कानपुर: सूबे में योगी सरकार की तरफ से अपराध के जीरो टॉलरेंस मामले में सरकार भले सख्ती से पालन करने का आदेश जारी कर रही है, लेकिन यूपी पुलिस के कई रिश्वतखोर अधिकारी आदेश को ताक पर रखकर निर्दोष लोगों को कभी डराकर तो कभी कागजों में उलझाकर अवैध रूप से रिश्वत की डिमांड कर रहे हैं। ऐसे मामलों में आलाधिकारियों के संज्ञान के बाद कार्रवाई भी देखने को मिली है । कानपुर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसका एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यशैली को उजागर कर रहा है।
वायरल ऑडियो से पकड़े गए दरोगा जी
ऐसे में कथित तौरपर घूस की डिमांड करते एक दरोगा के वायरल ऑडियो का संज्ञान लेते हुए कानपुर पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मिसाल दी। जानकारी के अनुसार, नरवल थाने में तैनात दारोगा संदीप कुमार को रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह मामला दहेज उत्पीड़न के संवेदनशील केस से जुड़ा है, जिसमें जांच अधिकारी ने कथित तौर पर पक्षपात और रिश्वतखोरी की।
पीड़ित पक्ष से मांगी 90 हजार की रिश्वत
नरवल क्षेत्र के दीपापुर गांव की निवासी नेहा ने दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच दारोगा संदीप कुमार को सौंपी गई। आरोप है कि उन्होंने पीड़ित पक्ष से 90 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, ताकि मुकदमे में कुछ नाम हटाए जा सकें या जांच को प्रभावित किया जा सके। जब रिश्वत नहीं मिली, तो जांचकर्ता दारोगा ने जानबूझकर 12 लोगों को आरोपी बना दिया। इनमें मुख्यालय में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी और आईटीबीपी के जवान भी शामिल थे।
दरोगा पर क्या है पीड़ित पक्ष का आरोप?
आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने के बावजूद संदीप कुमार ने चार्जशीट दाखिल कर दी, जिससे मामले को अनावश्यक रूप से जटिल बना दिया गया। मामले की पोल तब खुली जब रिश्वत मांगने वाली बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस ऑडियो में दारोगा की तरफ से रिश्वत की मांग स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है, जिसके बाद जनाक्रोश बढ़ा और शिकायतें दर्ज हुईं।
पुलिस विभाग ने सस्पेंड किया दरोगा
नेहा के पति रोहित तिवारी ने डीसीपी पूर्वी से गुहार लगाई। डीसीपी ने मामले की गहन जांच कराई, जिसमें संदीप कुमार दोषी पाए गए। जांच पूरी होने पर पुलिस आयुक्त ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है।
पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी अगर स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो उन्हें भी कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। इस कार्रवाई के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया की मांग की है।
(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)
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