपिड, इंडो काउंट इंडस्ट्रीज के शेयरों ने 6000% का बड़ा रिटर्न दिया है।
फायदे के मामले में देश में शेयर केंद्रित ज्यादातर म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन दिसंबर 2016 को समाप्त एक वर्ष के दौरान प्रमुख शेयर सूचकांकों की तुलना में कम रहा।
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