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'मदरसों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला संविधान की जीत', मौलाना महमूद असद मदनी की राज्य सरकारों से खास अपील

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jan 19, 2026 09:01 pm IST,  Updated : Jan 19, 2026 09:01 pm IST

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि मदरसों के खिलाफ मनमानी और गैरकानूनी कार्रवाई बंद होनी चाहिए। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से अपील करते हुए कहा कि र मदरसों के खिलाफ किसी भी तरह की मनमानी, गैरकानूनी या भेदभावपूर्ण कार्रवाई से तुरंत बचें।

Maulana Mahmood Asad Madani- India TV Hindi
मौलाना महमूद असद मदनी Image Source : PTI

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हजरत मौलाना महमूद मदनी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा स्वतंत्र और गैर-मान्यता प्राप्त (नॉन-अफिलिएटेड) दीनि मदरसों के संबंध में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारतीय संविधान की सर्वोच्चता और संवैधानिक मूल्यों की स्पष्ट जीत है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह फैसला उन सभी सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक साफ संदेश है, जो दीनि मदरसों और मकतबों को बंद करने जैसे कदमों को अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम न केवल असंवैधानिक थे, बल्कि अंत में खुद उन्हीं के लिए शर्मिंदगी का कारण बने।

उत्तराखंड सरकार के खिलाफ भी लड़ रही जमीयत

मौलाना ने बताया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद श्रावस्ती जिले के 30 मदरसों की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट में पक्षकार रही है और उत्तराखंड सरकार के रवैये के खिलाफ भी कानूनी और लोकतांत्रिक संघर्ष कर रही है। इस फैसले से इन प्रयासों को मजबूती मिली है। साथ ही उन्होंने मदरसों के संचालकों से अपील की कि वे अपने आंतरिक प्रबंधन और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाते रहें, ताकि विरोध करने वालों को कोई बहाना न मिले।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मौलाना मदनी ने कहा कि हाई कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि केवल मान्यता न होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद करना, सील करना या उसकी पढ़ाई रोकना कानूनन गलत है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के मदरसा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत प्रशासन गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे को बंद कर सके। उन्होंने आगे कहा कि हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस संवैधानिक सिद्धांत की भी पुष्टि की है, जिसके अनुसार वे अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान जो न तो सरकारी सहायता लेते हैं और न ही मान्यता चाहते हैं, उन्हें संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत पूरा संरक्षण प्राप्त है।

सभी राज्य सरकारों से मौलाना की अपील

मौलाना मदनी ने उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्य सरकारों से अपील की कि वे इस फैसले और सुप्रीम कोर्ट के तय संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार अपनी नीतियों की समीक्षा करें और मदरसों के खिलाफ किसी भी तरह की मनमानी, गैरकानूनी या भेदभावपूर्ण कार्रवाई से तुरंत बचें। उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद संविधान के दायरे में रहते हुए अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक, धार्मिक और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। इस मौके पर मौलाना मदनी ने इस मामले की पैरवी करने वाले वकीलों और पक्षकार मदरसों के धैर्य और कानूनी संघर्ष की सराहना की और उन्हें इस सफलता पर बधाई दी।

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