Monday, February 02, 2026
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UP: फर्जी सर्टिफिकेट वाले अस्सिटेंट टीचर के मामले पर हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश, नियुक्ति रद्द, सैलरी भी की जाए रिकवर

याचिकाकर्ता ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल नियुक्ति को रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए रिट याचिका कोर्ट में दायर की थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जांच में 6 महीने का समय दिया है।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Feb 02, 2026 11:08 pm IST, Updated : Feb 02, 2026 11:16 pm IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सहायक अध्यापक के पदों पर नियुक्ति हासिल करने के मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी नियुक्तियों की एक समग्र जांच करने का निर्देश दिया है।

6 महीने के भीतर हो जांच

हाई कोर्ट ने राज्य के प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) को यह कवायद 6 महीने के भीतर पूरी करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि न केवल अवैध नियुक्तियां रद्द की जाए, बल्कि वेतन भी वसूला जाए और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 

समय पर कार्रवाई करने में विफल

गरिमा सिंह नामक एक महिला की रिट याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कई सर्कुलर और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था में शुद्धता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारी ऐसी अवैध नियुक्तियों के खिलाफ प्रभावी और समय पर कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। 

हाई कोर्ट में दायर हुई थी रिट याचिका

याचिकाकर्ता ने जाली दस्तावेजों के जरिए हासिल नियुक्ति को रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए यह रिट याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने कहा, 'इन अधिकारियों की निष्क्रियता से न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जड़ पर भी प्रहार होता है जिससे विद्यार्थियों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। विद्यार्थियों का हित इस अदालत के विचार से सर्वोपरि है।' 

दस्तावेज और निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाया था

गरिमा सिंह की नियुक्ति देवरिया जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने रद्द कर दी थी। बीएसए ने याचिकाकर्ता के शैक्षणिक दस्तावेज और निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाया था। याचिकाकर्ता को जुलाई, 2010 में सहायक अध्यापिका के तौर पर नियुक्त किया गया था और उसने बिना शिकायत करीब 15 साल अपनी सेवा दी थी। 

दंडात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश

सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने कहा कि जिन मामलों जाली दस्तावेजों के आधार पर या तथ्यों को छिपाकर रोजगार हासिल किया जाता है, उन मामलों में लाभार्थी उत्तर प्रदेश सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के तहत जांच की मांग नहीं कर सकता। कोर्ट ने 22 जनवरी को अपने निर्णय में फर्जी नियुक्ति के मामलों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

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